नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रयोग के तौर पर 15 दिनों के लिए सम-विषम योजना लागू की है, लेकिन उच्च न्यायालय ने बुघवार को दिल्ली सरकार से पूछा कि क्या इस योजना को 15 दिनों की जगह एक सप्ताह तक सीमित किया जा सकता है? मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की पीठ ने सरकार को योजना लागू होने के दौरान राजधानी में एक सप्ताह में प्रदूषण के स्तर का आंकड़ा पेश करने को कहा है। पीठ ने सरकार से सवाल किया है, "क्या इसे दो सप्ताह के लिए लागू करना जरूरी है? क्या इसे आठ दिनों के लिए सीमित नहीं किया जा सकता? लोगों को योजना के कारण असुविधा हो रही है।"
ज्ञात हो कि आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली सरकार ने सम-विषम योजना को एक जनवरी से 15 जनवरी के लिए प्रायोगिक तौर पर लागू किया है।
कम भीड़भाड़ से स्थानीय प्रदूषण में कमी आई
दिल्ली में सम विषम कार योजना लागू करने से भीड़भाड़ कम होने के कारण लोगों को प्रदूषण से सीधे प्रभावित होने से राहत मिल रही है विशेष तौर पर वैसे क्षेत्रों में जहां कारों का घनत्व काफी अधिक रहता है। विशेषज्ञयों ने यह राय जाहिर की है। विशेषज्ञयों ने सर्वसम्मति से इस बात का समर्थन किया कि कारों की संख्या कम होने से नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर आक्साइड और ब्लैक कार्बन जैसी गैसों के उत्सर्जन का स्तर कम हुआ है जो धूल कणों और वाहनों के धुएं के जरिये प्रदूषण फैलाते हैं।
हालांकि इन्होंने चेताया कि इस पहल से पीएम 2.5 और पीएम 10 एवं श्वसन को प्रभावित करने वाले अन्य तत्वों की मात्रा में कोई बड़ी कमी आने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से सम विषम योजना की शुरूआत एक जनवरी को की गई थी। विशेषज्ञयों ने इस बात को खारिज किया कि इस पायलट परियोजना के अब तक कम लाभ मिले हैं । पर्यवारणविदों और शहरी योजनाकारों ने कहा कि खराब मौसम के कारण इसका वांछित लाभ नहीं मिल पाया है।