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SC से क्‍यूरेटिव पिटिशन ख़ारिज होने के बाद याकूब ने राज्यपाल को दी दया याचिका

 Written By: Bhasha
 Published : Jul 22, 2015 07:18 am IST,  Updated : Jul 22, 2015 05:59 pm IST

नागपुर: सुप्रीम कोर्ट से क्‍यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद 1993 के मुम्बई बम ब्लास्ट के मुजरिम याकूब मेमन ने 30 जुलाई को अपनी फांसी की सजा की तामील पर रोक लगवाने के आखिर प्रयास

अब याकूब मेमन ने...- India TV Hindi
अब याकूब मेमन ने राज्यपाल को दी दया याचिका

नागपुर: सुप्रीम कोर्ट से क्‍यूरेटिव पिटिशन खारिज होने के बाद 1993 के मुम्बई बम ब्लास्ट के मुजरिम याकूब मेमन ने 30 जुलाई को अपनी फांसी की सजा की तामील पर रोक लगवाने के आखिर प्रयास के तहत मंगलवार शाम महाराष्ट्र के राज्यपाल के समक्ष दया याचिका पेश की।

याकूब के वकील अनिल गेदाम ने कहा कि, इस मामले में मृत्युदंड पाने वाले एकमात्र मुजरिम मेमन ने यहां केंद्रीय जेल में अधिकारियों को अपनी दया याचिका सौंपी। याकूब फिलहाल इसी जेल में है। गेदाम ने जेल में मेमन से भेंट की जिसके बाद यह दया याचिका अधिकारियों को सौंपी गयी। गेदाम सोमवार दोपहर भी अपने मुवक्किल से मिले थे। उस दौरान गेदाम के साथ मेमन का चचेरा भाई उस्मान भी था।

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मेमन के दिल्ली के वकील शुबाल फारूक भी मंगलवार को उससे मिले। जब दूसरी दया याचिका के बारे में गेदाम से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पहली क्षमा याचिका उसके भाई सुलेमान मेमन ने दायर की थी जबकि यह खुद याकूब द्वारा दायर उसकी पहली याचिका है। जब इस संबंध में जेल अधीक्षक योगेश देसाई से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ कहने से इनकार कर दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एल. दत्तू की अगुवाई में तीन न्यायाधीशों की एक पीठ ने मेमन की सुधारात्मक याचिका खारिज कर दी थी। पीठ ने कहा कि उसने जो आधार दिया है वह वर्ष 2002 में शीर्ष अदालत द्वारा तय सिद्धांतों के दायरे में नहीं आता।

मार्च, 1993 में मुम्बई में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में 257 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। याकूब मेमन एकमात्र ऐसा मुजरिम है जिनकी मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बनाए रखा। राष्ट्रपति ने मई, 2014 में उसकी क्षमा याचिका खारिज कर दी थी।

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