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बेंगलुरु भगदड़: KSCA ने हाई कोर्ट में की अपील, कहा- 'गिरफ्तारी पर रोक लगाएं', कोर्ट ने दे दिया बड़ा आदेश

 Published : Jun 06, 2025 07:02 pm IST,  Updated : Jun 06, 2025 11:48 pm IST

बेंगलुरु भगदड़ मामले में KSCA ने हाई कोर्ट में अपील की है और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ताओं की अपील पर कोर्ट ने अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

Bengaluru stampede case karnataka high court- India TV Hindi
बेंगलुरु भगदड़ मामले में हाई कोर्ट का अहम निर्देश। Image Source : PTI

बेंगलुरु में बुधवार को मची भगदड़ और 11 लोगों की मौत के बाद कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है। पुलिस ने RCB फ्रेंचाइजी, कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) और डीएनए एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और इनके प्रतिनिधियों की गिरफ्तारी शुरू कर दी है। हालांकि, इस गिरफ्तारी की कार्रवाई के खिलाफ KSCA ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जहां से उसे बड़ी राहत मिली है। KSCA ने गिरफ्तारी की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और जांच के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।

कोर्ट ने क्या सवाल पूछे?

याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में अब तक कितनी FIR हुई हैं। इस पर राज्य सरकार के महाधिवक्ता किरण शेट्टी ने कोर्ट को जानकारी दी कि एक जांच CID कर रही है। उन्होंने कोर्ट को ये भी बताया कि इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच भी जारी है और जांच के लिए रिटायर्ड जज माइकल कुन्हा को भी नियुक्त किया गया है। इस पर कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच और माइकल कुन्हा की जांच में गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है। CID की ओर से की जा रही जांच में गिरफ्तारी की जा सकती है।

FIR अवैध, एक हफ्ते तक कार्रवाई न हो- KSCA

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ की ओर से दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में FIR और कानूनी कार्रवाई को अवैध और मनमाना बताया है। याचिकाकर्ताओं ने एक हफ्ते तक उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा है कि वह जांच में हर मदद करने को तैयार हैं। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि उन्हें गिरफ्तार करने से उनके संवैधानिक अधिकार प्रभावित होंगे। वहीं, महाधिवक्ता ने कोर्ट से अपील की है कि 11 लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल भी हुए हैं। इसलिए जांच को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने दिया जाए। 

कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक हफ्ते तक कोई भी कड़ा एक्शन न लिया जाए। हालांकि, कोर्ट ने ये शर्त भी लगाई है कि उन्हें जांच और पूछताछ में सहयोग करना होगा। कोर्ट ने इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख तय की है।

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