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Gyanvapi-Carbon & OSL dating:क्या कार्बन डेटिंग से पता चल जाएगी ज्ञानवापी के शिवलिंग की उम्र!...जानें वैज्ञानिकों की राय

 Published : Oct 07, 2022 05:01 pm IST,  Updated : Oct 08, 2022 06:11 am IST

Gyanvapi Controversy:वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में मिला शिवलिंग क्या वाकई शिविलंग है या फिर तथाकथित फव्वारा?...अगर यह शिवलिंग है तो इसकी उम्र कितने सौ साल पहले की गई है। शिविलंग की वास्तविक उम्र क्या है?...इसका पता लगाने की मांग वाली याचिका में कार्बन डेटिंग कराए जाने की मांग की गई है।

Gyanvapi Controversy- India TV Hindi
Gyanvapi Controversy Image Source : INDIA TV

Highlights

  • ज्ञानवापी मस्जिद के शिवलिंग की उम्र बताएगी ओएसएल डेटिंग
  • कार्बन डेटिंग से सिर्फ सजीव वस्तुओं की उम्र का निर्धारण ही संभव
  • डॉ. बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक ने बताया सही तरीका

Gyanvapi Controversy:वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में मिला शिवलिंग क्या वाकई शिविलंग है या फिर तथाकथित फव्वारा?...अगर यह शिवलिंग है तो इसकी उम्र कितने सौ साल पहले की गई है। शिविलंग की वास्तविक उम्र क्या है?...इसका पता लगाने की मांग वाली याचिका में कार्बन डेटिंग कराए जाने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई कर रहा है। यह याचिका हिंदू पक्ष की ओर से दायर की गई है। मगर मुस्लिम पक्ष शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराए जाने का विरोध कर रहा है। हालांकि यहां सवाल यह है कि क्या कार्बन डेटिंग से क्या वाकई शिवलिंग की उम्र का पता लगाया जा सकता है?

Carbon dating
Image Source : INDIA TVCarbon dating

डॉ. बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान (बीएसआइपी), लखनऊ के वैज्ञानिकों के अनुसार कार्बन डेटिंग से सिर्फ उन्हीं की उम्र का पता लगाया जा सकता है, जो कभी भूतकाल में जीवित रहे हों। मसलन, इंसानों, जीवों, पेड़-पौधों, कीटों इत्यादि के उम्र का पता कार्बन डेटिंग से लगाया जा सकता। यानि कार्बन डेटिंग से सिर्फ सजीव वस्तुओं की उम्र का ही पताया लगाया जा सकता है, भले ही वह वर्तमान में निर्जीव हो चुके हों। मगर जो हमेशा निर्जीव हो, उसकी उम्र का पता नहीं लगाया जा सकता। जैसे पत्थर, कोयला, कांच इत्यादि। आइए अब आपको बताते हैं कि कार्बन डेटिंग है क्या?

OSL Dating
Image Source : INDIA TVOSL Dating

कैसे की जाती है कार्बन डेटिंग

कार्बन एक विशेष प्रकार का समस्थानिक (आइसोटोप) होता है। इसका उपयोग ऐसे कार्बनिक पदार्थों की उम्र का पता लगाने में किया जाता है, जो भूतकाल में कभी जीवित यानि सजीव थे। क्योंकि सभी सजीवों में किसी ने किसी रूप में कार्बन मौजूद होता है। ऐसे कार्बनिक पदार्थों या जीवों की मौत के बाद उनके शरीर में मौजूद कार्बन 12 या कार्बन-14 के अनुपात अथवा अवशेष बदलना शुरू हो जाते हैं। कार्बन-14 रेडियोधर्मी पदार्थ है, जो धीरे-धीरे समय बीतने के साथ सजीव शरीर में कम होने लगता है। इसे कार्बन समस्थानिक आइसोटोप सी-14 कहा जाता है। इसके जरिये कार्बनिक पदार्थों वाले सजीवों की मृत्यु का समय बताया जा सकता है। इससे उसकी अनुमानित उम्र का पता चल जाता है। इसे कार्बन डेटिंग कहते हैं। इसके जरिये 40 हजार से 50 हजार वर्ष तक पुरानी आयु वाले जीवों का पता लगाया जा सकता है। क्योंकि इसके बाद कार्बन का भी पूर्ण क्षरण हो जाता है। मगर निर्जीवों में कार्बन नहीं होने से उनकी कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती।

Dr. Neeraj Rai, Sr. Scientist BSIP, LKO
Image Source : INDIA TVDr. Neeraj Rai, Sr. Scientist BSIP, LKO

कार्बन डेटिंग से क्या शिवलिंग की उम्र का पता चलेगा?
बीएसआइपी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय के अनुसार कार्बन डेटिंग से सिर्फ कार्बनिक पदार्थों की मौजूदगी वाले सजीवों की उम्र का ही पता लगाया जा सकता है। शिवलिंग निर्जीव (पत्थर का बना) पदार्थ है। इसलिए इसकी कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती। मगर शिवलिंग की स्थापना करते वक्त, उसके नीचे जो फूल, चावल, दूध इत्याधि चढ़ाया गया होगा, वहां से मिट्टी का नमूना लेकर कार्बन डेटिंग की जा सकती है। इससे शिवलिंग की भी अनुमानित उम्र का पता लगाया जा सकता है।

OSLडेटिंग से पता चल सकती है शिवलिंग की वास्तविक उम्र
बीएसआइपी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीरज राय कहते हैं कि शिवलिंग की कार्बन डेटिंग नहीं हो सकती। क्योंकि यह निर्जीव वस्तु है। मगर इसकी OSLडेटिंग हो सकती है। यानि ऑप्टिकल स्टीमुलेटिंग ल्यूमिनेसेंस (OSL) से शिवलिंग की उम्र का पता लगाया जा सकता है। इसके जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि शिवलिंग के लिए इस्तेमाल किया गया पत्थर, कब और कहां से लाया गया। इस पत्थर की उम्र क्या है और इसकी स्थापना कब की गई।

ऐसे करते हैं OSLडेटिंग
इसमें जो कोई भी पत्थर एक्सपोज हुआ है लाइट से तो प्रकाश की किरणें उसमें पेनिट्रेट कराई जाती हैं। उसमें जब अंदर ड्रिल किया जाता है तो जिस पत्थर से काटकर लाया गया, उसकी उम्र का पता चल जाएगा। इसके साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि यह शिवलिंग कितना पुराना है। मगर इसके लिए शिवलिंग के अंदर ड्रिल करना पड़ेगा। ऐसे में शिवलिंग को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए इसका दूसरा तरीका है कि यदि वह शिवलिंग है तो उस पर कभी न कभी दूध या जल जरूर चढ़ाया गया होगा। ऐसे में शिवलिंग के एक टुकड़े का छोटा सा नमूना लेकर यह पता लगा सकते हैं कि दूध या जल कब पहली बार चढ़ाया गया था। इससे भी ज्ञानवापी के शिवलिंग की उम्र का पता लगाया जा सकता है।

Age of Shivling
Image Source : INDIA TVAge of Shivling

ऑप्टिकल डेटिंग समय की एक माप प्रदान करती है। क्योंकि किसी भी निर्जीव वस्तु के अंदर का कुछ भाग रोशनी या गर्मी से सुरक्षित रह जाता है। वही ल्यूमिनेसेंस सिग्नल को प्रभावी ढंग से रीसेट करता है। इससे संबंधित वस्तु की उम्र पता चल जाती है।

1950 के दशक में विकसित हुई OSLडेटिंग की तकनीकि
वैज्ञानिकों के अनुसार थर्मोल्यूमिनेसेंस के रूप में OSLडेटिंग की यह तकनीक मूल रूप से 1950 और 1960 के दशक में विकसित की गई। 1970 के दशक में आगामी शोध में यह बात सामने आई कि समुद्री और अन्य तलछट जो घंटों से लेकर दिनों तक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में थे, थर्मोल्यूमिनेशन डेटिंग से उनकी उम्र का पता लग सकता है। पिछले 15 वर्षों में एकल विभाज्य और अनाज विश्लेषण के आगमन के साथ ल्यूमिनेसेंस डेटिंग में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसे नीले / हरे डायोड के साथ संबद्ध प्रोटोकॉल के साथ करते हैं जो प्रयोगशाला प्रेरित संवेदनशीलता परिवर्तनों के लिए प्रभावी रूप से क्षतिपूर्ति कर सकते हैं। यह सटीक उम्र प्रस्तुत करते हैं।

Carbon Dating
Image Source : INDIA TVCarbon Dating

OSLडेटिंग से अनाज और पत्थर की उम्र का लग सकता है पता
OSLडेटिंग या थर्मोल्यूमिनेसेंस डेटिंग से अनाज, पत्थर, बालू, मिट्टी के बर्तन इत्यादि की उम्र का भी पता लगाया जा सकता है। इस नई तकनीकि से सभी निर्जीव वस्तुओं की उम्र का पता लगाना आसान हो गया है। पुरातत्व को खुदाई में मिलने वाले बर्तनों इत्यादि की उम्र का पता भी ओएसएल डेटिंग के जरिये ही लगाया जा रहा है। इससे समुद्री चट्टानों और उसके अंदर दबे अन्य निर्जीव वस्तुओं की उम्र का भी पता लगाया जा सकता है।

 

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