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न्यायिक अधिकारी का केस नहीं सुन रहा कोई, 4 जज ने मामले से खुद को अलग किया, CJI सूर्यकांत भड़के, वकीलों को भी सुनाया

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 18, 2026 09:55 am IST,  Updated : Jun 18, 2026 09:55 am IST

सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया है कि मामले की सुनवाई के लिए एक बेंच बनाई जाएगी। इसके बाद भी किसी वकील या याचिकाकर्ता ने किसी जज को मामले से अलग करवाने की चाल चली तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।

CJI Suryakant- India TV Hindi
सीजेआई सूर्यकांत Image Source : PTI

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक ही केस से 4 जजों ने खुद को अलग कर लिया। इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त नाराजगी जताई और वकीलों को भी खूब फटकार लगाई। न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन की 2022 में दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के 4 जज रिक्यूज (अलग) हो चुके हैं, जिनमें तत्कालीन चीफ जस्टिस शील नागू भी शामिल हैं। यह मामला न्यायिक अधिकारी अमरीश कुमार जैन को नौकरी से हटाए जाने से जुड़ा है।

केस से ये जज हुए अलग

जस्टिस लिसा गिल (2 सितंबर 2024), जस्टिस अश्वनी मिश्रा (25 मार्च 2025), जस्टिस दीपक सिबल (14 मई) और एक और जज इस मामले से खुद को अलग कर चुके हैं। इससे पहले आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामले से भी 16 जज अलग हो चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

याचिकाकर्ता अमरीश कुमार ने आर्टिकल 142 के तहत केस को दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग की। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सख्त निर्देश दिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट 2 जजों की डिवीजन बेंच गठित करें। यह बेंच 13 जुलाई से रोजाना सुनवाई शुरू करें और फैसला सुरक्षित होने तक सुनवाई जारी रखे। जज किसी भी स्थिति में खुद को मामले से अलग न करें। सीजेआई ने कहा कि कुछ "तथाकथित वरिष्ठ वकील" हाईकोर्ट में हंगामा मचा रहे हैं। अगर कोई जजों को अलग होने के लिए मजबूर करेगा तो गंभीर परिणाम होंगे।

संजीव चतुर्वेदी के केस से भी कई अलग हुए

आईएफएस के वरिष्ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने अवमानना याचिका दायक की थी। इस मामले पर सुनवाई के लिए कई बार अलग-अलग जज नियुक्त हुए, लेकिन सभी ने फैसला सुनाए बिना ही केस छोड़ दिया था। कुल 16 जज ने यह केस छोड़ा। इससे पहले अतीक अहमद के केस पर सुनवाई करने से 10 जज ने इंकार कर दिया था। अब अमरीश कुमार का मामला भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। आठ अक्टूबर 2025 को न्यायमूर्ति वर्मा ने चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए अपने संक्षिप्त आदेश में बिना कोई कारण बताए कहा था, ‘‘इसे किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए ।’’ न्यायमूर्ति वर्मा, चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई से खुद को अलग करने वाले 16 वें न्यायाधीश थे। इससे पहले, 15 अन्य न्यायाधीश चतुर्वेदी के विभिन्न मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके थे।

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