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ईडी ने कुर्क की 300 करोड़ रुपये की जमीन, भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी जुड़ा है मामला

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jul 19, 2024 09:13 pm IST,  Updated : Jul 19, 2024 09:13 pm IST

इस मामले का तार कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी जुड़ा है। भूखंड को कुर्क करने के लिए संघीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अनंतिम आदेश जारी किया था।

Bhupindr singh hooda- India TV Hindi
भूपेंद्र सिंह हुड्डा Image Source : PTI

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने कथित भूमि धोखाधड़ी मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत गुरुग्राम में रियल एस्टेट समूह एम3एम का 300 करोड़ रुपये से अधिक कीमत का भूखंड कुर्क किया है। इस मामले का तार कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी जुड़ा है। भूखंड को कुर्क करने के लिए संघीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक अनंतिम आदेश जारी किया था। 

एक बयान में कहा गया कि 88.29 एकड़ भूमि हरियाणा के गुरुग्राम जिले में हरसरू तहसील के बशारिया गांव में स्थित है। ईडी ने एक बयान में कहा कि इस भूखंड की कीमत 300.11 करोड़ रुपये है। वहीं, रियल एस्टेट समूह के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि वे ‘‘ईडी द्वारा भूखंड को अस्थायी रूप से कुर्क करने के लिए की गई बेहद अनुचित, अन्यायपूर्ण और अनावश्यक कार्रवाई से बेहद निराश हैं। यह भूखंड किसी भी तरह से किसी अपराध से जुड़ा नहीं है और किसी भी परिस्थिति में पीएमएलए के तहत अपराध की आय के दायरे में नहीं आ सकता है।’’ 

सीबीआई की एफआईआर पर शुरू हुई जांच

धन शोधन का यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी पर आधारित है, जो हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता हुड्डा, नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय (डीटीसीपी) के पूर्व निदेशक त्रिलोक चंद गुप्ता, रियल्टी समूह आर एस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (आरएसआईपीएल) और 14 अन्य कंपनियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। ईडी ने कहा कि आरोप है कि आरोपियों ने जमीन मालिकों हरियाणा राज्य और तत्कालीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) समेत अन्य को धोखा दिया गया। ईडी ने कहा कि आरोपियों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 4 और उसके बाद संबंधित भूस्वामियों की भूमि अधिग्रहण करने के लिए धारा 6 के तहत अधिसूचना जारी करवाकर उनके साथ धोखाधड़ी की। 

कम कीमत पर जमीन बेंचने के लिए मजबूर किया

एजेंसी ने कहा कि इससे उन्हें अपनी जमीन को मौजूदा कीमत से कम कीमत पर रियल एस्टेट कंपनियों को बेचने के लिए ‘‘मजबूर’’ होना पड़ा। एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने ‘‘धोखाधड़ी और बेईमानी से’’ अधिसूचित भूमि पर आशय पत्र (एलओआई) या लाइसेंस प्राप्त कर लिए, जिससे भूस्वामियों और हरियाणा राज्य को नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने स्वयं गलत लाभ अर्जित किया। एम3एम ने कहा कि संबंधित भूखंड के लिए उसने भारी निवेश किया है जहां आवासीय या वाणिज्यिक परियोजना स्थापित किए जाने की संभावना है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इस परियोजना की क्षमता को भी नजरअंदाज कर दिया गया है जो हजारों परिवारों के लिए रोजगार पैदा करेगी। इसलिए, संपत्ति को जब्त करने की ईडी की कार्रवाई न तो कानूनन उचित है और न ही न्याय और समानता के नजरिए से उचित है।’’ (इनपुट- पीटीआई भाषा)

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