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ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का दिल्ली कूच आज, शंभू बॉर्डर पर जबरदस्त बैरिकेडिंग, JCB और क्रेन भी तैनात

 Reported By: Puneet Pareenja Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jul 21, 2026 08:14 am IST,  Updated : Jul 21, 2026 12:56 pm IST

भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में किसान संगठनों ने आज दिल्ली कूच का आह्वान किया। शंभू बॉर्डर पर भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग, JCB और क्रेन तैनात हैं। किसानों का कहना है कि समझौते से कृषि, डेयरी और छोटे कारोबार प्रभावित होंगे।

Farmers Protest Delhi, India US Trade Deal, Shambhu Border- India TV Hindi
किसानों ने बीते 10 जुलाई को चंडीगढ़ में भी रैली निकाली थी। Image Source : PTI

Highlights

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली के किसान घाट पर प्रदर्शन।
  • शंभू बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग, सुरक्षा बलों, जेसीबी और क्रेन की तैनाती की गई।
  • किसान नेताओं ने कहा, प्रस्तावित समझौते से खेती, डेयरी और छोटे कारोबार प्रभावित होंगे।

चंडीगढ़/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील यानी कि व्यापार समझौते के विरोध में सोमवार को विभिन्न किसान संगठनों ने दिल्ली कूच की तैयारी की है। किसानों के मार्च को देखते हुए हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि किसानों के काफिलों को नियंत्रित किया जा सके। बता दें कि किसानों ने आज दिल्ली के किसान घाट पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। इसे देखते हुए घग्गर पुल पर भी बड़े स्तर पर बैरिकेडिंग की गई है। वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर भी दिल्ली आने-जाने वाली लेन पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा है।

हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है प्रशासन

प्रशासन ने दिल्ली की ओर बढ़ने वाले किसान जत्थों को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की है। इसके अलावा JCB और क्रेन जैसी भारी मशीनों को भी मौके पर लगाया गया है। हालांकि, फिलहाल नेशनल हाईवे-44 को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन पूरे हालात पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। इस बीच हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी शम्भू बॉर्डर पहुंचे हुए थे। वहीं, किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर ने बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के किसान दिल्ली पहुंचकर इस रैली में हिस्सा लेंगे। यह प्रदर्शन 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है। 

क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?

  1. भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) रद्द हो: प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को तुरंत पूरी तरह रद्द किया जाए।
  2. सस्ते कृषि और डेयरी आयात पर रोक: अमेरिका समेत अन्य देशों से सस्ते कृषि और डेयरी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भारतीय किसानों को नुकसान न हो।
  3. एमएसपी की कानूनी गारंटी: सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा दिया जाए और सरकार खरीद की गारंटी दे।
  4. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हों: आयोग की C2+50% लागत फॉर्मूले के आधार पर फसलों का समर्थन मूल्य तय किया जाए।
  5. घरेलू डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा: भारतीय डेयरी और दुग्ध उत्पादक किसानों को विदेशी कंपनियों और सस्ते आयात से संरक्षण दिया जाए।
  6. ई-कॉमर्स और डिजिटल ट्रेड पर नियंत्रण: कृषि क्षेत्र में बड़ी विदेशी ई-कॉमर्स और डिजिटल कंपनियों के बढ़ते प्रभाव पर रोक लगाने के लिए नीति बनाई जाए।
  7. किसानों का कर्ज माफ हो: छोटे और सीमांत किसानों के खेती से जुड़े पुराने कर्ज पूरी तरह माफ किए जाएं।
  8. कृषि सब्सिडी मजबूत की जाए: डीजल, बिजली, बीज और खाद पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी को कम करने के बजाय और बढ़ाया जाए।
  9. फसल बीमा योजना में सुधार: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अधिक प्रभावी बनाया जाए और नुकसान होने पर किसानों को सीधे, पारदर्शी और समय पर मुआवजा मिले।
  10. किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हों: पिछले किसान आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज सभी पुलिस मुकदमे बिना शर्त वापस लिए जाएं।

बसों और निजी गाड़ियों में शंभू बॉर्डर पहुंचे किसान

शंभू बॉर्डर पर किसान करीब 100 बसों और निजी वाहनों से पहुंचे हैं। किसानों की संख्या लगभग 1,000 से 1,500 के बीच बताई जा रही है। ये किसान अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, ब्यास, लुधियाना और कपूरथला समेत पंजाब के अलग-अलग इलाकों से आए हैं। इनमें ज्यादातर किसान पंजाब के माझा क्षेत्र के हैं, जिनमें अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और बटाला क्षेत्र के किसानों की संख्या अधिक है। इस बार किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से नहीं आए हैं। किसानों का कहना है कि वे दिल्ली में होने वाली महापंचायत में शामिल होने के लिए जा रहे हैं, इसलिए उन्होंने बसों और निजी वाहनों का सहारा लिया है।

किसान नेता ने जताई नुकसान की आशंका

सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत यदि सस्ते कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति दी जाती है, तो इसका सीधा नुकसान किसानों, खेतिहर मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को होगा। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता केवल कुछ कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर खेती, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार यानी कि IPR और सेवा क्षेत्र तक पड़ सकता है।

कई संगठनों ने किया ट्रेड डील का विरोध

पंजाब के कई किसान संगठनों ने भी भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते का विरोध किया है। किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से इस समझौते को रद्द करने और किसानों तथा आम लोगों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

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