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भारत के इन हथियारों से बीजिंग तक मचा है हाहाकार, यहां देखें पूरी लिस्ट

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Avinash Rai
 Published : Jul 15, 2025 02:12 pm IST,  Updated : Jul 15, 2025 02:21 pm IST

भारतीय सेना और भारतीय सेना के हथियारों ने ऑपरेशन सिंदूर में कमाल कर दिया। लेकिन सवाल ये है कि क्या दो फ्रंट्स पर लड़ाई लड़ने के लिए भारत तैयार है? क्या भारत के हथियार हमेशा तैयार हैं?

How has Indias war arsenal caused a stir all the way to Beijing Indias indigenous weapons are ready - India TV Hindi
भारत के इन हथियारों से बीजिंग तक मचा है हाहाकार Image Source : PTI

भारत ने 2 महीने पहले ही 3-3 देशों से लड़ाई लड़ी थी, जिसमें सेना पाकिस्तान की थी, दिमाग चीन का था और पाकिस्तान को युद्ध के हथियार चीन के साथ-साथ तुर्किए ने दिए थे। भारत ने स्वदेशी हथियारों से इस लड़ाई को जीत लिया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या हो अगर भारत को एक साथ 2-2 फ्रंट पर लड़ना पड़े? अगर एयरफोर्स के साथ सेना को भी जंग में कूदना पड़ा तो क्या होगा? युद्ध का कोई पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता। दुश्मन किस तरह की चालाकियां कर रहा है, उसमें युद्ध किसी भी वक्त शुरू हो सकता है। हमारी तैयारी कितनी है? युद्ध का कितना सामान तैयार है? ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमारे हथियारों की क्षमता कितनी बढ़ी है? चलिए बताते हैं भारतीय सेना के स्वदेशी हथियार कितने तैयार हैं और उनकी खासियत क्या है।

माउंटेड गन सिस्टम

भारत की इस नई 155 mm 52 कैलिबर की तोप को कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है और गोला दागने के बाद इस व्हीकल माउंटेड गन की लोकेशन को सिर्फ़ 85 सेकेंड में चेंज किया जा सकता है। यानी जब तक दुश्मन इसकी थाह लेगा, ये अपनी जगह से दूसरी जगह जाकर वहां से गोला दागना शुरू कर चुका होगा।

एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन (ATAG)

छिपकर बैठे दुश्मन पर सटीक और ताबड़तोड़ वार करना हो तो भारत की ये एडवांस्ड टोड (Towed) आर्टिलरी गन तैयार है। इसकी रेंज भी 45 से 48 किलोमीटर तक है और ये एक मिनट में 6 गोले दाग सकता है। यानी सिर्फ 10 सेकेंड में एक गोला।

आकाश नेक्स्ट जनरेशन एयर डिफेंस सिस्टम

आकाश एयर डिफेंस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में भी अपनी भूमिका निभाई थी। दुश्मन की मिसाइल 120 दूर हो तो भी आकाश नेक्स्ट जनरेशन एयर डिफेंस सिस्टम उस टारगेट को लॉक कर उसे नष्ट कर सकता है।

कार्बाइन

कार्बाइन 60 सेकेंड में 600 राउंड गोली फायर कर सकती है, जिसकी रेंज 200 मीटर होती है। ये इंडिया की नई हाई-टेक असॉल्ट राइफल है जो कुछ ही दिनों में भारतीय सेना को मिलने वाली है। बता दें कि इन कार्बाइनों को डीआरडीओ ने ही बनाया है। सेना ने ऐसे 4 लाख 24 हजार CQB कार्बाइन का ऑर्डर दिया है। ये शॉर्ट रेंज की असॉल्ट राइफल है। इसकी रेंज 200 मीटर ही है, लेकिन 60 सेकेंड के अंदर 600 राउंड फायर करने वाला ऐसा कोई दूसरा हथियार भारतीय सेना के पास नहीं है।

माउंटेड गन सिस्टम

युद्ध के मैदान में कन्वेंशनल हॉवित्जर तोप को रण-भूमि में ले जाना एक बड़ा चैलेंज होता है, इसलिए DRDO ने ये व्हीकल माउंडेट गन सिस्टम तैयार किया है। DRDO ने इसका ट्रायल करके देख लिया है, तभी इसे पब्लिक को दिखाने के लिए रखा गया है। 8 चक्कों वाली गाड़ी पर लगी इस तोप को DRDO के व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट यानी VRDE ने डेवलप किया है।

इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल

इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल जिसे WHAP के नाम से भी जाना जाता है। इस गाड़ी में 6 से 12 जवानों को युद्धक्षेत्र तक ले जाया जा सकता है। ये WHAP पुरानी बख्तरबंद गाड़ियों से अलग हैं। ये गा़ड़ी सड़क पर भी चल सकती है, कीचड़ और कच्चे रास्तों पर भी चल सकती है। ये पानी में भी तैर सकती है और नदी में उतरकर नाव की तरह नदी को भी पार कर सकती है। माइनस 50 डिग्री सेल्सियस से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक में इसका टेस्ट किया गया है। इसके ऊपर एंट्री ड्रोन सिस्टम फिट किया जा सकता है और ये केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोएक्टिव रेडिएशन को भी डिटेक्ट करने में सक्षम है।

आकाश मिसाइल और आकाशतीर

ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल और आकाशतीर की ताकत को दुनिया ने देख लिया है। हवा में ही मिसाइलों को मार गिराने की स्वदेशी क्षमता बेहद काल की है। आकाश और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम हैं। वर्तमान में आकाश का नेक्स्ट जनरेशन भी तैयार हो गया है। आकाश नेक्स्ट जेनरेशन 120 किलोमीटर दूर से टारगेट लॉक करना शुरू करता है और थ्रेट के 30 किलोमीटर के दायरे में आते ही मिसाइल लॉन्च हो जाती है। अगर टारगेट मिस हो जाए तो दूसरी मिसाइल लॉन्च होती है। टारगेट 3 किलोमीटर तक करीब आ जाए तो भी आकाश NG उसे गिरा सकता है। ऐसा मिसाइल डिफेंस सिस्टम किसी और देश के पास नहीं है।

पिनाका

भारतीय एयर डिफेंस के बाद पाकिस्तान सबसे ज्यादा पिनाका से घबराता है। ये भारत का स्वदेशी हथियार है। भारत ने इसे आर्मेनिया को भी दिया है और अब इसे पहले से भी घातक, पहले से भी मारक बनाया गया है। इसमें गाइडेड म्यूनीशन लगाया गया है, मतलब ये कि जब ये टारगेट लॉक कर लेता है उस दायरे में कुछ भी सलामत नहीं छोड़ता। ये सीधा जाकर वहीं हमला करता है। बता दें कि पिनाका के 3 वैरिएंट्स हैं। इसमें पहला है पिनाका मार्क 1 जो कि अनगाइडेड रॉकेट यूज होता है, जिसकी रेंज 37.5 किमी है। इसका दूसरा वेरिएंट है एनहांस्ड पिनाका, जिसकी रेंज 50 किमी है और तीसरा है गाइडेड पिनाका। इसमें गाइडेड रॉकेट यूज होता है, जिसकी रेंज 75 किमी है। सबसे खास बात ये है कि पिनाका रॉकेट सिस्टम के 12 रॉकेट सिर्फ 48 सेकेंड में लॉन्च किए जा सकते हैं। बता दें कि अगर दुश्मन के लोकेशन की जानकारी हो जाए तो उसे पूरी तरह मिट्टी में मिला देने वाले हथियार का नाम है पिनाका। शिव के धनुष के नाम पर बनाया गया ये मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिर्फ 48 सेकेंड में 12 रॉकेट फायर कर सकता है और पूरे एक स्क्वायर किलोमीटर एरिया को कब्रगाह में तब्दील कर सकता है।

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