बिहार के बाद 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य वोटरों को लिस्ट में शामिल करना और अयोग्य वोटरों को मतदाता सूची से बाहर करना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि देश में आखिरी बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 21 साल पहले हुआ था। ऐसे में मतदाता सूची का शुद्धीकरण जरूरी है। चुनाव आयुक्त ने बताया कि बीएलओ तीन बार हर घर में जाएंगे। इस दौरान मतदाताओं से मिलेंगे और लिस्ट में उनके नाम की पुष्टि करेंगे, उन्हें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का फॉर्म देंगे। जो लोग घर से बाहर रहते हैं या दिन में ऑफिस जाते हैं। ये लोग ऑनलाइन अपना नाम जुड़वा सकेंगे।
नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए मतदाताओं को पहले चरण में कोई डॉक्यूमेंट नहीं देना होगा। उन्हें सिर्फ यह बताना होगा कि 2003 में की मतदाता सूची में उनका नाम था या नहीं और यदि उनका नाम नहीं था को उनके माता-पिता का नाम था। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सभी राज्यों की 2003 की मतदाता सूची देखी जा सकती है।

पोलिंग बूथ की संख्या भी बदलेगी
चुनाव आयुक्त ने साफ किया कि अब किसी भी बूथ पर 1000 से ज्यादा मतदाता नहीं हो सकते। ऐसे में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद पोलिंग बूथ की संख्या भी बदलेगी। ताकि, कहीं भी मतदाताओं की भीड़ न लगे। जिन 12 राज्यों में SIR होना है। वहां, कुल 51 करोड़ मतदाता हैं।
असम में SIR के लिए अलग ऐलान होगा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "भारत के नागरिकता अधिनियम में असम के लिए अलग प्रावधान हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में वहां नागरिकता की जांच पूरी होने वाली है। 24वां एसआईआर आदेश पूरे देश के लिए था। ऐसे में यह असम पर लागू नहीं होता। इसलिए असम के लिए संशोधन के अलग आदेश जारी किए जाएंगे।"
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | मतदाता (लाख में) |
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अंडमान और निकोबार
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3.10
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छत्तीसगढ़
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212.30
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गोवा
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11.85
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गुजरात
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508.39
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केरल
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278.50
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लक्षद्वीप
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0.58
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मध्य प्रदेश
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574.05
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पुदुचेरी
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10.21
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राजस्थान
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548.85
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तमिलनाडु
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641.15
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उत्तर प्रदेश
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1544.24
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पश्चिम बंगाल
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766.24
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कुल
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5099.46 (51 करोड़)
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SIR के दूसरे चरण की अहम तारीखें
28 अक्टूबरः स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दूसरे चरण की शुरुआत
4 नवंबरः बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म देंगे और 2003 की लिस्ट से लिंक कर नई मतदाता सूची तैयार करेंगे। यह प्रकिया 4 दिसंबर तक चलेगी।
9 दिसंबरः ड्रॉफ्ट वोटर रोल जारी होगा। जिनका नाम लिंक नहीं होगा, उनको नोटिस भेजा जाएगा और डॉक्यूमेंट दिखाने पर लिस्ट में नाम जोड़ा जाएगा। 8 जनवरी तक लोगों के पास अपील करने का मौका रहेगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया 31 जनवरी तक जारी रहेगी।
7 फरवरीः फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।
क्या है प्रक्रिया?
- SIR की प्रक्रिया तीन चरण में होगी। पहले चरण में मतदाताओं के नाम को 2003 की मतदाता सूची से लिंक किया जाएगा। इसमें मतदाताओं को सिर्फ यह बताना होगा कि 2003 की मतदाता सूची में उनका या उनके माता-पिता का नाम कहां था।
- जिन लोगों का नाम 2003 की मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाएगा। उनका नाम दूसरे चरण में जोड़ा जाएगा। इस चरण में चुनाव आयोग उन लोगों को नोटिस जारी करेगा, जिनके नाम लिंक नहीं हो पाए हैं। इस चरण में मतदाताओं को संबंधित डॉक्यूमेंट दिखाने होंगे। इस दौरान आधार कार्ड भी स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि 2003 के समय वह और उनके माता-पिता कहां थे। इसके बाद प्रोविजनल लिस्ट जारी होगी।
- प्रोविजनल लिस्ट जारी होने के साथ ही मतदाताओं के पास अपील करने का अधिकार होगा। इस दौरान वो लोग अपील कर सकेंगे, जिनका नाम दूसरे चरण में भी लिस्ट में नहीं जुड़ पाया है। इसके साथ ही वो लोग भी अपनी जानकारी में संशोधन करा सकेंगे, जिनके नाम या अन्य जानकारी में गड़बड़ी है।