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'नो कास्ट, नो रिलीजन', ऐसा करने के लिए पहले त्यागना होगा अपना धर्म, जानिए ऐसा क्यों बोला हाई कोर्ट?

 Published : Feb 24, 2026 01:43 pm IST,  Updated : Feb 24, 2026 01:54 pm IST

'नो कास्ट, नो रिलीजन' मामले पर डिवीजन बेंच ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि राजस्व अधिकारियों को ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक सरकारी आदेश निकाला जाए।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

तमिलनाडु की मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक धर्म को लेकर ऐसा फैसला सुनाया, जिस पर अब बहस छिड़ सकती है। कोर्ट ने कहा कि 'जाति नहीं, धर्म नहीं' प्रमाण पत्र चाहने वाले व्यक्ति को पहले औपचारिक रूप से अपना धर्म त्यागना होगा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह तर्क दिया था कि उसके माता-पिता हिंदू धर्म से संबंधित हैं, फिर भी वह अधिकारियों से एक ऐसा प्रमाण पत्र चाहता है जिसमें जाति या धर्म का उल्लेख न हो।

'नो कास्ट, नो रिलीजन' का मामला

इसी पर कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जो व्यक्ति 'नो कास्ट, नो रिलीजन' (No Caste, No Religion) प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहता है, उसे पहले औपचारिक रूप से अपना धर्म त्यागना होगा। 

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 25 का दिया हवाला

कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत विवेक की स्वतंत्रता में धर्म अपनाने के साथ-साथ धर्म त्यागने का अधिकार भी शामिल है, लेकिन प्रमाणपत्र जारी करने से पहले इस त्याग को स्पष्ट रूप से दर्ज करना आवश्यक है।

जब कोर्ट ने याचिकार्ता से पूछा ये सवाल

मामले की जांच करते समय कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसने अपना धर्म त्याग दिया है। याचिकाकर्ता ने इसका उत्तर नकारात्मक में दिया है। न्यायमूर्ति रामासामी ने टिप्पणी की कि जब तक याचिकाकर्ता हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपना धर्म नहीं त्याग देता, तब तक जाति और धर्म को छोड़कर प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध विचारणीय नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि धर्म त्याग का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।

इस आवेदन के साथ अधिकारी कर सकते हैं विचार

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने तहसीलदार के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया और रिट याचिका खारिज कर दी। साथ ही, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपने धर्म का त्याग करने और अधिकारियों के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। जज ने कहा कि यदि त्याग के प्रमाण के साथ नया आवेदन किया जाता है, तो अधिकारी उस पर विचार कर सकते हैं।

 

 

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