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जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति नहीं मिलने पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई नाराजगी, देशभर में अभियान जारी रखने का ऐलान

 Reported By: Shoaib Raza,  Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Sep 17, 2026 03:53 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 04:11 pm IST

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने UCC, मस्जिदों और मदरसों से जुड़े मुद्दों पर विरोध जताते हुए 'सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया' अभियान जारी रखने की बात कही है।

बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास- India TV Hindi
बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास Image Source : ANI

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरने की अनुमति नहीं मिलने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई है। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि आज जंतर-मंतर पर धरना प्रस्तावित था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले उन्हें पत्र भेजकर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

लोगों के बड़ी संख्या में आने की थी संभावना

कासिम रसूल इलियास के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने पत्र में कहा कि प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। इतनी बड़ी भीड़ को संभालना मुश्किल हो सकता है। इसी आधार पर धरने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इसे अपने अधिकारों का हनन बताया।

'सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया' अभियान

उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से चलाए जा रहे 'सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया' अभियान के तहत कई मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने की बात, मस्जिदों को तोड़े जाने और मदरसों को बंद किए जाने समेत अन्य मुद्दों पर आपत्ति जताई। हालांकि, इन दावों और आरोपों पर संबंधित सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई है।

अनुमति न मिलने के बावजूद जारी रहेगा अनुमान

बोर्ड के महासचिव अब्दुररहीम मुजद्दिदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद उनका अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि देशभर में यह मुहिम चलती रहेगी और आने वाले समय में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

इसके तहत उठाए जाएंगे कई मुद्दे

बोर्ड के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका 'सेव कॉन्स्टिट्यूशन, सेव इंडिया' अभियान आगे भी जारी रहेगा और इसके तहत विभिन्न मुद्दों को उठाया जाएगा।

क्यों हो रहा UCC का विरोध?

बता दें कि समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करने वाले संगठनों और कुछ धार्मिक समुदायों की मुख्य चिंता यह है कि समान कानून लागू करने के नाम पर उनके धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों तथा व्यक्तिगत कानूनों पर असर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि विवाह, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े कई नियम धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं। इसलिए किसी एक समान कानून को लागू करने से पहले अलग-अलग समुदायों की परंपराओं और अधिकारों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

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