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'हिंदू समाज विविधता का सम्मान करने वाला समाज', गुवाहाटी में बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

 Reported By: Yogendra Tiwari, Edited By: Niraj Kumar
 Published : Nov 19, 2025 10:34 pm IST,  Updated : Nov 19, 2025 10:34 pm IST

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि विविधता का सम्मान करने वाला समाज हिन्दू समाज ही है। जो लोग भारत से अलग हुए, उनकी विविधताएं समाप्त होती गईं, जैसे पाकिस्तान में पंजाबी और सिंधी समाज अब उर्दू अपनाने पर विवश हैं।

Mohan bhagwat- India TV Hindi
मोहन भागवत Image Source : मोहन भागवत

गुवाहाटी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत  ने असम और सम्पूर्ण पूर्वोत्तर के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जो लोग भारत से अलग हुए, उनकी विविधताएं समाप्त होती गईं, जैसे पाकिस्तान में पंजाबी और सिंधी समाज अब उर्दू अपनाने पर विवश हैं। उन्होंने कहा कि विविधता का सम्मान करने वाला समाज हिन्दू समाज ही है। आज गुवाहाटी के बरबाड़ी स्थित सुदर्शनालय में आयोजित युवा नेतृत्व सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए सौ से अधिक युवा प्रतिनिधियों के समक्ष उन्होंने संघ के सिद्धांतों, आदर्शों और कार्यपद्धति पर विस्तार से रखा और संगठन के बारे में चल रही बहसों पर भी प्रकाश डाला।

समाज में जागरूकता आवश्यक

मोहन भागवत ने कहा कि भ्रष्टाचार का अंत कानून से नहीं होगा, बल्कि चरित्र निर्माण से होगा। इसी प्रकार, गौ-संरक्षण केवल कानूनी प्रावधानों से संभव नहीं है; इसके लिए समाज में जागरूकता भी आवश्यक है।

'भारत प्रथम' के सिद्धांत पर चलना अनिवार्य

उन्होंने कहा कि'भारत प्रथम' के सिद्धांत पर चलना अनिवार्य है। भारत को किसी भी विदेशी देश के प्रति न तो पक्षपाती होना चाहिए और न ही विरोधी। अमेरिका और चीन अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर चलते हैं, और उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा भी इन्हीं हितों का परिणाम है,चाहे वे वैश्विक भाईचारे की कितनी ही बातें क्यों न करें। हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए – भारत की विदेश नीति पूर्णतः ‘प्रो-भारत’ होनी चाहिए, न कि अमेरिका या चीन के पक्ष या विपक्ष में। जब हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हैं, तो वैश्विक कल्याण अपने-आप सुनिश्चित होता है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होगा और भविष्य में विश्व में उत्पन्न विभिन्न संघर्षों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए एक अधिक सौहार्दपूर्ण वैश्विक व्यवस्था स्थापित कर सकेगा।

युवा संघ नजदीक से देखें और समझें

 डॉ. मोहन भागवत  ने असम और सम्पूर्ण पूर्वोत्तर के युवाओं से अपील की कि वे संघ के बारे में किसी प्रकार की पूर्वाग्रही धारणाओं या प्रायोजित प्रचार के आधार पर राय न बनाएं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को संघ को नज़दीक से देखना और समझना चाहिए।

समाज संगठित और गुणयुक्त होना चाहिए

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा कहती है, 'मेरा मार्ग सही है, लेकिन तुम्हारी परिस्थिति में तुम्हारा मार्ग भी सही हो सकता है।' उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग भारत से अलग हुए, उनकी विविधताएं समाप्त होती गईं, जैसे पाकिस्तान में पंजाबी और सिंधी समाज अब उर्दू अपनाने पर विवश है। उन्होंने कहा कि विविधता का सम्मान करने वाला समाज हिन्दू समाज ही है और ऐसा समाज निर्मित करना ही संघ का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “जब तक भारतीय समाज संगठित और गुणयुक्त नहीं होगा, देश की नियति नहीं बदलेगी”

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