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PM Modi govt 8 years: प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के मुकाबले क्या नरेंद्र मोदी ज्यादा लोकप्रिय हैं?

इस समय देश में एक ही पार्टी का दबदबा है और उसका नाम है भारतीय जनता पार्टी। बीजेपी की सफलता का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि 1984 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को केवल 2 सीटें मिलीं थीं, वहीं 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने अपने दम पर 303 सीटें हासिल कर लीं।

Rituraj Tripathi Written by: Rituraj Tripathi @rocksiddhartha7
Updated on: May 30, 2022 9:46 IST
Narendra Modi- India TV Hindi
Image Source : PTI Narendra Modi

Highlights

  • 1984 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को केवल 2 सीटें मिलीं थीं
  • 2019 के चुनाव में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 303 सीटें हासिल कीं
  • 2014 के चुनाव में भी बीजेपी ने 282 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था

PM Modi govt 8 years: केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) के 8 साल पूरे हो गए हैं। बीजेपी ने इस वर्षगांठ को खास तरीके से मनाने के लिए ‘सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण’ की थीम को चुना है। ये उत्सव 30 मई से 15 जून तक चलेगा।

बीजेपी में इस मौके पर एक अलग तरह का जोश और उत्साह देखा जा रहा है। बीजेपी कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में जाकर मोदी सरकार के सुशासन की बात जनता के बीच फैला रहे हैं। केंद्र के मंत्री भी इस मौके पर देशभर में दौरा करेंगे। 

इन तमाम बातों के बीच एक सवाल भी उभरकर सामने आ रहा है कि क्या पीएम मोदी (PM Modi) देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) और इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) से भी ज्यादा लोकप्रिय हैं?

देश में बीजेपी का दबदबा

इस समय देश में एक ही पार्टी का दबदबा है और उसका नाम है भारतीय जनता पार्टी। बीजेपी की सफलता का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि 1984 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को केवल 2 सीटें मिलीं थीं, वहीं 2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने अपने दम पर 303 सीटें हासिल कर लीं। इस चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन NDA ने 353 सीटें हासिल की थीं।

ये नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व का ही नतीजा था कि साल 2014 के चुनाव में भी बीजेपी ने 282 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था और एनडीए को 336 सीटें मिलीं थीं। 2014 से अब तक लगातार 2 बार पीएम रहते हुए नरेंद्र मोदी ने ये साबित कर दिया कि सही रणनीति के साथ अगर आगे बढ़ा जाए तो मुश्किल से मुश्किल काम को भी अंजाम दिया जा सकता है। 

आजादी के बाद सालों तक था कांग्रेस का वर्चस्व

1947 में जब देश अंग्रेजों से आजाद हुआ, तब कांग्रेस भी इसी तरह देश में छाई हुई थी, जिस तरह आज बीजेपी देश में छाई है। आजादी से लेकर साल 2014 तक हुए 16 आम चुनावों में से, कांग्रेस ने 6 में पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की है 4 में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया है। इस बात से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस पहले काफी मजबूत स्थिति में रही है लेकिन आज उसकी हालत खराब है। उसके पास ना ही मजबूत नेतृत्व है और ना ही ऐसी रणनीति, जिससे वह केंद्र की बीजेपी सरकार को सही ढंग से घेर सके।

भारत में कांग्रेस के 7 प्रधानमंत्री रहे हैं, जिसमें जवाहरलाल नेहरू (1947-64), लाल बहादुर शास्त्री (1964-66), इंदिरा गांधी (1966-77,1980-84) राजीव गांधी (1984-89) पी. वी. नरसिम्हा राव (1991-96) और मनमोहन सिंह (2004-2014) शामिल हैं। लेकिन आज के डिजिटल युग में इन नेताओं की चर्चा बहुत कम होती है। सूचना क्रांति के इस दौर में चारों तरफ मोदी सरकार और पीएम मोदी की चर्चा है, इसीलिए ये सवाल भी खड़ा हुआ है कि क्या मोदी, नेहरू और इंदिरा से भी ज्यादा लोकप्रिय हैं!

पीएम मोदी की कौन सी बात करती है प्रभावित

पीएम मोदी में ऐसी कई खूबियां हैं, जो उन्हें अपने समकालीन नेताओं और पूर्व के लोकप्रिय नेताओं से अलग बनाती हैं। सभी खूबियों का एक ही बार में वर्णन तो संभव नहीं है लेकिन यहां उनकी कुछ खूबियां बताई जा रही हैं।

पीएम मोदी एक बेहतरीन शो टॉपर हैं, या फिर यूं कहें कि इवेंट्स को कैसे सुपरहिट बनाना है, ये उन्हें आता है। इसमें  सबसे ज्यादा मदद उनकी भाषण और संवाद करने की कला कर देती है। वह चाहें देश में हों या विदेश में, वह हिंदी में तो बात करते ही हैं, साथही इतने सामान्य तरीके से बात रखते हैं, जिससे आम आदमी उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता है। 

पीएम मोदी भाषण के दौरान अपनी सरकार के काम गिनाना नहीं भूलते और खास बात ये भी है कि वह घुमा-फिराकर अपने विरोधियों पर बिना नाम लिए निशाना भी साध लेते हैं और जनता इस बात को समझ जाती है।

निजी अनुभव साझा करके आम आदमी को जोड़ने की कला

पीएम मोदी संवाद के दौरान अपने जीवन के निजी अनुभव साझा करते हैं, जिससे आम आदमी उनसे जुड़ता है। वह अपने संघर्ष के दिनों की बात करते हैं तो एक चाय बेचने वाला आदमी भी उनकी बात को सुनता और समझता है। वह कांग्रेस शासन की उस रीति को भी तोड़ते हैं, जहां पूर्व पीएम कम बोलने के लिए मशहूर थे और पीएम मोदी लंबे भाषण देने के लिए जाने जाते हैं।

विदेशी नेताओं के साथ गर्मजोशी से मिलना

पीएम ने अपने कार्यकाल के दौरान कई विदेशी दौरे किए हैं और जिस शैली में वह विदेशी नेताओं के साथ गर्मजोशी से मिलते हैं, वह वैश्विक मीडिया में उनकी छवि को मजबूत बनाता है। विदेशों में हुए कई तरह के सर्वे में पीएम मोदी ने दुनिया के ताकतवर नेताओं की लिस्ट में जगह बनाई है। 

हालही में अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ ने एक सर्वे किया था, जिसमें मोदी 77% की रेटिंग के साथ दुनिया की पहली पसंद थे। बता दें कि ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ नियमित रूप से वैश्विक नेताओं की रेटिंग को ट्रैक करता है। 

नेहरू और इंदिरा गांधी में क्या थी खासियत

देश में जब पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी पीएम बने थे, उस समय जनता के बीच ये दोनों नेता भी बहुत लोकप्रिय थे। हालांकि वो डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का दौर नहीं था। इसलिए देश और विदेश के कोने-कोने में अपना नाम पहुंचा पाना इतना आसान भी नहीं था। फिर भी इन दोनों नेताओं ने अपने दौर में जनता को काफी प्रभावित किया।

एक तरफ इंदिरा गांधी अपने सख्त रवैये और फैसले लेने की क्षमता के लिए जानी जाती थीं, वहीं नेहरू देश के पहले पीएम होने के साथ-साथ उस दौर में लिए गए प्रभावी राजनीतिक फैसलों और अपने शानो-शौकत से जीने वाले जीवन के लिए मशहूर हुए थे। 

गांधीजी के साथ इन दोनों नेताओं के मजबूत रिश्तों ने भी उन्हें लोकप्रिय बनाया। अगर गांधी का साथ नेहरू को नहीं मिलता तो वह देश के पहले पीएम नहीं होते। गांधी, नेहरू पर बहुत भरोसा करते थे और उन्हें काफी महत्व देते थे। वहीं इंदिरा गांधी, पंडित नेहरू की बेटी थीं और पंडित नेहरू आजाद भारत के पहले पीएम रहे थे। इसीलिए जनता ने इंदिरा को भी वही सम्मान दिया, जो वह नेहरू को देती थी।