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Rajat Sharma's Blog | MLC चुनाव का संदेश: बंटोगे, तो हारोगे

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Oct 30, 2026 02:39 pm IST,  Updated : Oct 30, 2026 02:44 pm IST

आजकल राजनीति में एक तरफा नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है। जहां BJP जीतती है, वहां हेराफेरी का आरोप लगाया जाता है और जहां विपक्षी दल जीतते हैं, वहां उसे जनसमर्थन का प्रमाण बताया जाता है। सवाल ये है कि ये बात जनता के गले कैसे उतरेगी?

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

आज कल राजनीति में एक नया नैरेटिव बनाने की कोशिश है। जहां BJP जीते, तो कहा जाए कि वो हेराफेरी करके जीती, जहां विरोधी दलों के उम्मीदवार जीते, तो उसे लोकप्रियता दिखाया जाए। ये बात जनता के गले कैसे उतर सकती है? यूपी में BJP की 6 सीटें थीं, सारी बरकरार हैं, पर समाजवादी पार्टी की नजर में ये योगी की हार है। समाजवादी पार्टी ने भी बनारस में वही सीटें जीतीं जो पहले उसके पास थी, लेकिन इसको भारी जीत बताया गया।

दरअसल विधान परिषद के चुनाव का base इतना छोटा होता है कि न तो 6 सीटें जीतकर BJP अपनी जीत का दावा कर सकती है और न ही पांच सीटों पर जीत के आधार पर समाजवादी पार्टी अपनी हवा बना सकती है।

बिहार में सब पार्टियों का हाल एक-सा है। सब आपस में लड़े और विरोधियों को फायदा पहुंचाया। JDU के नेता आपस में लड़े, तो सीट RJD को चली गई, RJD और कांग्रेस आपस में लड़े, तो इसका फ़ायदा BJP और JDU को मिला। जहां BJP, JDU, RJD, कांग्रेस सबमें अंदरूनी लड़ाई हुई तो उसका फायदा जनसुराज पार्टी ने उठाया। चुनाव में जब पार्टियों में आंतरिक टकराव होता है तो फिर नुकसान होना लाज़िमी है।

महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार की पार्टी को अंदरूनी लड़ाई से नुकसान हुआ। अजित पवार के निधन के बाद से उनकी NCP में कई power centers बने हुए हैं। शरद पवार जैसे अनुभवी और चतुर खिलाड़ी ने इसका फ़ायदा उठाया। अपने दोनों उम्मीदवारों को जिताया। BJP को शिंदे सेना ने friendly fight के नाम पर नुकसान पहुंचाया। महायुति की सारी पार्टियों को समझना पड़ेगा कि विधानसभा चुनाव में सब मिलकर जी-जान से लड़े, तो भारी जीत हासिल की। विधान परिषद में आपस में लड़े, एक दूसरे को हराने के लिए काम किया, इसीलिए पहले जैसी सफलता नहीं मिली।

कर्नाटक में कांग्रेस ने वास्तव एक ही सीट हारी। चार में से तीन सीटें तो पहले भी BJP के पास थीं लेकिन इस चक्कर में कांग्रेस के अंदर का झगड़ा उभरकर सामने आ गया। कुछ नेताओं ने कहा कि नाराज़ सिद्धारमैया ने हरवा दिया, किसी ने कहा कि ये डी.के. शिवकुमार की हार है, फिर एक मंत्री ने SIR को सही बताया, तो दूसरे मंत्री ने उनकी बातों को हवा-हवाई क़रार दिया। मतलब साफ है, कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी में आपसी झगड़े चरम सीमा पर हैं। मल्लिकार्जुन खरगे दिल्ली में बैठकर 'वोट चोरी' का नैरेटिव बनाने में लगे हैं, उधर उनकी अपनी पार्टी, अपने प्रदेश में कांग्रेस के नेता एक दूसरे को हरवाने में लगे हैं।

नसीरुद्दीन शाह, देश विरोधी बातें क्यों कहते हो भाई?

एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने भी regime change का नारा लगाने वालों का समर्थन किया। नसीरुद्दीन शाह ने एक छोटा सा वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने खुद को 'दिमागी नक्सल' बताया  और  कहा, दिमागी नक्सल होने पर उन्हें गर्व है।

नसीरुद्दीन शाह एक बेहतरीन अभिनेता हैं। एक्टर  के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में उनका योगदान जबरदस्त है। पर एक अच्छा एक्टर होने से उन्हें देश विरोधी डायलॉग मारने का license नहीं मिल जाता। नसीरुद्दीन शाह को सरकार की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन देश तोड़ने का नारा लगाने वालों का समर्थन करके उन्हें क्या मिलेगा?

नसीरुद्दीन शाह एक कलाकार हैं। उन्हें हर विषय पर अपनी राय रखने की खुली छूट है, पर अपने आप को 'दिमागी नक्सल' कहने का क्या मतलब? जंगलों में रहने वाले नक्सलवादियों का सफ़ाया हो चुका है। अब शहरों में रहकर अराजकता फैलाने वालों, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात करने वालों का हिसाब होना है लेकिन जो भी हो, वो लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। ये बात नसीरुद्दीन शाह को भी अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 29 अक्टूबर, 2026 का पूरा एपिसोड

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