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Rajat Sharma's Blog | GenZ को मोदी की सलाह: रील्स बनाओ, पर किताबें भी पढ़ो

 Written By: Rajat Sharma
 Published : Aug 13, 2026 05:36 pm IST,  Updated : Aug 13, 2026 05:36 pm IST

मोदी ने कहा, युवाओं को राष्ट्रनायकों की जीवनी पढ़नी चाहिए, उनके संघर्षों से सबक लेना चाहिए। सिर्फ युवा ही नहीं, हर उम्र के लोग आजकल दिन भर मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं। रील्स देखने में घंटों बिता देते हैं।

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इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा। Image Source : INDIA TV

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने GenZ को एक अच्छा संदेश दिया। मोदी ने कहा, ज़माना रील्स का है, शॉर्टकट का है, लेकिन युवाओं को किताबों से दोस्ती करनी चाहिए, पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। मोदी ने कहा, रील बनाना, रील देखना कोई बुरी बात नहीं, लेकिन वक्त का ध्यान रखना बहुत जरूरी है क्योंकि रील्स की सर्फिंग में वक्त कब गुजर जाता पता ही नहीं लगता, इसलिए खुद पर काबू रखने की बहुत जरूरत है। मोदी पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन कर रहे थे। 

मोदी ने कहा, युवाओं को राष्ट्रनायकों की जीवनी पढ़नी चाहिए, उनके संघर्षों से सबक लेना चाहिए। सिर्फ युवा ही नहीं, हर उम्र के लोग आजकल दिन भर मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहते हैं। रील्स देखने में घंटों बिता देते हैं। छोटे-छोटे बच्चों को मोबाइल का एडिक्शन हो गया है, इसकी वजह से बच्चों का मानसिक विकास रुक रहा है, तमाम तरह की बीमारियां फैल रही हैं। लोगों में पढ़ने की आदत खत्म हो रही है। मोदी की इस सलाह पर नौजवानों के साथ साथ उन मां-बाप को भी ध्यान देना चाहिए जो छोटे बच्चों के हाथ में किताब की जगह फोन पकड़ा देते हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा: घर में मिले नोट किसके थे?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा के ख़िलाफ़ लगे सारे आरोपों को एक संसदीय समिति ने सही पाया है। दिल्ली में जस्टिस यशवन्त वर्मा के सरकारी घर से पिछले साल 14 मार्च को जले हुए नोटों की बोरियां मिली थीं। संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में जो कैश मिला था, वो पैसा किसका है, कहां से आया, इसका स्रोत क्या है, इसके बारे में जज ने जांच पैनल को सही जानकारी नहीं दी। साफ जवाब देने की बजाय वह टालमटोल करते रहे। जांच में ये भी साफ हो गया कि  जज के घर में जो अधजले नोट मिले थे, उन्हें बाद में गायब कर दिया गया, सारे सबूत मिटा दिए गए, स्टोर रूम को सील करने से पहले सबूतों से छेड़छाड़ की गई थी।

ये आश्चर्य की बात है कि जस्टिस यशवंत वर्मा ने 4 महीने पहले इस्तीफा दिया था, इसी आधार पर संसद में इन पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई थी, पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की लिस्ट में जस्टिस वर्मा का नाम अभी भी शामिल है। जब सुप्रीम कोर्ट की in-house कमेटी ने जस्टिस वर्मा के केस में रिपोर्ट फाइल की थी, तब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने  उनसे इस्तीफा देने को कहा था। उन्होंने इनकार कर दिया था। इसीलिए संसद में महाभियोग  की प्रक्रिया शुरु हुईं। जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसी साल अप्रैल में उन्होने इस्तीफा दे दिया, लेकिन ये इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। इसके पीछे क्या है, कहना मुश्किल है।

दिल्ली: अस्पतालों में करोड़ों का  सामान बर्बाद

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के कीमती उपकरण बरसों से धूल चाट रहे हैं, इस बात का खुलासा  ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली सरकार ने 26 सरकारी असपतालों में पड़े उपकरणों का ऑडिट करवाया था। पता चला, इन उपकरणों को ऑपरेट करने वाले टैक्नीशियन नहीं है, और जहां टैक्नीशियन है, वहां उपकरणों को रखने की जगह ही नहीं है। पता लगा, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में नौ साल पहले साढ़े 15 करोड़ रुपये में साइक्लोट्रॉन मशीन खरीदी गई थी लेकिन स्टाफ की कमी के कारण ये बंद पड़ी है। इसी हॉस्पिटल में 10 करोड़ रुपये में खरीदी गई CT और RT Simulation मशीनें कबाड़ हो रही हैं। जर्मनी से खरीदी गई टिश्यू स्लाइसिंग मशीन 9 साल से पैक पड़ी है। उसे लगाने के लिए अस्पताल में जगह ही नहीं मिली।

गुरु तेगबहादुर अस्पताल में 400 वेंटिलेटर्स और 910 ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर्स कोविड महामारी के बाद से ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह कह रहे हैं कि केजरीवाल की सरकार के वक्त ये सारे उपकरण खरीदे गए थे्, लेकिन न ऑपरेटर्स की भर्ती हुई, न इन उपकरणों के  रखरखाव का इंतजाम किया गया। अस्पतालों के लिए खरीदे गए मेडिकल उपकरण कबाड़ बन जाएं, इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात और क्या हो सकती है। हमारे यहां अस्पतालों की कमी है। जो अस्पताल हैं, उनमें उपकरणों की कमी है, अल्ट्रासाउंड और MRI के लिए नंबर आने में कई-कई हफ्ते लग जाते हैं।

कैंसर के मरीज किन मुश्किलों से गुजरते हैं, Eye Bank से आंख पाने के लिए लोग किस कदर तरसते हैं, इसके बारे में सोच कर ही दिल बैठ जाता है। इन उपकरणों की ये बर्बादी सिर्फ इसीलिए हुई कि समय पर भर्ती नहीं हो पाई। इस लापरवाही की गहराई से जांच होनी चाहिए और जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई अपराधियों की संपत्ति बेच कर की जानी चाहिए। तभी एक मिसाल कायम होगी।

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 12 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड

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