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गुरुग्राम में बच्ची से रेप की असंवेदनशील जांच के लिए हरियाणा पुलिस को SC ने लगाई फटकार, SIT का किया गठन

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Akash Mishra
 Published : Mar 25, 2026 03:11 pm IST,  Updated : Mar 25, 2026 03:37 pm IST

गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप के मामले में निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महिला IPS अधिकारियों की एक SIT का गठन किया है।

गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से रेप की असंवेदनशील जांच के लिए हरियाणा पुलिस को सुप्रीम कोर्ट ने फटका- India TV Hindi
गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से रेप की असंवेदनशील जांच के लिए हरियाणा पुलिस को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा और एक एसआईटी बनाई। Image Source : PTI (FILE)

गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से रेप की असंवेदनशील जांच के लिए हरियाणा पुलिस को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। मामले में निष्पक्ष जांच के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने महिला IPS अधिकारियों की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को निर्देश दिया कि वह जांच SIT को सौंप दे। मैक्स हॉस्पिटल से भी एक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है, जिसमें यह बताया जाए कि मेडिकल राय क्यों बदली गई।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हरियाणा पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि उसने POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट के तहत दर्ज FIR में अपराध की गंभीरता को कम कर दिया—यानी, एक सख्त धारा को हटाकर उसकी जगह एक हल्की धारा लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने एक प्राइवेट अस्पताल की डॉक्टर को भी फटकारा, जिसने बच्चे के बयान के संबंध में अपना पक्ष पूरी तरह से बदल दिया था; कोर्ट ने कहा, "एक डॉक्टर के लिए ऐसा करना शर्मनाक है।"

SC ने पुलिस के अधिकारियों और CWC को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया और उनसे पूछा कि इस मामले में घटिया जांच के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के इस रवैये को "शर्मनाक" और "असंवेदनशील" बताते हुए कहा, "पुलिस पीड़ित के घर क्यों नहीं जा सकती? क्या वे राजा हैं? जो अधिकारी वहां गया था, उसे भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया।"

बेंच ने गुरुग्राम बाल कल्याण समिति (CWC) को भी एक 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया, जिसमें पूछा गया कि उन्हें उनके पद से क्यों न हटा दिया जाए। बेंच ने टिप्पणी की, "5 फरवरी की रिपोर्ट से CWC सदस्यों का जो रवैया सामने आया है, उससे पीड़ित की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पूरी पुलिस फ़ोर्स—कमिश्नर से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक—ने यह साबित करने की हर मुमकिन कोशिश की कि बच्चे के पास कोई सबूत नहीं है और उसके माता-पिता का मामला बेबुनियाद है। इसमें जरा भी शक की गुंजाइश नहीं है कि POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत साफ तौर पर एक अपराध किया गया है।"

गुरुग्राम के जिला न्यायाधीश को दिया ये निर्देश

इसके अलावा कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे इस मामले को शहर में POCSO अदालत की अध्यक्षता कर रही एक वरिष्ठ महिला न्यायिक अधिकारी को सौंप दें।

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