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‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मंत्री के बयान के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं

Edited By: India TV News Desk Published : Jan 03, 2023 12:44 pm IST, Updated : Jan 03, 2023 12:44 pm IST

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस सवाल पर आया है कि क्या राज्य या केंद्र सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायक या उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों की बोलने की आजादी पर पाबंदी लगाई जा सकती है?

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Image Source : PTI FILE सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि किसी मंत्री के बयान को सरकार से नहीं जोड़ा जा सकता।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को लागू करने के बावजूद किसी मंत्री द्वारा दिए गए बयान को अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। जस्टिस एस. ए. नजीर की अगुवाई वाली 5 सदस्यों की संविधान पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत बताई गई पाबंदियों के अलावा स्वतंत्र अभिव्यक्ति के खिलाफ कोई अतिरिक्त पाबंदी लागू नहीं की जा सकती। बेंच में जस्टिस बी. आर. गवई, जस्टिस ए. एस. बोपन्ना और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम भी शामिल हैं।

‘मंत्री के बयान के लिए सरकार जिम्मेदार नहीं’

बेंच ने कहा, ‘सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को लागू करने के बावजूद किसी मंत्री द्वारा दिए गए बयान को अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के साथ नहीं जोड़ा जा सकता, फिर भले ही वह बयान राज्य के किसी मामले को लेकर हो या सरकार की रक्षा करने वाला हो। अनुच्छेद 19(1) के तहत मौलिक अधिकार का प्रयोग राज्य के अलावा अन्य व्यवस्था के खिलाफ भी किया जा सकता है।’ कोर्ट का यह फैसला इस सवाल पर आया है कि क्या राज्य या केंद्र सरकार के मंत्रियों, सांसदों, विधायक या उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों की बोलने की आजादी पर पाबंदी लगाई जा सकती है?

जस्टिस नागरत्ना ने लिखा अलग आदेश
वहीं, बेंच में शामिल जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने एक अलग आदेश लिखा। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बेहद आवश्यक अधिकार है ताकि नागरिकों को शासन के बारे में अच्छी तरह जानकारी हो। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाला भाषण असमान समाज का निर्माण करते हुए मूलभूत मूल्यों पर प्रहार करता है और विविध पृष्ठभूमियों, खासतौर से ‘हमारे भारत जैसे देश के’ नागरिकों पर भी हमला करता है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह संसद के विवेक के ऊपर है कि वह सार्वजनिक पदाधिकारियों को नागरिकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से रोकने के लिए एक कानून बनाए।

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