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'मृत यात्री के पास से ट्रेन टिकट न मिलने पर भी मुआवजे का दावा खारिज नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Sep 26, 2026 04:19 pm IST,  Updated : Sep 26, 2026 04:19 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा है कि अगर मृत यात्री के पास से ट्रेन का टिकट नहीं मिलता है तो इसके आधार पर उसके परिजनों को मिलने वाले मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता है।

Supreme Court railway compensation ruling- India TV Hindi
दुर्घटना के बाद परिवार को मिलने वाले मुआवजे के मामले पर SC ने अहम टिप्पणी की है। Image Source : PTI (प्रतीकात्मक फोटो)

मृत यात्री के पास से ट्रेन टिकट नहीं मिलने पर भी उसके परिवार को दिए जाने वाले मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मृतक यात्री के पास से ट्रेन का टिकट नहीं मिलने पर भी मुआवजे का दावा वैलिड है। इसके साथ ही, सर्वोच्च अदालत ने उस शख्स के माता-पिता को मुआवजा देने के आदेश को बहाल किया, जिसकी 2017 में गुजरात में चलती ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई थी।

सूरत जाते वक्त ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे महेशभाई

इस मामले पर जस्टिस उज्ज्वल भुयान और ए.एस. चंडुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस ऑर्डर को रद्द कर दिया जिसमें महेशभाई के माता-पिता को आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया गया था। बता दें कि महेशभाई की मौत 27 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद के रास्ते सूरत जाते वक्त जनरल डिब्बे से अचानक झटके की वजह से गिरने से हो गई थी।

हाईकोर्ट ने रेलवे टिकट न होने को जरूरत से ज्यादा अहमियत दी, जबकि उसने पीड़ित के पिता के शपथ-पत्र पर दिए गए बयान और इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि पीड़ित 1 महीने से अधिक समय तक हॉस्पिटल में भर्ती रहा था। संभावनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पीड़ित एक असली यात्री था और टिकट न मिलने के कारण मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने भी पीड़िता के माता-पिता को क्लेम का हकदार माना

सुप्रीम कोर्ट बोलीं कि 17 जून, 2022 को रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने भी माना कि महेशभाई एक 'अनचाही घटना' की चपेट में आ गए थे और गलती से ट्रेन से गिर गए थे। ट्रिब्यूनल ने उनके माता-पिता को 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घटना की तारीख से लेकर आदेश की तारीख तक सालाना 9 प्रतिशत की दर से ब्याज पाने का भी हकदार माना।

बुरी तरह जख्मी होने के बाद हो गई थी महेशभाई की मौत

पीठ ने कहा कि यह घटना 27 सितंबर, 2017 को हुई थी, जिसमें पीड़ित महेशभाई को गंभीर चोटें आई थीं और उन्हें एक महीने से अधिक समय तक हॉस्पिटल में भर्ती रहना पड़ा था। बाद में 31 अक्टूबर 2017 को चोटों की वजह से महेशभाई की मौत हो गई थी। बेंच ने ये भी कहा कि आमतौर पर, जब पीड़ित का इलाज हो रहा होता है, तो इस बात की संभावना काफी कम हो जाती है कि मुआवजे का क्लेम करने वालों ने रेलवे का टिकट संभाल कर रखा हो। इससे पहले हाल ही में मणिपुर के राहत शिविरों में अप्राकृतिक मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई थी। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि 20-30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया।

(इनपुट- PTI)

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