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जंग ने केजरीवाल को 'जल्दबाजी में एक युवक' करार दिया

 Written By: IANS
 Published : Jan 12, 2017 07:39 am IST,  Updated : Jan 12, 2017 07:39 am IST

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग ने बुधवार को आम आदमी पार्टी पर नियुक्तियों में 'भाई-भतीजावाद करने और घोर पक्षपात' का आरोप लगाया लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संदेह का लाभ दिया।

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नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग ने बुधवार को आम आदमी पार्टी पर नियुक्तियों में 'भाई-भतीजावाद करने और घोर पक्षपात' का आरोप लगाया लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को संदेह का लाभ दिया। केजरीवाल को उन्होंने एक ऐसा युवा करार दिया जो जल्दबाजी में है। जंग ने कहा कि केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के विधानसभा चुनाव में एक जबर्दस्त बहुमत के बाद सत्ता के जोश में फैसले लिए। जंग ने कहा, "शायद उन्हें व्यवस्था की जानकारी नहीं है। मैं उन्हें संदेह का लाभ देना चाहूंगा।"

केजरीवाल के बारे में उन्होंने कहा, "वह यह नहीं जानते कि सरकार की अपनी गति और आवेग होता है वह अपनी रफ्तार से चलते रहते हैं।" वह एक युवा हैं और काम करने की जल्दी में हैं। समय के साथ वह सीख जाएंगे। उपराज्यपाल के रूप में साढ़े तीन साल के कार्यकाल में जंग और दिल्ली सरकार के बीच रस्साकशी चलती रही। जंग ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के साथ उनके मतभेद पेशेवर थे।

जंग ने कहा, "केजरीवाल के साथ मेरे रिश्ते अत्यंत सौहार्दपूर्ण थे। मैं उनके घर गया हूं वह मेरे घर आए हैं। उनका एक प्यारा परिवार है।" पूर्व उपराज्यपाल ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर कभी नहीं बोला। जब वह कभी अकेले में मिले तो हम दोनों में कभी जरा सा भी वाद-विवाद नहीं हुआ।

हालांकि, उन्होंने कहा कि शुंगलू समिति द्वारा दिल्ली सरकार के फैसलों की जांच की जा रही 400 संचिकाओं में से बहुत सारी जांच के लिए सीबीआई को भेजी गई हैं। विशेषज्ञ समिति के पास जो संचिकाएं जमा की गई हैं उनकी तीन श्रेणियां हैं।

पहली श्रेणी उन संचिकाओं की है जिनमें मुख्यमंत्री ने खुद फैसले लिए लेकिन उनका अधिकार नहीं था और उसके लिए उप राज्यपाल की सहमति की जरूरत थी। दूसरी श्रेणी में वे संचिकाएं हैं जिनमें उपराज्यपाल की सहमति के बगैर मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल ने फैसले लिए।

तीसरी श्रेणी उन फैसलों की है जिन्हें ऐसा करने का अधिकार न तो मुख्यमंत्री को और न ही उपराज्यपाल को था। दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल ने कहा कि 170-180 संचिकाओं पर उन्होंने काम हो जाने के बाद मंजूरी दी। करीब 80 संचिकाओं को मंजूरी देने से इनकार किया गया और 7-8 संचिकाएं जांच के लिए सीबीआई को भेजी गईं।

उन्होंने कहा कि दो-तीन मामलों में तो प्राथमिकियां दर्ज भी की जा चुकी हैं और करीब एक दर्जन को निगरानी जांच के लिए भेजा गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार अगस्त को जब दिल्ली सरकार का प्रशासनिक प्रमुख उपराज्यपाल को करार दिया उसके बाद जंग ने शुंगलू समिति का गठन किया।

जंग ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल की पत्नी के रिश्तेदार निकुंज जैन को नियमों से परे जाकर सबसे पहले एक एक रेजीडेंट डॉक्टर नियुक्त किया और उसके बाद अपने कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) नियुक्त कर दिया।

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