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'अनावश्यक मुकदमों' के लिए केजरीवाल पर बरसीं कांग्रेस व भाजपा

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 04, 2016 05:13 pm IST,  Updated : Aug 04, 2016 05:13 pm IST

भाजपा ने गुरुवार को उप राज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताए जाने से संबंधित उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि आप सरकार संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर 'अराजकतावादियों' की तरह शासन नहीं कर सकती।

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को उप राज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताए जाने से संबंधित उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर 'अराजकतावादियों' की तरह शासन नहीं कर सकती। कांग्रेस ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग कर अनावश्यक मुकदमे दायर करते रहते हैं।

दिल्ली भाजपा इकाई के प्रमुख सतीश उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, "उच्च न्यायालय का फैसला सही है क्योंकि वे दिल्ली में संवैधानिक प्रावधानों का अनुसरण नहीं कर रहे थे। वे संवैधानिक प्रावधानों का अतिक्रमण कर रहे थे जो असंवैधानिक है।"

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि उप राज्यपाल दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल की सलाह से बंधे हुए नहीं हैं। दिल्ली सरकार की अधिसूचनाएं उप राज्यपाल से विचार-विमर्श के बाद ही जारी की जानी चाहिए।

भाजपा नेता ने कहा, "अदालत ने उन्हें स्पष्ट किया है कि उन्हें संवैधानिक प्रावधानों के तहत दिल्ली का शासन चलाना है। उप राज्यपाल और मुख्यमंत्री की भूमिकाएं केंद्र शासित प्रदेश के लिए संविधान के तहत निर्धारित हैं।"

वरिष्ठ कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने आईएएनएस से कहा, "केजरीवाल ने अपने शासन के 18 महीने बिना कुछ किए बर्बाद कर दिए। इस दौरान उन्होंने उप राज्यपाल के साथ सिर्फ विवाद ही किया। यह केजरीवाल की महत्वाकांक्षा ही है कि वह संविधान के तहत प्राप्त शक्तियों से अधिक शक्तियां चाहते हैं।"

मुखर्जी ने कहा, "केजरीवाल दिल्ली के करादाताओं का पैसा मुकदमों पर खर्च कर रहे हैं और वह भी यह सोचे बिना कि दिल्ली की जनता ने उन्हें लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए जनादेश दिया है।"

उन्होंने कहा, "वह गुजरात, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन देकर स्वयं के प्रचार में करदाताओं के पैसे को बर्बाद कर रहे हैं, इनका दिल्ली के कामकाज से कोई लेना-देना नहीं है।"

उच्च न्यायालय ने आप सरकार को झटका देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार रोधी शाखा केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू नहीं कर सकती।

अदालत का यह फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नौकरशाहों की नियुक्तियों पर उप राज्यपाल और दिल्ली की आप सरकार के बीच उठे विवाद के बीच दायर नौ अलग-अलग याचिकाओं के संदर्भ में आया।

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