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भाजपा की नजरें अब वाम गढ़ त्रिपुरा और पूर्वोत्तर पर

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 06, 2017 10:42 am IST,  Updated : Apr 06, 2017 10:42 am IST

कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान को आगे बढ़ाने के बाद भाजपा अब वामदलों के गढ़ त्रिपुरा, केरल जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस सिलसिले में भाजपा त्रिपुरा समेत पूर्वोत्तर पर विशेष जोर दे रही है

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नयी दिल्ली: कांग्रेस मुक्त भारत के अभियान को आगे बढ़ाने के बाद भाजपा अब वामदलों के गढ़ त्रिपुरा, केरल जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस सिलसिले में भाजपा त्रिपुरा समेत पूर्वोत्तर पर विशेष जोर दे रही है जहां साल 2018 के प्रारंभ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस सिलसिले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का मई के पहले सप्ताह में त्रिपुरा जाने का कार्यक्रम हैं जहां वे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, साथ ही इस प्रदेश में पार्टी के विस्तार की जमीन तैयार करने पर विचार करेंगे। त्रिपुरा में 1993 से ही वाममोर्चा की सरकार है और पिछले 24 वर्षो से राज्य में कांग्रेस विपक्ष में है। पिछले चुनाव में हालांकि कांग्रेस का आधार कमजोर हुआ है और पार्टी इसका लाभ उठाने का प्रयास कर रही है।

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मणिपुर के प्रभारी रहे भाजपा सांसद प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि पूर्वोत्तर में कमल खिल रहा है। असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिुपर में भाजपा का कमल खिल चुका है और त्रिपुरा, नगालैंड जैसे राज्यों में भी कमल खिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूर्वोत्तर में जबर्दस्त जीत दर्ज करेगी। कांग्रेस एवं वामदलों के शासन में इन प्रदेशों में लोगों की आशा आकांक्षाएं पूरी नहीं हुई। विकास का अंश मात्र इन प्रदेशों में नहीं दिख रहा है और नई पीढ़ी भ्रमित है। उसे कोई राह नहीं दिख रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास के मंत्र के सहारे ही पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास हो सकता है। और यह क्षेत्र देश के विकास का इंजन बन सकता है। पूर्वोत्तर में अपनेे पांव जमाने के लिए भी भाजपा पूरी ताकत लगा रही है। इस श्रृंखला में पार्टी को असम में जबर्दस्त जीत मिली और मणिपुर में भी भाजपा सरकार बनाने में सफल रही है। भाजपा की नजरें अब त्रिपुरा पर हैं जहां अगले साल के प्रारंभ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

त्रिपुरा में 60 सदस्यीय विधानसभा में वामदलों के 49 सदस्य हैं जबकि कांग्रेस के 10 सदस्य हैं। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 50 सीटों पर चुनाव लड़ा था हालांकि वह अनेक सीटों पर जमानत भी नहीं बचा सकी थी। इस चुनाव में माकपा को 48.11 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे जबकि कांग्रेस को 36.53 प्रतिशत वोट मिले। भाजपा का मत प्रतिशत 1.54 रहा था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत बढ़कर 5.77 प्रतिशत हो गया जबकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 15.38 प्रतिशत आ गया था। अब भाजपा की नजरें आसन्न विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा में अच्छा प्रदर्शन करने के साथ 2019 के लोकसभा चुनाव में पूर्वोत्तर में 20-25 सीटें जीतने पर हैं।

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