नई दिल्ली: देश में असहिष्णुता की घटनाओं से उत्पन्न स्थिति के बारे में लोकसभा में आज बेहद असहिष्णु माहौल में चर्चा शुरू हुई जिसके चलते सदन की कार्यवाही को चार बार स्थगित करना पड़ा। विपक्ष की ओर से गृह मंत्री पर एक पत्रिका के हवाले से हिन्दुत्व संबंधी कुछ आरोप लगाये गए जिसका राजनाथ सिंह ने खंडन किया।
सत्तापक्ष के कई सदस्यों ने उस पत्रिका का हवाला देने वाले माकपा सदस्य और संबंधित पत्रकार के विरूद्ध विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई करने की मांग की। नियम 193 के तहत दोपहर करीब 12 बजे यह विशेष चर्चा शुरू होते ही असहिष्णुता का माहौल बना जो शाम चार बजे तक चला और इस बीच सदन को चार बार स्थगित करना पड़ा।
चर्चा को शुरू करते हुए माकपा के मोहम्मद सलीम ने एक पत्रिका के हवाले से गृह मंत्री राजनाथ सिंह पर कुछ गंभीर आरोप लगाए जिससे सिंह काफी आहत हुए और उन्होंने कहा कि अगर ऐसे आरोपों में लेशमात्र भी सत्यता है तो उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
सलीम ने पत्रिका के हवाले से कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत सरकार बनने के संबंध में आरएसएस से जुड़ी किसी बैठक में सिंह ने कुछ कहा था।
गृह मंत्री ने इसका कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा, 'मैंने ऐसा कभी नहीं कहा और इस आरोप से जितना आहत मैं आज हुआ हूं, उतना पहले कभी नहीं हुआ। अगर इस आरोप में लेशमात्र भी सत्यता है तो मुझो अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। मैं नाप तौल कर बोलता हूं। सदस्य भी, यहां तक की अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी इस बात को जानते हैं।'
सत्तापक्ष के सदस्यों के विरोध के बीच माकपा नेता ने कहा कि वह आरोप नहीं लगा रहे हैं, बल्कि वह तो उस पत्रिका में लिखी बातों को सदन में रख रहे हैं और जो काम सीबीआई, आईबी जैसी एजेंसी को करना चाहिए था। ऐसा करके वह सरकार को यह मौका दे रहे हैं कि वह मामले की जांच करके कार्रवाई करे।
सलीम ने कहा कि गृह मंत्री को चाहिए था कि अगर यह सही नहीं है तब उन्हें इसका उसी समय खंडन करें और पत्रिका और संबंधित रिपोर्टर के खिलाफ नोटिस देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत रूप से राजनाथ सिंह से कोई झगड़ा नहीं है और उनकी चले तो नरेन्द्र मोदी की जगह सिंह को पीएम बना दें।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर आरोप है और देश के गृह मंत्री के खिलाफ है। और जब तक सलीम इसकी सत्यता की पुष्टि होने तक इसे वापस नहीं लेते तब तक कार्यवाही चलाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री इन आरोपों का खंडन कर चुके हैं, इसलिए वह इसकी सत्यता स्थापित होने तक अपनी कही बातों को वापस ले लें जिससे की सदन को चलाने में कोई कठिनाई नहीं आए।
इस पर सलीम ने कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री का यह कहना कि जब तक वह अपनी बात वापस नहीं लेते, सदन की कार्यवाही नहीं चलने पायेगी.. यह अपने आप में असहिष्णुता है। उन्होंने कहा कि यह बड़ा हास्यास्पद है कि मंत्री उनसे पत्रिका की बातों को साबित करने को कह रहे हैं जबकि यह काम सरकार का है। उन्होंने कहा कि उन्होंने तो केवल एक ग्राहक के नाते वह पत्रिका ली और उसमें लिखी बातों को सदन के समक्ष रखा।