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केजरीवाल सरकार को दिल्ली उच्च न्यायालय से झटका

 Written By: IANS
 Published : Jun 10, 2015 05:46 pm IST,  Updated : Jun 10, 2015 05:46 pm IST

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा 21 मई को जारी की गई अधिसूचना पर रोक लगाने से बुधवार को इंकार कर दिया। इस अधिसूचना के जरिए दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो

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केजरीवाल सरकार को दिल्ली उच्च न्यायालय से झटका

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा 21 मई को जारी की गई अधिसूचना पर रोक लगाने से बुधवार को इंकार कर दिया। इस अधिसूचना के जरिए दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) पर केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामलों में कार्रवाई करने पर रोक लगा दी गई थी।

न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर और न्यायमूर्ति आई.एस. मेहता की दिल्ली उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने अधिसूचना पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि इसी तरह का एक मामला पहले से ही दूसरी पीठ के पास लंबित है। साथ ही पीठ ने इस मामले को लंबित जनहित याचिका के साथ जोड़ दिया।

न्यायालय ने कहा, "अवकाश पीठ अधिसूचना पर रोक नहीं लगा सकती। इसी संबंध में एक जनहित याचिका दूसरी पीठ के पास पहले से लंबित है। इसलिए उसी पीठ में इस याचिका पर सुनवाई होगी।"

अधिवक्ता आर.एस. राजू और वी. सुधीर ने 21 मई की अधिसूचना को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। अधिसूचना में कहा गया था कि दिल्ली के उप-राज्यपाल के पास राजधानी में प्रमुख नौकरशाहों की नियुक्ति और उनके तबादले का अधिकार है।

याचिका में अधिसूचना की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील देते हुए कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा 21 मई को जारी की गई अधिसूचना संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 239 एए-4) के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े नौकरशाहों की सेवाओं के मामले इसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।

इससे पहले दिल्ली सरकार ने अधिसूचना को चुनतौ दी थी, जिस पर न्यायालय ने रोक लगाने से इंकार कर दिया था।

इस संबंध में कानून के एक छात्र ने भी जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत ने कोई फैसला देने से इंकार कर दिया और मामले को अगली सुनवाई (पांच अगस्त) तक टाल दी।

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