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मौजूदा दौर लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय: राहुल गांधी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Nov 07, 2016 01:22 pm IST,  Updated : Nov 07, 2016 05:02 pm IST

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शासन में लोकतंत्र सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है और सरकार अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को दबाने की कोशिश कर रही है। राहुल

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शासन में लोकतंत्र सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है और सरकार अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को दबाने की कोशिश कर रही है। 

राहुल गांधी ने आज ये बात कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में कही जिसकी अध्यक्षता भी उन्होंने ही की। सोनिया गांधी के अस्वस्थ होने के चलते कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। ऐसा पहली बार है कि राहुल गांधी ने समिति की बैठक की अध्यक्षता की है जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं ।  

उन्होंने कहा कि सरकार अपने अधिकारों के दुरुपयोग से आज़ादी को दबाने की कोशिश कर रही है लेकिन इससे हम और मज़बूत होंगे। उन्होंने कहा टीवी चैनलों को दंडित कर बंद करने को कहा जा रहा है और सरकार से जवाब मांगने पर विपक्ष की घेराबंदी की जा रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार को सत्ता का नशा है और वह उन सब को ख़ामोश करना चाहती है जो उससे असहमत हों।

बैठक में वरिष्ठ पार्टी नेता मनमोहन सिंह , पी चिदम्बरम , गुलाम नबी आजाद, जनार्दन द्विवेदी , अहमद पटेल , अम्बिका सोनी और ए के एंटनी समेत कई अन्य नेता भाग ले रहे हैं । इस बैठक में संगठनात्मक चुनाव को अगले साल के लिए टाले जाने का फैसला होगा। 16 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व समिति की बैठक होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है । संसद सत्र में कांग्रेस विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रही है जिनमें पठानकोट हमले की कवरेज को लेकर एनडीटीवी इंडिया के खिलाफ एक दिवसीय प्रतिबंध के मुद्दे पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विषय भी शामिल है । सर्जिकल स्ट्राइक, सिमी के आठ आतंकवादियों के एक मुठभेड़ में मारे जाने , तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के मुद्दों को भी कांग्रेस द्वारा उठाए जाने की संभावना है । 

बैठक में राहुल गांधी की पदोन्नति के मामले पर कोई फैसला होने की संभावना नहीं है क्योंकि पार्टी के भीतर एक वर्ग का मानना है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद इस मामले को लिया जाना चाहिए। कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव काफी लंबे समय से अटके पड़े हैं और पार्टी ने 31 दिसंबर तक इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग से समय मांगा है । 

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