नई दिल्ली: हालिया विधानसभा चुनावों में वोटिंग मशीनों में छेड़छाड़ के विपक्ष के आरोपों के बीच कांग्रेस ने आज कहा कि यदि लोकतंत्र के विभिन्न पक्षों को ईवीएम को लेकर आशंकाएं हैं तो आगामी चुनाव मतपत्र से कराये जाने चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग को ईवीएम का पैरोकार नहीं बनना चाहिए।
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कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आज पार्टी के नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, लोकतंत्र में चुनाव आयोग अधिक से अधिक सुविधा प्रदान करने वाला हो सकता है। वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का नियंत्रक नहीं हो सकता। उन्होंने यह टिप्पणी चुनाव आयोग के उस बयान की ओर परोक्ष संकेत करते हुए की जिसमें उसने आम आदमी पार्टी को पंजाब चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी होने की आशंका जताये जाने के बजाय अपने प्रदर्शन पर आत्ममंथन करने की नसीहत दी थी।
उल्लेखनीय है कि गत शनिवार को कांग्रेस और आप के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से अलग-अलग मुलाकात कर ईवीएम में छेड़छाड़ को लेकर शिकायत की थी। चुनाव आयोग से मतपत्र के जरिये चुनाव कराये जाने की मांग करते हुए तिवारी ने कहा, अंतत: लोकतंत्र लोगों की अवधारणा पर आधारित होती है। यदि चुनाव ईवीएम के बजाय मतपत्र से हों तो चुनाव आयोग को क्या परेशानी है।
उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न पक्षों को यह आशंका है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गयी या छेड़छाड़ की जा सकती है तो चुनाव आयोग को इसे लेकर बचाव की मुद्रा में नहीं आना चाहिए। तिवारी ने कहा कि चुनाव आयोग को अपनी तरफ से यह कहना चाहिए कि यदि विभिन्न पक्षों में ईवीएम को लेकर आशंकाएं हैं तो हम अगला चुनाव मतपत्र से करवायेंगे।
आप द्वारा ईवीएम मशीनों को 72 घंटे के भीतर डिकोड करने के दावे के बारे में पूछे गये सवाल पर तिवारी ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है या नहीं। इसे कई बार प्रदर्शित किया जा चुका है कि ईवीएम में छेड़छाड़ हो सकती है। भाजपा भी विपक्ष में रहने के दौरान ऐसा दावा कर चुकी है। कांग्रेस ने भी ऐसा दावा किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, मुद्दा यह है कि यहां आशंका है.. अंतत: लोकतंत्र लोगों के भरोसे पर आधारित होता है। लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि जिस माध्यम से वह अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं वह छेड़छाड़ से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न पक्षों में भरोसा ही नहीं है तो चुनाव आयोग को ईवीएम का पैरोकार नहीं बनना चाहिए। उसे यह अपनी तरफ से कहना चाहिए कि वह वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करेगा।