नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव ने काला धन अब तक वापस नहीं आने पर अपनी बेबसी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कालेधन को विदेशों से वापस लाने को लेकर उनके तमाम प्रयास जारी हैं। सरकार के जुड़े लोगों को बराबर याद दिलाते रहते हैं लेकिन अभी तक पैसा वापस नहीं आया है इसलिए इस मुद्दे पर फिलहाल बात करने के लिए कुछ नहीं है।
रामदेव के इतना कहने भर की देर थी कि अलग अलग दलों के हमले उनपर शुरू हो गए। जेडीयू सांसद केसी त्यागी ने कहा, 'अपना औषधि का व्यापार बढ़ाने के लिए ही बाबा रामदेव विरोधियों से मिलकर सरकार पर दबाव बना रहे है।' कांग्रेस के बड़े नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, 'चुनाव के दौरान तो बाबा काले धन के खिलाफ बोलते थे, अब बोल रहे हैं, हमने तो कहना ही छोड़ दिया। इससे तो यही दिखता है कि काले धन को लेकर जितनी जिम्मेदार सरकार है, उससे थोड़े ही कम बाबा रामदेव हैं।
रामदेव पर हमला करने में सिर्फ कांग्रेस और जेडीयू पार्टियां ही आगे नहीं रहीं। केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना के नेताओं ने भी रामदेव को निशाने पर लिया। शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा, 'लोग अकाउंट में 15 लाख रुपये के इंतजार में थे। वो तो अब भूल गए लेकिन जबसे रामदेव का प्रॉफिट बढ़ा है तब से उन्होंने भी बात करनी बंद कर दी है। बीजेपी नेता विनय कटियार ने कहा, 'रामदेव काले धन की बात ना ही करें तो अच्छा है, वो साधु हैं, योग करवाते हैं वही करवाते रहें। उनके उत्पाद अच्छे हैं। वो बिक रहे हैं, रामदेव बेचते रहें।'
मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा रामदेव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि साध्वी प्रज्ञा के ऊपर मकोका हटाने के फैसले को वो कलर कास्ट आतंकवाद से जोड़कर नहीं देखते। अपना विचार रखते हुए रामदेव ने कहा कि देश में वैचारिक संकट सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि भारत की आत्मा और इंडिया की सोच में फिलहाल अंतर दिख रहा है।