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जेएनयू विवाद: सरकार के निपटने के तरीके को लेकर एबीवीपी के तीन कार्यकर्ताओं ने दिया इस्तीफा

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 18, 2016 07:29 am IST,  Updated : Feb 18, 2016 07:29 am IST

देश के अग्रणी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बढ़ते विवाद पर केंद्र के निपटने के तरीके और दक्षिणपंथी धड़े की फासीवादी ताकतों की कार्रवाई को वैध करार देने पर भाजपा की छात्र संगठन एबीवीपी की जेएनयू इकाई के तीन पदाधिकारियों ने आज इस्तीफा दे द

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नयी दिल्ली : देश के अग्रणी जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बढ़ते विवाद पर केंद्र के निपटने के तरीके और दक्षिणपंथी धड़े की फासीवादी ताकतों की कार्रवाई को वैध करार देने पर भाजपा की छात्र संगठन एबीवीपी की जेएनयू इकाई के तीन पदाधिकारियों ने आज इस्तीफा दे दिया।

पार्टी छोड़ने का ऐलान किया

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई के संयुक्त सचिव प्रदीप नरवाल ने कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस) की एबीवीपी इकाई के अध्यक्ष राहुल यादव और इसके सचिव अंकित हंस ने भी कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ दी है। तीनों नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उन्होंने एबीवीपी छोड़ने का फैसला किया है, क्योंकि राजग सरकार जिस तरह से इन मुद्दों से निपट रही है उससे उनका जबर्दस्त मतभेद है। उन्होंने यह भी कहा कि सवाल पूछने, विचारों के दमन और समूचे वाम का राष्ट्र विरोधी के तौर ब्रांडिंग करने के बीच फर्क है।

उन्होंने पटियाला हाउस अदालत परिसर में सोमवार को मीडियाकर्मियों और जेएनयू के छात्रों तथा शिक्षकों के साथ आज उसी परिसर में जेएनयूएसयू अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर हुए हमले को लेकर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार दक्षिणपंथी धड़े की फासीवादी ताकतों की कार्रवाई को वैध करार दे रही है। उन्होंने कहा, हमलोग एबीवीपी से इस्तीफा दे रहे हैं और मौजूदा जेएनयू घटना तथा लंबे समय से मनुस्मृति (स्मृति ईरानी) के साथ वैचारिक भिन्नता एवं रोहित वेमुला मामले पर अपने वैचारिक मतभेद के कारण हम पार्टी की अगली किसी भी गतिविधि से खुद को अलग करते हैं।

राष्ट्र विरोधी नारे दुर्भाग्यपूर्ण और भावनाओं को आहत करने वाले

बयान के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी को लगे राष्ट्र विरोधी नारे दुर्भाग्यपूर्ण और भावनाओं को आहत करने वाले थे। इस कृत्य के लिए चाहे जो भी जिम्मेदार हो उसे कानून के मुताबिक जरूर सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, जिस कदर राजग सरकार इस पूरे मामले से निपट रही है, चाहे वह प्रोफेसरों पर कार्रवाई, वकीलों द्वारा मीडियाकर्मियों और कन्हैया कुमार पर अदालत परिसर में बार बार हमले (आज) का  मामला हो, यह अनुचित है।संपर्क करने पर एबीवीपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि संगठन को अभी तक उनका इस्तीफा नहीं मिला है।

यह कोई राष्ट्रवाद नहीं बल्कि गुंडागर्दी

इसके अनुसार, हर रोज हमलोग यह देखते हैं कि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लोग भारत का झंडा लेकर जेएनयू के छात्रों को पीटने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। यह कोई राष्ट्रवाद नहीं बल्कि गुंडागर्दी है। आप देश के नाम पर यह सब नहीं कर सकते हैं। राष्ट्रवाद और गुंडागर्दी में फर्क है।

जेएनयूएसयू अध्यक्ष कुमार की रिहाई की मांग को लेकर जेएनयू के छात्र हड़ताल पर हैं। कुमार को विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में बीते शुक्रवार को राष्ट्रद्रोह और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से भारत विरोधी नारे लगाए गए थे। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम के आयोजन का विरोध किया था जिसके बाद कुलपति ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी, बावजूद इसके आयोजकों ने कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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