1. Hindi News
  2. भारत
  3. राजनीति
  4. आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है, कृषि कानून रद्द किए जाने पर बोलीं सोनिया गांधी

आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है, कृषि कानून रद्द किए जाने पर बोलीं सोनिया गांधी

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Nov 19, 2021 05:09 pm IST,  Updated : Nov 19, 2021 10:07 pm IST

इससे पहले प्रियंका गांधी वाद्रा ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले को किसानों की जीत और सरकार के अहंकार की हार करार दिया।

Today truth, justice, & non-violence have won: Congress Sonia Gandhi in a statement on repeal of thr- India TV Hindi
सोनिया गांधी ने तीन कृषि कानूनों के निरस्त होने पर कहा कि आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है। Image Source : PTI

Highlights

  • सोनिया गांधी ने कहा कि आज न्याय के लिए इस संघर्ष में जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी, उनका बलिदान रंग लाया है।
  • प्रियंका गांधी ने प्रश्न किया कि सरकार औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र का इंतजार क्यों कर रही है।
  • प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने माफी मांगी, लेकिन उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी।

नई दिल्ली: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तीन कृषि कानूनों के निरस्त होने पर कहा कि आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है। सोनिया गांधी ने ट्वीट किया, "आज 700 से अधिक किसान परिवारों, जिनके सदस्यों ने न्याय के लिए इस संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति दी थी, उनका बलिदान रंग लाया है। आज सत्य, न्याय और अहिंसा की जीत हुई है।" सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करना चाहिए और भविष्य में कृषि कानूनों जैसा कोई बड़ा कदम उठाने से पहले राज्य सरकारों, विपक्षी दलों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत करनी चाहिए।

सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘आज सत्ता में बैठे लोगों द्वारा बुना किसान-मजदूर विरोधी षड्यंत्र भी हारा और तानाशाह शासकों का अहंकार भी। आज रोजी-रोटी और किसानी पर हमला करने की साजिश भी हारी। आज खेती-विरोधी तीनों काले कानून हारे और अन्नदाता की जीत हुई।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ‘‘भाजपा सरकार ने लगातार खेती पर अलग-अलग तरीके से हमला बोला है। चाहे भाजपा सरकार बनते ही किसान को दिए जाने वाले बोनस को बंद करने की बात हो, या फिर किसान की जमीन के उचित मुआवज़े पर कानून को अध्यादेश लाकर समाप्त करने का षड्यंत्र हो। चाहे किसान को लागत के अतिरिक्त 50 प्रतिशत मुनाफा देने से इनकार कर देना हो, या फिर डीज़ल व कृषि उत्पाद की लागतों में भारी भरकम वृद्धि हो, या फिर तीन खेती विरोधी काले कानूनों का हमला हो।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘आज जब किसान की औसत आय 27 रुपये प्रतिदिन रह गई हो और देश के किसान पर औसत कर्ज 74,000 रुपये हो, तो सरकार व हर व्यक्ति को दोबारा सोचने की जरूरत है कि खेती किस प्रकार से सही मायनों में मुनाफे का सौदा बने। किसान को उसकी फसल की सही कीमत यानी एसएमपी कैसे मिले।’’ सोनिया गांधी के मुताबिक, ‘‘किसान व खेत मजदूर को यातना नहीं, याचना भी नहीं, न्याय और अधिकार चाहिये। यह हम सबका कर्तव्य भी है और संवैधानिक जिम्मेदारी भी। प्रजातंत्र में कोई भी निर्णय सबसे चर्चा कर, सभी प्रभावित लोगों की सहमति और विपक्ष के साथ राय मशविरे के बाद ही लिया जाना चाहिए। उम्मीद है कि मोदी सरकार ने कम से कम भविष्य के लिए कुछ सीख ली होगी।’’

इससे पहले प्रियंका गांधी वाद्रा ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले को किसानों की जीत और सरकार के अहंकार की हार करार दिया। वाद्रा ने इस फैसले के समय पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया गया है। प्रियंका गांधी ने प्रश्न किया कि सरकार औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र का इंतजार क्यों कर रही है, और इसके लिए अध्यादेश क्यों नहीं ला रही है?'' वाद्रा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''चुनाव पूर्व का सर्वेक्षण आया है जिसमें उनको दिख रहा है कि परिस्थितियां ठीक नहीं हैं, तो अब वह चुनाव से पहले माफी मांगने आ गये हैं। देश भी ये समझ रहा है।’’ उन्होंने कहा, ''इस सरकार के नेताओं ने किसानों को क्या क्या नहीं बोला। आंदोलनजीवी, गुंडे, आतंकवादी, देशद्रोही, यह सब किसने कहा? तब प्रधानमंत्री जी चुप क्यों थे ? बल्कि उन्होंने ही आंदोलनजीवी शब्द बोला था।’’ 

प्रधानमंत्री की घोषणा के बावजूद किसानों के आंदोलन जारी रखने के फैसले पर उन्होंने कहा, "इस सरकार की मंशा पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। उनका रुख हर दिन बदलता रहता है। उन्हें पहले कानून वापस लेने चाहिए।" इस फैसले का श्रेय राजनीतिक दलों द्वारा लिये जाने के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता ने कहा, ''यह किसानों का उनके अधिकारों के लिए आंदोलन है, वे लड़ रहे थे और किसानों ने ही अपनी जान कुर्बान की थी। मुझे नहीं लगता कि किसी राजनीतिक दल द्वारा इसका श्रेय लेने का कोई प्रयास किया जाना चाहिए, हम सभी ने उनका समर्थन किया और उनके साथ खड़े रहे लेकिन श्रेय उन लोगों का है जो इसके लिए आंदोलन कर रहे थे।'' 

कांग्रेस नेता ने मांग की कि "यदि सरकार गंभीर है, तो विशेष रूप से लखीमपुर मामले में आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने माफी मांगी, लेकिन उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले करीब एक वर्ष से अधिक समय से विवादों में घिरे तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की शुक्रवार को घोषणा की। 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Politics से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत