पणजी: गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा को आज तगड़ा झटका लगा, जहां कुल 40 सीटों में इसे सिर्फ 13 सीटें मिली है, जबकि 17 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। वहीं, आप का खाता तक नहीं खुल सका। महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी), गोवा फारवर्ड पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने तीन-तीन सीटें जीती हैं जबकि राकांपा को एक सीट मिली है। बहुमत के लिए 21 विधायक चाहिए।
मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर को मांद्रे में शिकस्त का सामना करना पड़ा। अपनी पार्टी के साधारण बहुमत हासिल करने से बहुत पीछे रह जाने के बाद उन्होंने राज्यपाल मृदुला सिन्हा को अपना इस्तीफा सौंपा। मौजूदा सदन में कांग्रेस के पास सात सीटें थी लेकिन इसने अपनी सीटों की संख्या बढ़ा कर अब 17 कर ली है। इसके अलावा पार्टी समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत भी सुनिश्चित की।
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कांग्रेस के चार पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, प्रतापसिंह राणे, रवि नाइक और लुइझो फालेरियो विजेता बन कर उभरे हैं। पारसेकर की करारी हार के अलावा भाजपा के छह मंत्री भी हारे हैं। पारसेकर 7,000 से अधिक वोटों से हारे हैं। इस चुनाव नतीजे के चलते नव गठित गोवा फारवर्ड पार्टी और एमजीपी जैसी छोटी पार्टियां नयी सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाएंगी।
भाजपा ने पिछले चुनाव में 21 सीटें जीती थी। इस बार पार्टी के खराब प्रदर्शन को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के लिए एक झटके तौर पर देखा जा रहा है जिन्होंने आगे बढ़़ कर प्रचार का नेतृत्व किया था। यह कयास भी लगाए जा रहे थे कि वह मुख्यमंत्री के तौर पर अपने गृह राज्य में वापसी कर सकते हैं।
फरवरी में हुए चुनाव से ठीक पहले भाजपा नीत गठबंधन से समर्थन वापस लेने वाली एमजीपी ने शिवसेना और गोवा सुरक्षा मंच (जीएसएम) के साथ गठजोड़ किया था, जिसे आरएसएस के बागी नेता सुभाष वेलिंगकर ने बनाया था। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते यह (कांग्रेस) अगली सरकार बनाने के लिए दावा पेश करेगी और यह निर्दलीय एवं अन्य से समर्थन हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।
नतीजों के आने के कुछ देर बाद पर्रिकर ने कहा कि भाजपा सरकार बनाने की दौड़ में बनी रहेगी। उन्होंने कहा, खंडित जनादेश की स्थिति में हर कोई सरकार बनाने की कोशिश करेगा। हम भी वहां हैं। यदि भाजपा कोर ग्रुप की तरह काम करेगी और छोटी पार्टियों को एकजुट करेगी तो हम एक स्थायी सरकार दे सकते हैं। सत्ता विरोधी लहर के अलावा यह भी समझा जा रहा है कि वेलिंगकर के जीएसएम बनाने और सत्तारूढ़ गठबंधन से एमजीपी के बाहर होने ने भाजपा की हार में भूमिका निभाई।