केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पर चल रही बहस का जवाब दिया। अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि महिला आरक्षण पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई है। लेकिन, अगर हम गौर से देखें तो INDI गठबंधन के सभी सदस्यों ने 'अगर-मगर' का इस्तेमाल करके इसका विरोध किया है।
'विपक्ष SC/ST सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहा'
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस चर्चा को अगर बारीकी से कोई सुनेगा तो महिला आरक्षण के लिए जो संविधान संशोधन है, उसका किसी ने विरोध नहीं किया है। सभी ने कहा है कि यह संविधान संशोधन जो आया है, उसका हम स्वागत करते हैं। लेकिन इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है। विपक्ष विधेयक के क्रियान्वयन के तरीके का नहीं, महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है। हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है। परिसीमन से ही SC और ST जिसकी संख्या बढ़ती है, उसकी सीटें बढ़ने का भी प्रावधान है। एक प्रकार से जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वह SC और ST सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं। अमित शाह ने आगे कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाले वास्तव में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।
अमित शाह ने बताया बिल लाने का मकसद
अमित शाह ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीनों बिल को लाने का मकसद बताया। उन्होंने बताया कि इन बिल को लाने का पहला मकसद है- महिला सशक्तिकरण करने वाले संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू कर 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। और दूसरा मकसद है- एक व्यक्ति-एक वोट-एक मूल्य... यह सिद्धांत जो हमारे संविधान के मूल में है, जिसे संविधान सभा ने तय किया था, उस संविधान की स्पिरिट को लागू किया जाए।
परिसीमन अभी क्यों लाया जाए?
कई सारे सदस्यों ने अनेक प्रकार की आशंकाएं व्यक्त कीं कि परिसीमन अभी क्यों लाया जाए? तो मैं बता दूं कि जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया है, उसमें जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। अब ये कहते हैं कि बिल लाते समय ऐसा जिक्र क्यों किया गया? यह हमने नहीं किया। 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तब वे इसे फ्रीज करके गई थी, वह फ्रीज की गई सीटों की संख्या उठाते हैं तभी नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन होता है इसलिए हम इसे लेकर आए।
45 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जानकारी दी है कि देश में ऐसी ऐसी 127 लोकसभा सीटें हैं जहां निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या 20 लाख से ज्यादा है। कुछ जगहों पर तो 45 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है, और कुछ स्थानों पर छह लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है। इसके कारण प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्येक वोट का मूल्य समान नहीं है। अमित शाह ने विपक्ष को कहा कि मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि अगर वे परिसीमन के लिए हमारा सपोर्ट करते हैं तो हर निर्वाचन क्षेत्र में हर वोट का मूल्य एक समान होगा।
56.79 करोड़ की आबादी के हिसाब से कुल सांसद
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि सबसे पहले 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की सरकार ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया गया। 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी गई। इंदिरा जी प्रधानमंत्री थीं, उन्होंने कानून लाकर परिसीमन पर रोक लगाई, लेकिन आज ये कितने शक्तिशाली हैं कि विपक्ष में बैठकर परिसीमन पर रोक लगाना चाह रहे हैं। उस वक्त भी कांग्रेस ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी कांग्रेस ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित कर रही है। 1976 में इस देश की आबादी 56.79 करोड़ थी, और आज 140 करोड़ है। 56.79 करोड़ की आबादी में जितने सांसद थे, उतने ही 140 करोड़ की आबादी में भी रखना, ये इनका (विपक्ष) मानना है।
विधेयक पर 56 महिलाओं ने अपनी बात रखी
अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि "इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक पर सदन में लगभग 133 सदस्यों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 56 महिलाएं थीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड साबित होगा।"
गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर हम 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण लागू करते हैं, तो तमिलनाडु में 13 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी और 26 सीटें खुली रहेंगी। अगर हम 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करते हैं, तो संसदीय सीटों की संख्या 6 कम हो जाएगी। लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। हम हर राज्य के लिए सीटों में 50% की वृद्धि कर रहे हैं।
जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई?
अमित शाह ने कहा कि कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई। सबको मालूम है कि 2021 में जनगणना होनी थी और 2021 में ही इस सदी की सबसे बड़ी महामारी, कोविड का संकट आया, जिसके कारण जनगणना संभव नहीं हो पाई। कोविड संकट समाप्त होने के बाद देश को इससे उभरने में काफी समय लगा। जब 2024 में जनगणना की शुरुआत हुई, तब कुछ दलों ने उचित ही मांग की कि जाति के आधार पर जनगणना करनी चाहिए। सरकार ने अनेक दलों, जाति समूहों, राज्य सरकारों और कई सामाजिक समूहों के साथ चर्चा की और निर्णय किया कि हम जाति जनगणना कराएंगे। और इस निर्णय के बाद अब जनगणना हो रही है।
'जाति जनगणना शुरू हो चुकी है'
अमित शाह ने कहा कि जब से यह बिल आया है, तब से विपक्ष ने कुछ भ्रांतियां फैलाना शुरू किया है कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार संविधान संशोधन लेकर आई है। मैं बताना चाहता हूं कि तीन माह पहले ही हम जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुके हैं, टालने का सवाल ही नहीं है। जाति जनगणना शुरू हो चुकी है, उसका पहला चरण चल रहा है। मैं 140 करोड़ जनता को स्पष्ट करना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी जी की कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का जो निर्णय लिया है, वह कैबिनेट प्रस्ताव में 2026 की जनगणना को जाति के साथ कराने का निर्णय है।
'विपक्ष उत्तर-दक्षिण का भेद कराना चाह रहा'
कल मुझे थोड़ा भय लगा कि दक्षिण बनाम उत्तर का नैरेटिव नहीं होना चाहिए। मैं स्पष्ट कर देता हूं कि दक्षिण के राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है, जितना उत्तर के राज्यों का है। इस देश को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव से अलग नहीं करना चाहिए। हम जब शपथ लेते हैं तो मन से लेते हैं। जो संविधान हाथ में लेकर शपथ लिए हैं, वे उत्तर-दक्षिण का भेद कराना चाह रहे हैं। यह हम नहीं होने देंगे।
'परिसीमन से किसी का कोई नुकसान नहीं होगा'
अमित शाह ने जानकारी देते हुए कहा कि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल, इन पांच राज्यों की 543 सीटों में वर्तमान संख्या 129 है, जिसका प्रतिशत 23.76 बनता है। अब वृद्धि के बाद जब इन पांचों राज्यों का आवंटन किया जाता है, तो सीटों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी। 816 में इसका प्रतिशत निकालेंगे तो 23.87 आएगा। पहले 23.76 प्रतिशत था और अब 23.87 होगा। किसी का कोई नुकसान नहीं होगा।
'सिर्फ महिला आरक्षण का विरोध नहीं हो रहा'
अमित शाह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है, हमने धारा 370 समाप्त की, उन्होंने विरोध किया, राम मंदिर बनाया, विरोध किया, CAA लाए, विरोध किया, तीन तलाक समाप्त किया, विरोध किया, GST लाए, विरोध किया, आयुष्मान भारत बनाया, विरोध किया, नया संसद भवन बनाया, विरोध किया, CDS बनाया, विरोध किया, नक्सलवाद खत्म किया, विरोध किया, एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। इन्होंने अच्छा-बुरा सोचे बिना नरेन्द्र मोदी जी जो कर रहे हैं, उसका विरोध करने का ठान लिया है।
'महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन'
अमित शाह ने कहा कि महिलाओं को प्रस्थापित करने के लिए, उन्हें संबल बनाने के लिए, उन्हें प्रतिनिधित्व देने के लिए, विधायी संस्थाओं में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए... जिसके विरोध का भी सामना करना पड़े, हम करेंगे, हम लड़ेंगे और महिलाओं को आरक्षण देकर रहेंगे। मैं समझता हूं कि अगर ये वोट नहीं देंगे तो महिला आरक्षण बिल गिर जाएगा, लेकिन देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है।
'नारे लगाने से पिछड़ा वर्ग आपको हितैषी नहीं मानेगा'
अमित शाह ने कहा कि मैं कांग्रेस से कहता हूं कि सिर्फ भाषण में नारे लगाने से देश का पिछड़ा वर्ग आपको हितैषी नहीं मानेगा। 1947 से 2014 तक आप ओबीसी का विरोध करते रहे। जब ओबीसी के बिना सत्ता नहीं मिलेगी, यह समझ आ गया, तब आज ओबीसी की माला जप रहे हो। यह दिखावटी प्रेम है, इस देश का पिछड़ा वर्ग भी जानता है और देश की पूरी जनता भी जानती है। और आज से देश की महिलाएं भी जानेंगी कि उनका अधिकार कांग्रेस पार्टी ने छीना।
संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं
अमित शाह ने कहा कि यहां कुछ सदस्यों ने भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। मैं यहां संविधान की नीतियों को स्पष्ट करना चाहता हूं। भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। इंडी अलायंस वाले तुष्टिकरण की राजनीति के कारण मुस्लिम आरक्षण की मांग खड़ी करना चाहते हैं और ये संविधान की बात करते हैं। कोई मुझे बता दे कि संविधान के किस अनुच्छेद में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान है।
'महिला आरक्षण 2029 से पहले होना चाहिए'
अमित शाह ने कहा कि मैं इस देश की मातृशक्ति से कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति में कांग्रेस पार्टी ने जो प्रस्ताव रखा है। वह एक सुनियोजित जाल है, जिससे महिला आरक्षण को फिर से 2029 से पहले लागू न होने दिया जाए। इसलिए ये जो कहते हैं कि हमारे राज्यों को समान भार होना चाहिए, मैं सहमत हूं। महिला आरक्षण 2029 से पहले होना चाहिए। 2029 के बाद ले जाने के लिए इनके षड्यंत्र को हम सफल नहीं होने देंगे।
'राहुल कम से कम अपनी बहन प्रियंका से तो सीखें'
लोकसभा में राहुल गांधी ने शुक्रवार को अमित शाह से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक हमला बोला। उन्होंने कायर सरेंडर जैसे शब्द कहे। इसपर अमित शाह ने उन्हें नसीहत दी। उन्होंने कहा कि राहुल कम से कम अपनी बहन प्रियंका से तो सीखें। अमित शाह ने विपक्ष पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि इंडी अलायंस परिसीमन का विरोध नहीं बल्कि मुख्य रूप से महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि डिलिमिटेशन 2029 से पहले पूरा नहीं किया जा सकता और 2027 तक जनगणना के आंकड़े नहीं आ सकते। अगर 2029 के चुनाव में महिलाओं को भागीदारी देनी है तो अभी ही आरक्षण बिल लागू करना पड़ेगा।
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