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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- चुनावी घोषणापत्र के वादे भ्रष्ट आचरण का हिस्सा नहीं

 Edited By: Shakti Singh
 Published : May 27, 2024 11:27 pm IST,  Updated : May 28, 2024 06:32 am IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक मतदाता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुनावी घोषणापत्र के वादे भ्रष्टाचार नहीं माने जा सकते। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी घोषणापत्र के वादों को चुनाव के नियमों के अनुसार भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं शामिल किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कर्नाटक के चमराजपेट लोकसभा क्षेत्र के एक मतदाता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता को आर्थिक लाभ पहुंचाने का वादा किया था और यह भ्रष्ट आचरण का हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा "याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार का अपने घोषणापत्र में जनता को बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ पहुंचाने की बात करना भ्रष्ट आचरण का हिस्सा है। यह मामले को बहुत खींचने वाली बात है और स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में हमें विस्तार से जाकर चर्चा करनी होती है। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है।"

शशांक ने लगाई थी याचिका

शशांक श्रीधर नाम के एक मतदाता ने कांग्रेस विधायक जमीर अहमद खान के खिलाफ याचिका लगाई थी। इसमें उसने कहा था कि कांग्रेस के घोषणापत्र की पांच बातें भ्रष्ट आचरण का हिस्सा हैं। अदालत ने कहा कि लोकप्रतिनिधि नियम की धारा 123 के तहत अगर कोई पार्टी यह बताती है कि सत्ता में आने पर वह क्या योजनाएं चलाएगी और लोगों को इससे कैसे फायदा होगा तो यह भ्रष्ट आचरण नहीं है। कांग्रेस के सभी पांच वादे समाजिक हित की योजनाएं थीं। वह आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाएं या नहीं।

भ्रष्ट आचरण नहीं कह सकते- कोर्ट

अगर दूसरी पार्टियां यह साबित करती हैं कि इन योजनाओं को लागू करने से राज्य दिवालिया हो जाएगा। तब यह राज्य सरकार की विफलता मानी जाएगी। इस स्थिति में इन्हें गलत योजना कहा जा सकता है, लेकिन इस स्थिति में भी इन्हें भ्रष्ट आचरण की संज्ञा नहीं दी जा सकती है।

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