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पेपर लीक कानून पर संसद में बहस, छात्र आंदोलन-सरकार के डैमेज कंट्रोल पर सियासत; Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा

 Reported By: Saurav Sharma @journosaurav
 Published : Jul 28, 2026 10:21 pm IST,  Updated : Jul 28, 2026 10:26 pm IST

'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' कार्यक्रम में एंटी पेपर लीक, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और संसद में विपक्ष के बयान पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के गेट ने अपने विचार भी रखे।

नई दिल्लीः पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार संसद में कानून को और कठोर बनाने का बिल लेकर आई है। इस बिल पर लोकसभा में चर्चा शुरू हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बिल पेश किया, जिसके बाद विपक्ष की ओर से प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष ने छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, पेपर लीक, पुलिस कार्रवाई और सरकार की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठाए। इन्हीं मामलों को लेकर 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' कार्यक्रम में चर्चा की गई। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।

सरकार ने सदन में रखा अपना पक्ष

चर्चा के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाएं केवल वर्तमान सरकार के दौरान नहीं हुईं, बल्कि 2009, 2010 और उसके बाद भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। सरकार का दावा है कि पहली बार इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कानून बनाया जा रहा है। हालांकि सत्ता पक्ष इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाने से बचता दिखाई दिया और छात्रों से जुड़े विषय पर सतर्क रणनीति अपनाता नजर आया।

सरकार की प्राथमिकता फिलहाल इस बिल को बिना बड़े विवाद के पारित कराना है। इसी वजह से गृह मंत्री के चर्चा में हस्तक्षेप करने की संभावना से भी इनकार किया गया। दूसरी ओर विपक्ष ने यह भी कहा कि अगर वह इस कानून के विरोध में संसद नहीं चलने देता तो यह संदेश जाता कि वह पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून का विरोध कर रहा है। इसलिए उसने चर्चा में भाग लेना उचित समझा।

प्रियंका गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

प्रियंका गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश का माहौल समझने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को वीडियो का एंगल बदलने के बजाय अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। वहीं डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का जिक्र करते हुए पुलिस कार्रवाई को बेहद कठोर बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बर्बर व्यवहार किया गया और समाजवादी पार्टी हमेशा युवाओं और छात्रों के साथ खड़ी रहेगी।

चर्चा में यह भी सामने आया कि शुरुआत में सरकार ने छात्र आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन आंदोलन के फैलने और जनसमर्थन बढ़ने के बाद सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, आंदोलनकारियों से संवाद और संसद में चर्चा शुरू होना सरकार के डैमेज कंट्रोल का हिस्सा माना जा रहा है।

बहस के दौरान यह भी कहा गया कि सरकार अब युवाओं तक अपनी बात बेहतर तरीके से पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी के भीतर भी इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि युवाओं की भाषा और उनके संवाद के तरीके को समझना होगा। इसी सोच के तहत युवा नेताओं को भी आगे लाने की कोशिश दिखाई दे रही है।

कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसकी प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि भविष्य में फिर पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं तो सरकार को और अधिक राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं विपक्ष भी आने वाले समय में युवाओं, किसानों और अन्य जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए है। ऐसे में संसद के भीतर कानून और संसद के बाहर राजनीति, दोनों मोर्चों पर मुकाबला जारी रहने की संभावना है।

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