जंतर-मतंर पर प्रदर्शन कर रहे नौजवानों को एक बार फिर से बातचीत का ऑफर दिया गया। सरकार खुले दिल से प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहती है। हालांकि, जंतर मंतर पर धरने की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार का बातचीत का प्रस्ताव ठुकरा दिया। CJP की तरफ से कहा गया कि सबसे पहले तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो, उसके बाद ही बात होगी। इसी विषय पर 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में हुई चर्चा में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।
छात्रों के प्रदर्शन और सियासी समीकरणों पर बड़ी चर्चा
'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में चर्चा की शुरुआत छात्रों के आंदोलन और सरकार की ओर से बातचीत की पहल से हुई। शो में बताया गया कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार की ओर से आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों को कई बार औपचारिक रूप से बातचीत का न्योता दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित कार्रवाई की बात कही है। सरकार का संदेश है कि छात्रों की सुविधा के अनुसार किसी भी विषय पर चर्चा के लिए वह तैयार है और इसे प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाया जाएगा।
बातचीत के स्थान पर बना गतिरोध
चर्चा में यह भी सामने आया कि बातचीत की इच्छा दोनों पक्ष जता रहे हैं, लेकिन स्थान को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। सरकार चाहती है कि प्रतिनिधि मंत्रालय या सरकारी कार्यालय में आएं, जबकि आंदोलनकारी जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर बातचीत की मांग कर रहे हैं। पैनलिस्टों का कहना था कि इसी कारण संवाद की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ पा रही है।
आंदोलन की दिशा और सरकार की रणनीति पर राय
चर्चा में शामिल मेहमानों ने कहा कि सरकार फिलहाल जल्दबाजी या दबाव में दिखाई नहीं दे रही है। उनका मानना था कि सरकार एक ओर आंदोलन को लेकर लगातार बातचीत का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाना चाहती है कि वह अपनी शर्तों और संस्थागत प्रक्रिया से समझौता नहीं करेगी। चर्चा में यह भी कहा गया कि सरकार का प्रयास छात्रों में यह संदेश देने का है कि पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर वह गंभीर है और आवश्यक कदम उठा रही है।
आंदोलन में बाहरी तत्वों और हिंसा पर उठे सवाल
बहस के दौरान कुछ मेहमानों ने आरोप लगाया कि आंदोलन में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं जिनका छात्र राजनीति से सीधा संबंध नहीं है। शाम के समय हिंसा, पुलिस पर हमले, मीडिया से बदसलूकी और अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई। वहीं कुछ वक्ताओं ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े आंदोलन में असामाजिक तत्व घुस सकते हैं और ऐसे लोगों को अलग करने की जिम्मेदारी आंदोलन के नेतृत्व की होती है।
विपक्ष की सक्रियता और मार्च की तैयारी
कार्यक्रम में राहुल गांधी के आवास पर इंडी अलायंस के नेताओं की बैठक का भी जिक्र हुआ। चर्चा के दौरान बताया गया कि बैठक के बाद विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी स्मृति तक कैंडल मार्च निकालने का फैसला किया। पैनलिस्ट के अनुसार कांग्रेस इस मुद्दे पर छात्रों के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहती है, जबकि कुछ मेहमानों ने इसे राजनीतिक रणनीति और विपक्ष के बीच नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा से भी जोड़कर देखा।
जनभावना पर टिकी आगे की दिशा
चर्चा के अंत में यह राय सामने आई कि आंदोलन की अगली दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि देशभर में इसे कितना जनसमर्थन मिलता है। कुछ मेहमानों का मानना था कि यदि आंदोलन का दायरा बढ़ता है तो सरकार अपने अगले कदम उसी के अनुसार तय करेगी। वहीं यह भी कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत सबसे बेहतर रास्ता है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को व्यावहारिक समाधान तलाशना होगा।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
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