नई दिल्लीः पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का आंदोलन अब नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। एक तरफ सरकार की ओर से बातचीत की पहल की गई है, तो दूसरी तरफ विपक्ष अपने-अपने तरीके से इस मुद्दे को उठा रहा है। इसी बीच सोनम वांगचुक की चिट्ठी ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है। चर्चा का केंद्र अब यही है कि क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकल सकता है। इन्हीं सब मामलों को लेकर 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' कार्यक्रम में चर्चा की गई। कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।
कॉफी पर कुरुक्षेत्र में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में इस पर चर्चा हुई कि सरकार की ओर से जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इसके बाद सोनम वांगचुक ने एक पत्र लिखकर बताया कि उन्हें दो अहम आश्वासन दिए गए हैं। पहला, जिन परिवारों के बच्चों ने कथित तौर पर नीट पेपर लीक से जुड़े घटनाक्रम के बाद आत्महत्या की है, उन्हें मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। दूसरा, संसद में इस पूरे मामले पर सार्थक चर्चा होगी और जवाबदेही तय की जाएगी, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर भी विचार करने की बात शामिल है।
सोनम वांगचुक ने अपनी चिट्ठी में यह भी आग्रह किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार इस बात का स्पष्ट भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं। इस पत्र को बातचीत की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राहुल गांधी को लेकर भी हुई चर्चा
दूसरी ओर राहुल गांधी ने भी अपनी तीन मांगें रखीं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले पर प्रधानमंत्री से माफी की मांग की। हालांकि संसद के भीतर विपक्षी दलों के रुख में अंतर भी देखने को मिला। कांग्रेस ने चर्चा से पहले इस्तीफे की मांग पर जोर दिया, जबकि समाजवादी पार्टी ने कहा कि सबसे पहले इस मुद्दे पर चर्चा होना जरूरी है।
चर्चा में यह भी कहा गया कि यदि संसद में बहस होती है तो सरकार अपनी ओर से पूरे घटनाक्रम का पक्ष रखेगी। इसमें यह बताया जाएगा कि पेपर लीक सामने आने के बाद क्या-क्या कदम उठाए गए और किन आधारों पर निर्णय लिए गए। मुआवजे के मामले में भी स्थानीय प्रशासन की जांच और रिपोर्ट के आधार पर फैसला होने की बात कही गई।
सोनम वांगचुक के मुद्दे पर हुई चर्चा
बहस के दौरान आंदोलन की अगुवाई को लेकर भी सवाल उठे। यह कहा गया कि इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा सोनम वांगचुक हैं और यदि सरकार उन्हें बातचीत के जरिए मना लेती है तो आंदोलन की खत्म हो सकता है। वहीं दूसरी ओर कुछ वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन में राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भूमिका है और यही कारण है कि बातचीत के बावजूद गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल भी गुरुग्राम के अस्पताल पहुंचा, जहां सोनम वांगचुक भर्ती हैं। हालांकि उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल के बाहर धरना शुरू कर दिया। उल्लेखनीय बात यह रही कि इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस शामिल नहीं थी, जिससे विपक्ष के भीतर भी अलग-अलग रणनीति की चर्चा तेज हो गई।
कुल मिलाकर, फिलहाल पूरा मामला बातचीत, राजनीतिक रणनीति और संसद में संभावित बहस के बीच संतुलन तलाशता नजर आ रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या यह विवाद आगे और राजनीतिक रूप लेता है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
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