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क्या 2029 में हो सकता है 'एक देश-एक चुनाव'? JPC की बैठक में प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेता थे मौजूद

 Written By: Subhash Kumar
 Published : Aug 24, 2026 03:27 pm IST,  Updated : Aug 24, 2026 04:07 pm IST

एक देश-एक चुनाव को लेकर सोमवार को JPC की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विपक्षी दलों के भी कई नेताओं ने हिस्सा लिया जिनमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदबंरम भी शामिल हैं।

one nation one election- India TV Hindi
एक देश-एक चुनाव। Image Source : INDIA TV

एक देश-एक चुनाव यानी वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। 129वें संविधान संशोधन बिल पर JPC का मंथन जारी है। सोमवार को भी JPC की बड़ी बैठक हुई है जिसमें JPC के अध्यक्ष पीपी चौधरी के अलावा JPC की मेंबर और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर पी. चिदबंरम ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा TMC सांसद सागरिका घोष, NCP (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले भी बैठक शामिल हुईं। बता दें कि विपक्षी दल वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध कर रहे हैं। बैठक के बाद JPC चेयरमैन पीपी चौधरी ने कहा है कि ज्यादातर स्टेक होल्डर्स एक साथ चुनाव के पक्ष में हैं। पीपी चौधरी ने कहा कि पी. चिदंबरम ने भी बैठक में अपनी पार्टी का स्टैंड रखा।

कब तक लागू हो सकता है वन नेशन वन इलेक्शन?

इस बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक, कहा जा रहा है कि वन नेशन वन इलेक्शन 2034 की जगह 2029 में ही लागू हो सकता है। यानी 2029 में ही लोकसभा के साथ साथ राज्यों के चुनाव भी एक साथ हो सकते हैं। इसके लिए वन नेशन वन इलेक्शन के लिए बनी JPC कमेटी के चेयरमैन पीपी चौधरी का कहना है कि अब तक जितने भी स्टेक होल्डर से बात हुई है उसमें 99 प्रतिशत लोग वन नेशन-वन इलेक्शन चाहते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अगर इच्छाशक्ति हो तो इसे 2029 में लागू किया जा सकता है।

क्या भारत में होते थे एक देश-एक चुनाव?

दरअसल, आजादी के बाद लोकसभा और राज्यों के विधानसभाओं के चुनाव भी एक साथ होते थे। चाहे 1952 का चुनाव हो या 1957 का, 1962 का लोकसभा चुनाव भी विधानसभाओं के साथ हुआ। 1967 का चुनाव भी विधानसभाओं के साथ हुआ। लेकिन 1967 के बाद कुछ राज्यों की विधानसभाएं भंग कर दी गईं और वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। 1972 का आम चुनाव भी समय से पहले कराए गए, जिससे एक साथ चुनाव कराने का चक्र टूट गया। अब कहा जा रहा है कि 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी राज्यों के विधानसभा का भी चुनाव कराया जाएगा।

वन नेशन-वन इलेक्शन के पीछे क्या तर्क है?

दरअसल, वन नेशन-वन इलेक्शन के समर्थकों का कहना है कि देश के ग्रोथ इंजन को रफ्तार देने के लिए वन नेशन-वन इलेक्शन जरूरी है। बार-बार चुनाव होने से देश की विकास रुकती है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। क्योंकि बार-बार चुनाव होने से सरकारी स्कूल के टीचर्स वोटर लिस्ट बनाने से लेकर चुनाव कराने तक के दूसरे काम में व्यस्त हो जाते हैं। इसलिए वन नेशन-वन इलेक्शन की बात की जा रही है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सोमवार को बार-बार होने वाले चुनावों को विकास में बाधा बताया है।

विपक्ष विरोध में क्या तर्क दे रहा?

  • 5 साल पर चुनाव कराना  संवैधानिक बाध्यता
  • अगर कोई सरकार 2 साल में गिर गई तो क्या होगा?
  • सरकार गिरने पर अगले चुनाव तक राष्ट्रपति शासन लगाना ठीक नहीं
  •  राज्य का चुनाव केवल 3 साल के लिए कराना भी गलत

वन नेशन वन इलेक्शन से क्या-क्या फायदे?

  • बार-बार चुनाव से राहत मिलेगी
  • चुनावी खर्चे में कमी आएगी
  • विकास की  रफ्तार बढ़ेगी
  • GDP ग्रोथ 1.5% बढ़ जाएगा
  • महंगाई दर में आधा फीसदी (-0.50%) की कमी आएगी
  • प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ेगी-सरकारी योजनाएं समय से लागू होंगी

राज्यों के विधानसभा कार्यकाल पर क्या फर्क पड़ेगा?

  • अगर 2029 में वन नेशन वन इलेक्शन होता है तो 9 ऐसे राज्य हैं जहां 1 साल बाद ही चुनाव करवाना होगा। क्योंकि देश के 8 राज्य मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में 5 साल यानि 2033 तक विधानसभा का कार्यकाल होगा लेकिन 2029 में चुनाव होते हैं तो 4 साल पहले विधानसभा का विघटन करना होगा।
  • देश में 7 राज्य ऐसे हैं जहां अगले साल यानी 2027 में चुनाव है जिसमें उत्तर प्रदेश, उतराखंड, गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश शामिल है। इन राज्यों के विधानसभा का कार्यकाल 2032 तक होगा। अगर 2029 में ONOE होता है तो 3 साल पहले यहां चुनाव कराने होंगे।
  • देश में 5 राज्य ऐसे हैं जहां 2026 में विधानसभा चुनाव हुए हैं जिसका कार्यकाल 2031 तक है। अगर 2029 में वन नेशन वन इलेक्शन हुआ तो तमिलनाडु, केरलम, प. बंगाल, असम और पुडुचेरी में 2 साल पहले विधानसभा चुनाव कराने होंगे। इसी तरह, दिल्ली और बिहार में 2025 में चुनाव हुए थे। इसलिए इसकी विधानसभा का कार्यकाल 2030 तक है। ऐसे में यहां 1 साल पहले चुनाव कराने होंगे।
  • देश में 8 राज्य ऐसे हैं जहां 2029 में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में लोकसभा चुनाव के ठीक बाद चुनाव होते हैं। वहीं, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अरुणाचल में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव होते हैं। ऐसे में इन 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

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