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पीएम मोदी ने 'Gen Z' को लेकर दिया बड़ा बयान, वीर बाल दिवस पर 4 साहिबजादों को किया याद

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Dec 26, 2025 09:49 pm IST,  Updated : Dec 26, 2025 09:49 pm IST

वीर बाल दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने चारों साहिबजादों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में अत्याचार के खिलाफ अदम्य साहस दिखाया। पीएम ने Gen Z और Gen Alpha पर भरोसा जताते हुए कहा कि यही पीढ़ी भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी।

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वीर बाल दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते पीएम मोदी। Image Source : X.COM/NARENDRAMODI

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान क्रूर मुगल शासन के खिलाफ भारत के अदम्य साहस, शौर्य और वीरता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वीर बाल दिवस के मौके पर साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश उन वीर सपूतों को याद कर रहा है जो भारत के अदम्य साहस, वीरता और शौर्य के शिखर का प्रतिनिधित्व करते हैं। पीएम मोदी ने इस मौके पर 'Gen Z' और 'जेन अल्फा' को लेकर भी बड़ा बयान दिया।

'वीर साहिबजादों ने उम्र और अवस्था की सीमाओं को तोड़ दिया'

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज हम अपने राष्ट्र के गौरव, वीर साहिबजादों को याद करते हैं। वे भारत के अदम्य साहस और शौर्य के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक हैं। उन वीर साहिबजादों ने उम्र और अवस्था की सीमाओं को तोड़ दिया। वे क्रूर मुगल शासन के खिलाफ चट्टान की तरह ऐसे खड़े रहे कि मजहबी कट्टरता और आतंक का वजूद ही हिल गया। जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत हो, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणाएं विरासत में मिली हों, वह राष्ट्र क्या कुछ नहीं कर सकता है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों की उम्र उस समय काफी कम थी, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

'औरंगजेब भूल गया था कि हमारे गुरु साधारण मनुष्य नहीं थे'

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘औरंगजेब जानता था कि यदि वह भारत की जनता में भय उत्पन्न करना चाहता है और उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले भारतीयों का मनोबल तोड़ना होगा। इसीलिए उसने साहिबजादों को अपना निशाना बनाया। लेकिन औरंगजेब और उसके सिपहसालार यह भूल गए थे कि हमारे गुरु साधारण मनुष्य नहीं थे। वे तपस्या और त्याग के साक्षात अवतार थे।’ मोदी ने कहा कि माता गुजरी जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और चारों साहिबजादों का साहस और आदर्श प्रत्येक भारतीय को शक्ति प्रदान करते रहते हैं।

'कम उम्र में ही सबसे बड़ी सत्ता से टकरा गए थे चारों साहिबजादे'

पीएम मोदी ने कहा, ‘साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी को बहुत कम उम्र में ही उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा था। यह संघर्ष महज सत्ता के लिए नहीं था, बल्कि भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच टकराव था। यह सत्य और असत्य की लड़ाई थी।’ प्रधानमंत्री ने श्री गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर 9 जनवरी 2022 को घोषणा की थी कि उनके पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिनका अद्वितीय बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

'गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हासिल करनी ही होगी'

बता दें कि वीर बाल दिवस के मौके पर भारत सरकार देशभर में सहभागितापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य नागरिकों को साहिबजादों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से रूबरू कराना तथा भारत के इतिहास के इन युवा नायकों के अदम्य साहस, त्याग और वीरता का सम्मान करना तथा उन्हें स्मरण करना है। पीएम मोदी ने कहा कि देश ने यह संकल्प लिया है कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हासिल करनी ही होगी और भारतीयों के बलिदानों, जन-वीरता की स्मृतियों को दबाया नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, ‘अब देश के नायकों और नायिकाओं को हाशिये पर नहीं धकेला जाएगा, इसलिए हम ‘वीर बाल दिवस’ पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।’

'बलिदानों और वीरता की स्मृतियों को अब दबाया नहीं जाएगा'

पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि साहिबजादों के बलिदान की गाथा हर नागरिक की जुबान पर होनी चाहिए थी लेकिन दुर्भाग्य से, आजादी के बाद भी औपनिवेशिक मानसिकता हावी रही। उन्होंने कहा कि इस मानसिकता का बीज 1835 में ब्रिटिश राजनेता मैकाले ने बोया था और आजादी के बाद भी इसे मिटाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि इसके कारण दशकों तक ऐसे सत्यों को दबाने के प्रयास किए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अब गुलामी की मानसिकता से खुद को मुक्त करने का संकल्प ले लिया है और घोषणा की है कि भारतीय बलिदानों और वीरता की स्मृतियों को अब दबाया नहीं जाएगा और देश के नायकों और नायिकाओं को अब हाशिये पर नहीं रखा जाएगा।

'2035 में मैकाले की साजिश के 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे'

पीएम मोदी ने कहा कि 2035 में ‘मैकाले की साजिश’ के 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे और शेष 10 वर्षों में भारत गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति प्राप्‍त कर लेगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि एक बार जब देश इस मानसिकता से मुक्त हो जाएगा, तो वह स्वदेशी परंपराओं पर अधिक गर्व करेगा और आत्मनिर्भरता के पथ पर और आगे बढ़ेगा। बता दें कि ब्रिटिश राजनीतिज्ञ एवं इतिहासकार थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने 19वीं शताब्दी में भारत में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली की शुरुआत की थी। मैकाले के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने भारत की संस्कृति को ‘नष्ट’ करने और ब्रिटिश साम्राज्य की सेवा करने के ‘दुर्भावनापूर्ण’ उद्देश्य से अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को तैयार किया था।

'आपकी पीढ़ी भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी'

प्रधानमंत्री ने ‘जेनरेशन जेड’ (1997 और 2012 के बीच जन्मे लोग) और ‘जेनरेशन अल्फा’ (2010 और 2025 के बीच जन्मे लोग) की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे देश को विकसित भारत बनाने के लक्ष्य तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘Gen Z, जेन अल्फा, आपकी पीढ़ी भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। मैं ‘Gen Z’ की क्षमता देखता हूं, मैं आपका आत्मविश्वास देखता हूं, मैं इसे समझता हूं, और इसलिए मुझे आप पर पूरा भरोसा है।’ पीएम मोदी ने कहा कि हर साल, देश के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) से सम्मानित किया जाता है और इस वर्ष भी देशभर से 20 बच्चों को यह पुरस्कार मिला है।

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