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Explainer: भाई की हत्या, पिता को किया कैद, इस शहंशाह से आज भी लोग क्यों करते हैं नफरत?

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : Aug 19, 2025 03:09 pm IST,  Updated : Aug 20, 2025 09:54 pm IST

मुगल शासक, जिसने अपने भाई की हत्या की और अपने पिता को ही कैद कर लिया था। उसने अपने साम्राज्य का विस्ता किया लेकिन कुछ ऐसे काम किए जिससे आज भी लोग उससे नफरत करते हैं। जानिए कौन था वह शहंशाह?

मुगल शासक औरंगजेब - India TV Hindi
मुगल शासक औरंगजेब

हिंदुस्तान का एक ऐसा शहंशाह, जिसकी मौत को आज 300 से ज़्यादा साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद वह आज भी देश की राजनीति में हलचल मचाता रहता है। उस शहंशाह का नाम है औरंगजेब आलमगीर, जिसे आज भी नफरत की निगाहों से देखा जाता है और उसकी यादें देश भर में गाहे बगाहे चर्चा का विषय बनी रहती हैं। मुग़ल वंश के छठे शहंशाह रहे औरंगजेब आलमगीर, जिसे लोग एक अत्याचारी शहंशाह मानते हैं, जिसने महिलाओं पर अत्याचार किए, हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया, जबरन धर्म परिवर्तन कराया और गैर मुस्लिम लोगों पर अत्याचार किया।


औरंगजेब का शासनकाल

1526 में बाबर ने मुगल साम्राज्य की स्थापना की और उस समय अपने चरम पर यह साम्राज्य मध्य एशिया में आधुनिक अफ़गानिस्तान से लेकर पूर्व में बांग्लादेश तक फैला हुआ था।1857 में अंग्रेजों के द्वारा अंतिम सम्राट बहादुर शाह की हार के साथ ही यह साम्राज्य समाप्त हो गया। उससे पहले औरंगजेब अकबर के बाद सबसे अधिक समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था, उसके शासन की खास बात ये थी कि उसने मुग़ल साम्राज्य को उस वक्त शिखर पर पहुंचाया था। 

मुगल काल का सबसे विवादित शहंशाह

मुगल काल के सबसे प्रसिद्ध राजाओं, हुमायूं, अकबर, जहांगीर और शाहजहां, ने धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा दिया और ताजमहल, दिल्ली के लाल किले जैसे प्रतिष्ठित स्थलों का निर्माण करके भारतीय संस्कृति पर गहरा प्रभाव डाला, लेकिन औरंगज़ेब को एक धार्मिक कट्टरपंथी और उसके जटिल चरित्र के रूप में माना जाता है जिसके दोहरे व्यक्तित्व का था। अच्छा भी और बुरा भी, उसे संत और शैतान भी कहा जाता है।औरंगजेब ने मुगल सिंहासन पर अपना अधिकार स्थापित करने के साथ ही लोगों के मन में प्रशंसा और घृणा दोनों पैदा किया।

पिता को किया कैद, भाई को दी मौत

औरंगजेब के प्रति घृणा और नफरत इसलिए भी कि, "उसने अपने पिता को कैद कर लिया था और अपने भाइयों की जान ले ली थी और जिस तरह से वह सिंहासन पर बैठा, उसके कारण उससे सिर्फ घृणा की जा सकती है। बावजूद इसके, उसने अपनी व्यक्तिगत सादगी और धर्मनिष्ठा, अपनी बेजोड़ सैन्य शक्ति, जिसके कारण मुगल साम्राज्य का विस्तार हुआ, अपनी राजनीतिक कुशाग्रता, प्रशासनिक दक्षता और न्याय एवं निष्पक्षता की प्रतिष्ठा के कारण प्रशंसा और वफादारी भी अर्जित की थी। लेकिन अपने स्वभाव की वजह से वह लोगों की नफरत का भागी बना।"

1618 में हुआ था जन्म

1618 में शाहजहां और उनकी पत्नी मुमताज़ महल के यहां जन्मे आलमगीर औरंगजेब को इतिहासकार एक धर्मनिष्ठ, गंभीर शख्स के रूप में वर्णित करते हैं, जिसमें बचपन से ही नेतृत्व के प्रारंभिक लक्षण दिखाए दिए थे। 18 वर्ष की आयु से ही उसने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और सभी भाइयों में उसने स्वयं को एक योग्य सेनापति के रूप में स्थापित किया। उसके पिता के अधीन मुग़ल साम्राज्य का गौरव अपने चरम पर पहुंच गया था, और औरंगज़ेब ने उस समय अपने पिता शाहजहां के सिंहासन पर कब्ज़ा करने के लिए कई तरह की जुगत लगाई थी।

जब 1657 में शाहजहां बीमार पड़े, तो औरंगज़ेब और उनके तीन भाई-बहनों के बीच उत्तराधिकार के लिए विवाद छिड़ा, जिसमें उत्तराधिकारी के रूप में उसका सामना अपने सबसे बड़े भाई, दारा शिकोह से हुआ। दारा शिकोह जो एक  हिंदू-मुस्लिम संस्कृति का समर्थक था, औरंगजेब को नहीं पसंद था। औरंगज़ेब ने 1658 में अपने बीमार पिता शाहजहां को कैद कर लिया और उसके अगले वर्ष अपने भाई दारा शिकोह को युद्ध में हराया और फिर उसे ज़ंजीरों में जकड़कर दिल्ली की सड़कों पर एक गंदे हाथी पर बैठाकर जबरन घुमाया।

दारा शिकोह को दी ऐसी मौत

शाहजहां का लाड़ला बेटा दारा शिकोह अपने भाई की वजह से अपनी सजा के रूप में की गई यात्रा के दौरान दागदार, बेहद मोटे कपड़े की पोशाक पहने हुए था, उसके सिर पर गहरे रंग की मटमैली पगड़ी थी जैसी कि केवल सबसे गरीब लोग ही पहनते हैं। उसके शरीर पर ना राजकुमार की तरह पोशाक थी ना ही कोई आभूषण था। बाद में दारा शिकोह की हत्या कर दी गई। दारा शिकोह की हत्या के साथ ही औरंगज़ेब शहंशाह बन गया था, और उसके नेतृत्व में मुग़ल साम्राज्य अपनी सबसे बड़ी भौगोलिक सीमा तक पहुंच गया था। 

हिंदुओं से करता था नफरत

भारत के अलीगढ़ विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफ़ेसर नदीम रेजावी के अनुसार, लगभग 1679 तक, मंदिरों को तोड़े जाने या गैर-मुस्लिम नागरिकों पर "जज़िया" कर लगाने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। रेजावी ने बताया कि कैसे कुछ हिंदू उसकी सरकार में उच्च पद पर भी थे, तबतक औरंगज़ेब "बिल्कुल अपने पूर्वजों की तरह" व्यवहार करता था। हालांकि, 1680 में औरंगजेब का स्वभाव बदल चुका था वह क्रूर बन गया था और उसने धार्मिक असहिष्णुता का एक ऐसा रूप अपना लिया जो आज भी लोगों के मन में उसकी नफरत को दर्शाता है।  

कट्टरपंथी शासक था औरंगजेब

इस कट्टरपंथी शासक ने अपने हिंदू राजनेताओं को उनके पद से हटा दिया, मित्रों को शत्रु बना लिया और दक्कन में एक लंबा और घमासान युद्ध छेड़ दिया, जिसमें मराठों का हिंसक दमन भी शामिल था।  उसने सिखों के विरुद्ध भी युद्ध छेड़ा, सिख धर्म के नौवें गुरु तेग बहादुर को मृत्युदंड दिया, जिसके कारण औरंगज़ेब आज भी कई सिखों के बीच घृणा का पात्र है। उसने सबसे प्रसिद्ध मराठा राजा, छत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी की हत्या कर दी थी।

महाराष्ट्र का वह ज़िला जहां इस क्रूर और लोगों की नफरत की मिसाल रहे इस शहंशाह को दफनाया गया है, जिसे कभी औरंगाबाद के नाम से जाना जाता था, उसका का नाम अब बदल दिया गया है और उसकी मौत के 300 साल बाद आज भी औरंगजेब को घृणा और नफरत के भाव से देखा जाता है। इतिहास में उसका नाम ऐसे शासक के रूप में लिया जाता है जो काफी दुर्दांत था, क्रूर था, बुरा था। 

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