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33 साल पहले ब्रह्मलीन हुए स्वामी चिन्मयानंद ने की PM मोदी से बात, जानें कैसे हुआ ये कमाल

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Oct 23, 2026 05:55 pm IST,  Updated : Oct 23, 2026 05:55 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय अमृत महोत्सव में 33 साल पहले ब्रह्मलीन हुए स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने 1993 की मुलाकात याद की, आशीर्वाद मांगा और होलोबॉट तकनीक के अनुभव को भावुक बताया।

Swami Chinmayananda Hologram, Chinmaya Amrit Mahotsav- India TV Hindi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वामी चिन्मयानंद की होलोग्राफिक इमेज। Image Source : YOUTUBE/@NARENDRAMODI

Highlights

  • 1993 की मुलाकात याद कर पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार से मांगा आशीर्वाद।
  • होलोग्राफिक अवतार ने कहा, भारत तुम्हारे साथ है नरेंद्र, श्रीखंड का प्रसाद भी जरूर खाना।
  • स्वामी चिन्मयानंद के डिजिटल अवतार ने पीएम मोदी को आशीर्वाद देते हुए कहा, भारत तुम्हारे साथ है।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में एक अनोखा अनुभव साझा किया। यहां उन्होंने 33 साल पहले ब्रह्मलीन हो चुके आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार यानी होलोबॉट से बातचीत की। इस तकनीक के जरिए ऐसा लगा, मानो स्वामी चिन्मयानंद स्वयं प्रधानमंत्री के सामने मौजूद हों और उनसे बात कर रहे हों। इस दौरान पीएम मोदी ने 1993 में स्वामी जी से हुई अपनी मुलाकात को याद किया और उनसे अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए आशीर्वाद मांगा।

बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने क्या कहा?

स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पुराने अनुभव को याद किया। उन्होंने कहा,

'मेरा सौभाग्य था कि मैं आपसे मिला था, और आज मैं चाहता हूं कि आप मुझे उन कार्यों के लिए आशीर्वाद दें, जिन्हें मैं पूरा करना चाहता हूं।'

पीएम मोदी ने इस बातचीत को एक अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए संतों का आशीर्वाद है। प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि चिन्मय विचार का प्रतिनिधित्व करता है।

अवतार ने 1993 की मुलाकात को किया याद

स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार ने जवाब में 1993 की मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा,

'मुझे याद ही कि तुम शिकागो में होने वाली विश्व धर्म संसद की शताब्दी के आयोजन में मुझे आमंत्रित करने के लिए फरवरी 1993 में वडोदरा आए थे। मैंने उस समय तुमसे कहा था कि अब मेरी उम्र हो गई है। ये बूढ़ा और बीमार व्यक्ति इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं उठा सकता। अब हिंदू युवाओं को यह जिम्मेदारी संभालनी होगी। उसी वर्ष आयोजकों को भी मैंने यही बात लिखी थी।'

इस संवाद ने उस समय की यादों को फिर से सामने ला दिया, जब नरेंद्र मोदी स्वामी चिन्मयानंद को कार्यक्रम में आमंत्रित करने पहुंचे थे।

'...आज वही भारत का प्रधानमंत्री है'

स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार ने विचारों को आगे रखते हुए सनातन धर्म और युवाओं की जिम्मेदारी पर भी बात की। उन्होंने कहा,

'मैंने लिखा था कि हमारा सनातन धर्म सत्य के भव्य प्राचीन मंदिर की तरह है। उसकी नींव अब बहुत मजबूत है। लेकिन सदियों से उसकी उपेक्षा हुई। अब उसके गिरे हुए स्तंभों को फिर से खड़ा करना हमारा काम है। इसके लिए हमें हर जिले में प्रेरित युवाओं के छोटे-छोटे समूह चाहिए, जो पूरे उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ काम करें। हर समुदाय को अपने प्रयासों से आगे बढ़ना होगा। कोई भी यह सोचकर बैठा नहीं रह सकता कि एक बूढ़ा व्यक्ति आएगा और चमत्कार कर देगा। आज भारत को देखो, मुझे बहुत खुशी है कि 1993 में जिस व्यक्ति से मेरी मुलाकात हुई थी, आज वही भारत का प्रधानमंत्री है।'

पीएम मोदी को दिया आशीर्वाद

स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राफिक अवतार ने प्रधानमंत्री मोदी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मैं सभी ऋषियों का आर्शीवाद तुम्हारे लिए मानता हूं। होलोबॉट ने आगे कहा,

'प्रधानमंत्री जी याद रखना कि शिखर का व्यक्ति अकेला होता है। मैंने भक्तों से कहा है कि तुम्हें प्रसाद के रूप में श्रीखंड दें। उसे जरूर खाना। ये मत कहना कि आज तुम्हारा उपवास है। भारत तुम्हारे साथ है, नरेंद्र।'

पीएम मोदी ने इस अनुभव के लिए चिन्मय मिशन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह एक अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव है और यह हमारे संतों का मेरे लिए आशीर्वाद है।

'ऐसा लगा, मैं उसी समय में वापस चला गया हूं'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि होलोबॉट के साथ बातचीत के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ, जैसे वह पुराने समय में लौट गए हों। उन्होंने कहा, 'एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसी समय में वापस चला गया हूं। मेरे लिए यह एक भावुक पल है।' पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए चिन्मय मिशन को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद से उनकी पहली मुलाकात फरवरी या मार्च 1993 के आसपास हुई थी। उस समय वह उन्हें शिकागो में होने वाले विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने पहुंचे थे। स्वामी जी ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया था और कार्यक्रम में जाने की तैयारी की थी।

कार्यक्रम से कुछ हफ्ते पहले हुआ था स्वामी चिन्मयानंद का निधन

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद विश्व धर्म संसद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम में जाने को तैयार हो गए थे। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पीएम मोदी ने कहा, 'उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया और विश्व धर्म संसद के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए वहां जाने को तैयार हो गए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कार्यक्रम से कुछ हफ्ते पहले ही, 3 अगस्त को वे हमें छोड़कर चले गए।' इस तरह होलोबॉट के जरिए हुई बातचीत ने प्रधानमंत्री को स्वामी जी के साथ बिताए उस दौर की याद दिलाई, जब दोनों की मुलाकात हुई थी।

होलोग्राम की तकनीक आखिर कैसे काम करती है?

होलोग्राम तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की ऐसी त्रि-आयामी (3D) छवि दिखाई जा सकती है, जो सामने मौजूद होने का एहसास कराती है। इसके लिए विशेष कैमरों, प्रोजेक्शन सिस्टम और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। जब किसी व्यक्ति की पहले से रिकॉर्ड की गई आवाज, वीडियो और हाव-भाव को इस तकनीक के साथ जोड़ा जाता है, तो उसकी छवि बोलती और हिलती हुई दिखाई दे सकती है। अगर इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि AI से जोड़ दिया जाए, तो यह सवालों के जवाब भी दे सकती है। हालांकि, जवाब पहले से तैयार जानकारी या AI सिस्टम पर निर्भर करते हैं।

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