दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में दीवारों पर विवादित और आपत्तिजनक नारों को लिखे जाने की बात सामने आई है। यूनिवर्सिटी में कश्मीर और शरजील इमाम को 'फ्री' करने के नारे लिखे गए हैं। इसके साथ ही आरएसएस, एबीवीपी और वीसी के खिलाफ भी नारे लिखे गए हैं। दीवारों पर लिखे गए इन नारों के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इन नारों को लेकर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन की प्रतिक्रिया इस पर सामने नहीं आई है।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की घटना पर विश्वविद्यालय ने आधिकारिक बयान भी जारी किया है। विश्वविद्यालय ने कहा- "जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में आपत्तिजनक ग्रैफिटी (दीवारों पर लिखे गए आपत्तिजनक संदेश) मिलने की घटना की विश्वविद्यालय कड़ी निंदा करता है। विश्वविद्यालय इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और ये संस्थान के मूल्यों एवं सिद्धांतों को प्रतिबिंबित नहीं करतीं। घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लागू नियमों और विनियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और जिम्मेदार शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।"
जामिया में प्रदर्शन कर रहे छात्र
आपको बता दें कि बीते 12 अक्टूबर से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र, छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल और धरना कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में छात्र संघ को 2006 में भंग कर दिया गया था। छात्रों की मांग है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव का कार्यक्रम जारी किया जाए। हाल ही में जामिया प्रशासन द्वारा इस मामले में एक समिति का गठन किया गया था।
UAPA के तहत गिरफ्तार हुआ था शरजील इमाम
आपको बता दें कि शरजील इमाम को दिल्ली में साल 2020 के फरवरी महीने में हुए दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल होने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली में हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। दंगों की शुरुआत उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़कने के साथ हुई थी। आपको बता दें कि इससे पहले JNU में भी उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन का मामला सामने आया था।
शरजील इमाम पर क्या आरोप हैं?
PTI के मुताबिक, शरजील इमाम को इस मामले में 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उसपर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक इमाम ने 13 दिसंबर 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में और 16 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए भाषणों में कथित तौर पर असम और बाकी पूर्वोत्तर को भारत से ‘‘अलग करने’’की धमकी दी थी। आपको बता दें कि हाल ही में कोर्ट ने शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए चार से 10 अक्टूबर तक सात दिन की अंतरिम जमानत दी थी।
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