1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. भारत ने पाकिस्तान को UN में फिर से धोया, आतंकवाद को लेकर सुनाई खरी-खोटी; कारगिल युद्ध का किया जिक्र

भारत ने पाकिस्तान को UN में फिर से धोया, आतंकवाद को लेकर सुनाई खरी-खोटी; कारगिल युद्ध का किया जिक्र

 Written By: Amar Deep
 Published : Oct 23, 2026 04:09 pm IST,  Updated : Oct 23, 2026 04:09 pm IST

संयुक्त राष्ट्र में भारत की तरफ से बोलते हुए भाविका मंगलानंदन ने आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि यह पड़ोसी देश अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी नाकाम रहा है।

भारत ने पाकिस्तान को UN में सुनाई खरी-खोटी।- India TV Hindi
भारत ने पाकिस्तान को UN में सुनाई खरी-खोटी। Image Source : X/INDIAUNNEWYORK

भारत ने आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए यूनाइटेड नेशन्स में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। भारत ने पड़ोसी देश से धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल किए। साथ ही, भारत ने प्रवासियों के मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रैपोर्टियर की एक रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया। बता दें कि भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में देश की प्रथम सचिव (फर्स्ट सेक्रेटरी) भाविका मंगलानंदन ने जवाब दिया। रिपोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए, मंगलानंदन ने कहा कि इसमें यह बताया गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सभी गलत चीजें केवल 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) में हुईं, जबकि विकसित देशों में भी ऐसी ही दुखद स्थितियां थीं, जिन्हें पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया।

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को लताड़

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में आतंकवादी खुलेआम काम करते हैं। उन्होंने कहा कि एक आतंकवादी न केवल निर्दोष लोगों की जान लेता है, बल्कि पूरे देश की मानसिकता को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा, "कानूनी सीमाएं संप्रभु अधिकारों के सिद्धांतों के अनुसार तय की जानी चाहिए।" उन्होंने आगे कहा, "यह एक विडंबना है कि जो लोग आतंकवादियों के अधिकारों की पुरजोर वकालत करते हैं - वे आतंकवादी जो इंसानों के सबसे पवित्र अधिकार, यानी 'जीवन के अधिकार' का ही उल्लंघन करते हैं - वे लोग आतंकवाद के शिकार हुए पीड़ितों के अधिकारों की बात नहीं करते।"

अपने ही सैनिकों को अपनाने से इनकार

एक अनुभवी राजनयिक, मंगलानंदन ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाते हुए याद दिलाया कि कैसे 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान मारे गए अपने ही सैनिकों के शवों को लेने से इस्लामाबाद ने इनकार कर दिया था। उन्होंने इसे एक विडंबना बताया कि जिस देश ने अपने ही मारे गए सैनिकों को स्वीकार करने से मना कर दिया था, वही देश अब "आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और दफनाने की परंपराओं पर बड़े जोश के साथ बात करता है।" उन्होंने कहा, "मैं उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि यह भारतीय सेना ही थी जिसने कई पाकिस्तानी सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था।"

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर दिया जवाब

मंगलानंदन ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया और कहा कि इस्लामाबाद को अपना ध्यान उन इलाकों पर देना चाहिए जो उसके अवैध कब्जे में हैं और वहां हो रहे घटनाक्रमों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है, इसे लेकर पाकिस्तान का जो अत्यधिक जुनून है, उसे असल में उन इलाकों पर केंद्रित होना चाहिए जो उसके अवैध कब्जे में हैं, जैसे कि रावलकोट। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या लगातार घट रही है और उनके अधिकारों का आए दिन हनन होता है।" उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "जो देश अपने ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता, उसे भारत को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।" 

यह भी पढ़ें-

भूकंप से तिब्बत में 18 मौतें, आज सुबह सुबह चीन-पाकिस्तान-अफगानिस्तान में हिली धरती, जानें क्या रही तीव्रता

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश।