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'राम ने यादव को मारा' जैसी गलतियां मिलने पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, 158 गलत एंट्रीज पकड़ी गईं; बताई सॉफ्टवेयर की खामी

 Written By: Amar Deep
 Published : Oct 23, 2026 01:08 pm IST,  Updated : Oct 23, 2026 01:16 pm IST

यूपी में एमएलसी चुनाव से पहले मतदाता सूची में कई गड़बड़ियां पाई गईं। इसे लेकर चुनाव आयोग ने सफाई दी है। चुनाव ने कहा है कि मतदाता सूची में 158 गलत प्रविष्टियां मिली हैं। चुनाव आयोग ने इसे सॉफ्टेयर की गड़बड़ी बताया।

चुनाव आयोग ने गलतियों पर दी सफाई।- India TV Hindi
चुनाव आयोग ने गलतियों पर दी सफाई। Image Source : PTI

उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों की मतदाता सूची में कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। इनमें "राम ने यादव को मारा", "राम ने शर्मा को मारा" जैसे नाम और मतदाता के पिता के नाम की जगह "https://B.Com" जैसी प्रविष्टियां सामने आई हैं। इन गड़बड़ियों को देखते हुए चुनाव आयोग (EC) ने अब स्पष्टीकरण जारी किया है। शुक्रवार को यूपी की 11 MLC सीटों के लिए होने वाले मतदान से पहले, इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में ये गड़बड़ियां पाई गई थीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मतदाता सूची की इन गड़बड़ियों की एक सूची सामने आई, जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस पर प्रतिक्रिया दी।

158 गलत एंट्रीज मिलीं

दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने गुरुवार को इन गलतियों को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि 11 निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 14.81 लाख प्रविष्टियों में से 158 प्रविष्टियों में ऐसे विवरण मिले हैं जो "अजीब" हैं। उन्होंने कहा कि ये गलतियां कुल मतदाताओं के एक बहुत छोटे हिस्से से जुड़ी हैं। इनमें से कई मामले ऐसे हैं, जहां मतदाता सूची को ऑनलाइन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर द्वारा नामों के अनुवाद में गड़बड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश में पहली बार स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदाता सूची तैयार करने का काम डिजिटल तरीके से किया गया। इससे पहले यह प्रक्रिया जिला स्तर पर मैनुअल (हाथ से) तरीके से पूरी की जाती थी।

वोट देने से नहीं किया जाएगा वंचित

इससे पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बुधवार को कहा था कि 23 अक्टूबर को होने वाले यूपी विधान परिषद चुनावों में, मतदाता सूची में नाम या अन्य विवरणों में किसी छोटी-मोटी लिपिकीय (clerical) या छपाई संबंधी गलती के कारण किसी भी पात्र मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। रिनवा ने एक बयान में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार लागू किया गया यह प्रावधान, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में होने वाले चुनावों पर लागू होगा।

पहचान सुनिश्चित कराने के निर्देश

उन्होंने बताया कि सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं कि मतदाता सूची में छोटी-मोटी गलतियों के कारण पात्र मतदाताओं को अपना वोट डालने में कोई परेशानी न हो। रिनवा ने कहा कि यदि कोई मतदाता मतदान केंद्र पर पहुंचता है और पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी को मतदाता सूची में उसके विवरण में कोई लिपिकीय या छपाई संबंधी गलती दिखती है, तो सबसे पहले उस मतदाता की पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मतदान अधिकारी की पुष्टि के बाद कर सकेंगे मतदान

उन्होंने कहा कि यदि मतदान अधिकारी, मतदाता द्वारा प्रस्तुत मान्य दस्तावेजों या मतदाता सूची में दर्ज अन्य विवरणों के आधार पर इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि यह वही व्यक्ति है जिसका नाम सूची में है, तो उसे वोट डालने की अनुमति दी जानी चाहिए। रिनवा ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नाम या अन्य विवरणों में मौजूद छोटी-मोटी लिपिकीय या छपाई संबंधी गलतियों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी पात्र मतदाता को केवल लिखने या छपाई की छोटी-मोटी गलतियों के कारण उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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