Perambur Assembly Election 2026: तमिलनाडु की पेराम्बुर विधानसभा सीट राज्य की हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है, जो चेन्नई जिले के नॉर्थ चेन्नई लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस निर्वाचन क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ था और तब से लेकर अब तक यहां कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) के बीच रहता है। वर्तमान में यहां DMK के आर.डी. शेखर विधायक हैं, जिन्होंने 2021 के चुनावों में भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
इस बार इन चेहरों के बीच मुकाबला
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पेराम्बुर सीट पूरे देश की नजरों में है, क्योंकि इस बार यहां का चुनावी मुकाबला ऐतिहासिक रूप से दिलचस्प हो गया है। सुपरस्टार विजय, जिन्होंने हाल ही में अपनी नई पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) लॉन्च की है, ने इस सीट से खुद चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उनके मैदान में उतरने से यह मुकाबला अब केवल दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के बीच न रहकर एक हाई-प्रोफाइल त्रिकोणीय संघर्ष में बदलता दिख रहा है।
यहां से सत्ताधारी DMK ने एक बार फिर अपने मौजूदा विधायक आर.डी. शेखर पर भरोसा जताया है, जबकि PMK (पट्टाली मक्कल कत्ची) ने एम. थिलकबामा को AIADMK गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में उतारा है। इसके अलावा, NTK से वेट्री थमिज़ान भी मैदान में हैं।
पेराम्बुर सीट का चुनावी समीकरण
1951 में अपने गठन के समय पेराम्बुर एक सामान्य सीट थी, जहां 1952 में पहला विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें सोशलिस्ट पार्टी के एस. पक्कीरिसामी पिल्लई ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद, 1957 और 1962 के दौरान इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया। 1957 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने, 1962 में कांग्रेस के डी. सुलोचना ने, जबकि 1967 के चुनाव में यहां से पहली बार DMK ने अपनी जीत का झंडा गाड़ा। 1990 के दशक से इस सीट का चुनावी मिजाज पूरी तरह से DMK और AIADMK के बीच के कड़े मुकाबले में तब्दील हो गया।
पंजीकृत मतदाताओं की संख्या
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई आधिकारिक मतदाता सूची के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 2,22,792 पंजीकृत मतदाता हैं। चुनाव आयोग द्वारा किए गए हालिया संशोधनों के बाद पेराम्बुर में इस बार 24,142 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं, जो पूरे चेन्नई जिले में किसी भी अन्य सीट की तुलना में सबसे अधिक है। 2021 के चुनाव की तुलना में इस बार मतदाता सूची में काफी बदलाव किए गए हैं। 2021 में मतदाताओं की संख्या 3 लाख से ऊपर थी, वहीं SIR प्रक्रिया के बाद अब यह संख्या लगभग 2.22 लाख रह गई है।