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इस बार RAF और PAC के सुरक्षा घेरे में रहेंगे ‘लाट साहब’

 Reported By: Bhasha
 Published : Mar 28, 2021 01:23 pm IST,  Updated : Mar 28, 2021 01:23 pm IST

आनंद ने बताया कि इस बार ‘लाट साहब’ को आरएएफ तथा पीएसी के जवानों के सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। उनके साथ दो अपर पुलिस अधीक्षक समेत 1,500 पुलिस जवान भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चार ड्रोन कैमरों तथा रास्ते में जगह-जगह लगे खंभों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे जुलूस की निगरानी की जाएगी।

Laat Sahab to be provided security by RAF PAC this holi इस बार RAF और PAC के सुरक्षा घेरे में रहेंगे- India TV Hindi
Representational Image Image Source : PTI (FILE)

शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली पर निकलने वाले परंपरागत जुलूस के मुख्य केंद्र यानी ‘लाट साहब’ इस बार त्वरित कार्य बल (आरएएफ) और प्रादेशिक सशस्त्र बल (पीएसी) के सुरक्षा घेरे में रहेंगे। एक बार फिर कोविड-19 के साए में निकाले जा रहे इस जुलूस के लिए प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं और इसमें भाग लेने वालों को हर हाल में कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। पुलिस अधीक्षक एस.आनंद ने रविवार को 'भाषा' को बताया कि कोतवाली तथा सदर बाजार क्षेत्र में जहां से भी ‘लाट साहब’ का जुलूस निकलेगा, वहां के मुख्य मार्ग से जुड़ने वाले लगभग 40 छोटे मार्गों को अवरोधक लगाकर बंद कर दिया गया है तथा कुछ मार्गों पर यातायात का रास्ता भी बदला गया है।

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उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर में निकलने वाले ‘लाट साहब’ के जुलूस में ‘लाट साहब’ बनाए जाने वाले व्यक्ति को होरियारे (होली खेलने वाले लोग) परंपरागत रूप से जूते मारते हैं। इस बार सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहेगा और खुफिया तंत्र भी हर गतिविधि पर नजर रखेगा। आनंद ने बताया कि इस बार ‘लाट साहब’ को आरएएफ तथा पीएसी के जवानों के सुरक्षा घेरे में रखा जाएगा। उनके साथ दो अपर पुलिस अधीक्षक समेत 1,500 पुलिस जवान भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चार ड्रोन कैमरों तथा रास्ते में जगह-जगह लगे खंभों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे जुलूस की निगरानी की जाएगी।

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इस बीच, आयोजन समिति के एक सदस्य ने रविवार को बताया कि इस बार दिल्ली के बजाए मुरादाबाद से ‘लाट साहब’ को बुलाया गया है। ‘लाट साहब’ बनाए जाने वाले व्यक्ति को एक निश्चित धनराशि तो दी ही जाती है, साथ ही उस व्यक्ति को आयोजन समिति के सदस्य भी इनाम के तौर पर हजारों रुपए देते हैं। उन्होंने बताया कि यह ‘लाट साहब’ सोमवार को होली के दिन सुबह आठ बजे बैलगाड़ी रूपी 'सिंहासन' पर बैठ जाएंगे। उनकी पहचान छिपाने के लिए उनके चेहरे एवं हाथ पर कालिख लगाई जाती है तथा हेलमेट पहनाया जाता है।

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जुलूस के पूरे मार्ग पर होरियारे ‘लाट साहब’ की जय', ‘होलिका माता की जय' बोलते हुए ‘लाट साहब’ को जूते मारते हैं। स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज में इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर विकास खुराना ने ‘लाट साहब’ के जुलूस की परंपरा के बारे में बताया कि शाहजहांपुर शहर की स्थापना करने वाले नवाब बहादुर खान के वंश के आखिरी शासक नवाब अब्दुल्ला खान पारिवारिक लड़ाई के चलते फर्रुखाबाद चले गए और वर्ष 1729 में 21 वर्ष की आयु में वापस शाहजहांपुर आए। 

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उन्होंने बताया कि नवाब हिंदू मुसलमानों के बड़े प्रिय थे। एक बार होली का त्यौहार हुआ, तब दोनों समुदायों के लोग उनसे मिलने के लिए घर के बाहर खड़े हो गए और जब नवाब साहब बाहर आए तब लोगों ने होली खेली। बाद में नवाब को ऊंट पर बैठाकर शहर का एक चक्कर लगाया गया। इसके बाद से यह परंपरा बन गई। खुराना ने बताया कि शुरुआत में सद्भावनापूर्ण रूप से मनाई जाती रही इस परंपरा का स्वरूप बाद में बिगड़ता चला गया और ‘लाट साहब’ को जूते मारने का रिवाज शुरू कर दिया गया। इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई गई और मामला अदालत में भी पहुंचा लेकिन अदालत ने इसे पुरानी परंपरा बताते हुए इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

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