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230 दिन बाद AAP विधायक मेहराज मलिक ने खुली हवा में ली सांस, कठुआ जेल से बाहर आते ही सबसे पहले क्या कहा?

 Published : Apr 28, 2026 11:56 am IST,  Updated : Apr 28, 2026 02:55 pm IST

मेहराज मलिक AAP की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष हैं। उनकी रिहाई के लिए मंगलवार सुबह कठुआ जेल के द्वार खुलते ही दर्जनों लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की, ढोल की थाप पर नृत्य किया और उन्हें फूलों की माला पहनाई।

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आप विधायक मेहराज मलिक। Image Source : REPORTER INPUT

लंबी कानूनी लड़ाई और 8 महीने के इंतजार के बाद डोडा के विधायक मेहराज मलिक आज कड़ी सुरक्षा के बीच कठुआ जेल से रिहा हो गए। जेल के बाहर सुबह से ही उनके समर्थकों का तांता लगा रहा। ढोल की थाप और मिठाइयों के साथ कार्यकर्ताओं ने अपने नेता का स्वागत किया और उन्हें डोडा के लिए रवाना किया।

सोमवार को बेल मिली, पर मंगलवार को रिहाई

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक की लोक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद उन्हें मंगलवार को कठुआ जेल से रिहा कर दिया गया। मलिक ने कहा कि अब जब उन्हें रिहा कर दिया गया है, वह लोगों के मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे। मलिक के खिलाफ डोडा जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पिछले वर्ष 8 सितंबर को जारी किए गए हिरासत आदेश को जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी ने रद्द कर दिया। जस्टिस ने अधिकारियों को ''याचिकाकर्ता-बंदी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। इसके बाद सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आज सुबह जेल प्राधिकारियों ने मलिक को रिहा कर दिया।'

समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत

आम आदमी पार्टी नेता की रिहाई के लिए सुबह कठुआ जेल के द्वार खुलते ही दर्जनों लोगों ने उनके समर्थन में नारेबाजी की, ढोल की थाप पर नृत्य किया और उन्हें फूलों की माला पहनाई। उन्होंने जेल से रिहा होने के बाद कहा कि वह लोगों के हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। मलिक ने पत्रकारों से कहा, ''अब मैं जेल से बाहर आ गया हूं। मुझे न्याय दिलाने के लिए मैं न्यायपालिका का अभार व्यक्त करता हूं। मैं लोगों की समस्याएं उठाता रहूंगा।''

क्यों गिरफ्तार हुए थे मेहराज मलिक?

बता दें कि मेहराज मलिक AAP की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष हैं और उन्हें सितंबर में सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया था तथा बाद में उन्हें कठुआ जेल में रखा गया था। उन्होंने 24 सितंबर को हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अपनी हिरासत को चुनौती दी और मुआवजे के तौर पर 5 करोड़ रुपये की मांग की। हाईकोर्ट ने 23 फरवरी को इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

(रिपोर्ट- शाम सढोतरा)

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