जम्मू-कश्मीर में बादल और भारी बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। पिछले 24 घंटों में कश्मीर और लद्दाख में बादल फटने की आठ घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में 2 लोगों की मौत हो गई है और कई घर और सड़कें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। एक्सपर्ट्स ने बताया है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी तबाही दूर नहीं है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम संबंधी सलाहों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है।
करीब 33 लोगों की मौत
जानकारी के अनुसार इस साल अब तक जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की कम से कम 37 घटनाएं हुई हैं, जिनमें लगभग 33 लोगों की मौत हुई है। इन हादसों में घरों, सड़कों, पुलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से जुलाई के बीच बादल फटने की कम से कम 22 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि जुलाई के दूसरे भाग और अगस्त की शुरुआत में लगातार भारी बारिश के कारण कई और घटनाएं हुईं, जिससे बादल फटने की कुल दर्ज घटनाओं की संख्या 37 से अधिक हो गई।
जम्मू डिवीजन में सबसे अधिक मौतें
दर्ज की गई मौतें मुख्य रूप से बादल फटने, अचानक बाढ़ (Flash Floods) और बारिश के कारण हुए भूस्खलन (landslides) के कारण हुईं, जिनमें जम्मू डिवीजन में सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं। सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में पुंछ, राजौरी, कठुआ, डोडा और किश्तवाड़ शामिल हैं, जबकि लद्दाख और कश्मीर के कई हिस्सों, खासकर शोपियां और कुपवाड़ा में भी हाल के हफ्तों में बार-बार अचानक बाढ़ की स्थिति देखी गई है। मानसून का असर इस क्षेत्र में अभी भी बना हुआ है।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
इन प्राकृतिक आपदाओं को लेकर पर्यावरण एक्सपर्ट एजाज रसूल ने कहा- "बादल फटना एक ऐसी घटना है जो पहले बहुत कम होती थी। हम बादल फटने के बारे में बहुत कम सुनते थे, लेकिन अब जम्मू इलाके में, पुंछ, राजौरी, डोडा, किश्तवाड़ और यहां पहलगाम और अनंतनाग में बादल फटने की डेंसिटी और समय-समय पर होने वाले इंटरवल कई गुना बढ़ गए हैं। हर दूसरे या तीसरे दिन आप पाएंगे कि बादल फटते हैं। इसलिए, इंटेंसिटी और फ्रीक्वेंसी बढ़ गई है, और इससे बहुत परेशानी हो रही है और वहां रहने वाले लोगों के घरों पर असर पड़ रहा है। सरकार बादल फटने से आने वाली बाढ़ की एक डायरेक्टरी बनाए हुए है और स्टडी चल रही हैं। वे ऐसे उपाय अपनाने के बारे में सोच रहे हैं जिन्हें हम बादल फटने के बुरे असर से बचाने के लिए लागू कर सकें। अगर हम बादल फटने को नहीं रोक सकते, तो यह एक नेचुरल बात है। अगर वे उस पानी को किसी स्टोरेज बेसिन में भेज सकते हैं, तो हम बाद में उस पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं और तबाही को रोका जा सकता है।"
बुधवार को भी भारी बारिश के आसार
वहीं, श्रीनगर के सीनियर साइंटिस्ट परवीन कुमार ने कहा- "हमने पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि जम्मू-कश्मीर में 1 अगस्त से 4 अगस्त तक मौसम खराब रहेगा। पीर पंजाल इलाके और पहाड़ी इलाकों में कई जगहों पर भारी बारिश होगी, तेज बारिश होगी, जिससे मिट्टी धंसने और लैंडस्लाइड होने की घटनाएं हुई हैं। यह 5 अगस्त तक जारी रहेगा। मंगलवार और बुधवार को पूरे जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर बारिश होगी। कुछ जगहों पर अंदाजे के मुताबिक, भारी बारिश होगी। 6 अगस्त के बाद मौसम सुधरेगा और बारिश कम होगी। 8 अगस्त के बाद फिर से बारिश होगी और कुछ जगहों पर फिर से भारी बारिश हो सकती है। किसानों को पहले लोकल मौसम देखना चाहिए और फिर अपना काम जारी रखना चाहिए। नहीं तो, उन्हें अपना काम रोक देना चाहिए। पहाड़ी इलाकों में जब तेज बारिश होती है, तो वह एक चैनल से आती है, जिससे बाढ़ की संभावना भी बढ़ जाती है।"
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