श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राज्य बीजेपी इकाई ने रविवार को कहा कि BRICS शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत है, जबकि पाकिस्तान और आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों के लिए यह एक झटका है। बीजेपी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस भारत की विदेश नीति की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा, ''ब्रिक्स देशों द्वारा पहलगाम आतंकी हमले और सीमा पार आतंकवाद की निंदा भारत और उसकी विदेश नीति की बड़ी जीत है।''
भारत के लगातार प्रयासों को व्यापक मान्यता मिली
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि BRICS का सामूहिक रुख दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष आतंकवाद को उजागर करने के भारत के लगातार प्रयासों को व्यापक मान्यता मिली है। उन्होंने कहा, ''यह पाकिस्तान के दुष्प्रचार की हार है और उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो मानते हैं कि वे आतंकवाद को देश की नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। दुनिया आतंकवाद पर दोहरे मानदंडों को स्वीकार करने के लिए अब तैयार नहीं है।''
पीएम मोदी के दृष्टिकोण को दुनिया भर में स्वीकार्यता मिल रही
अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत, अधिक सहयोगी और सुरक्षित 'ग्लोबल साउथ' के दृष्टिकोण को स्वीकार किया जाना भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ''मोदी के दृष्टिकोण को दुनिया भर में स्वीकार्यता मिल रही है। BRICS के लिए भारत को सबसे भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखा जाना एक कूटनीतिक उपलब्धि है। हमारे देश की आर्थिक ताकत, लोकतांत्रिक साख और रणनीतिक महत्व ने समूह के भविष्य को आकार देने में भारत को केंद्रीय भूमिका प्रदान की है।''
कांग्रेस के नेता गुलाम अहमद मीर ने क्या कहा?
वहीं जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के नेता गुलाम अहमद मीर ने रविवार को BRICS शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा किए जाने का स्वागत किया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर चीन के लिए "रेड कारपेट बिछाने" का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चीन ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था। मीर ने कहा, "BRICS शिखर सम्मेलन में भारत में डेढ़-दो साल पहले हुए हमले की निंदा किया जाना कुल मिलाकर स्वागत योग्य कदम है।"
महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया में मानवाधिकारों का हमेशा समर्थन करने वाले देश के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करने का अवसर गंवा दिया। महबूबा ने यहां पत्रकारों से कहा, "जिस तरह हमारे प्रधानमंत्री को BRICS के अध्यक्ष और मेजबान के रूप में बोलना चाहिए था, जिस मजबूती से उन्हें अपनी बात रखनी चाहिए थी, मुझे लगता है कि वह इससे पीछे हट गए। उन्होंने अपने शब्दों का बहुत-बहुत सावधानी से इस्तेमाल किया।" (इनपुट-भाषा)
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