केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बुधवार को हैरान करने वाली घटना घटी। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला किया गया। जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान उनपर फायरिंग कर दी गई। इस हमले में पूर्व सीएम फ़ारूक़ अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए। हमलावर ने कनपटी पर पिस्टल सटाकर ब्लैंक रेंज से फायरिंग की थी लेकिन निशाना चूक जाने की वजह से फारूक अब्दुल्ला को गोली नहीं लगी। समय रहते सिक्योरिटी ने हमलावर को देख लिया और उसका हाथ ऊपर की तरफ कर दिया। अब इस घटना को लेकर फारूक अब्दुल्ला का पहला बयान सामने आ गया है।
मैं इस आदमी को नहीं जानता- फारूक अब्दुल्ला
अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले के बारे में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा, "मैं जब कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल रहा था, तभी मुझे पटाखे की आवाज सुनाई दी...तुरंत मुझे एक कार में बिठाया गया। बाद में मुझे बताया गया कि एक आदमी पिस्तौल के साथ था जिसने 2 गोलियां चलाईं। मैं न तो इस आदमी (आरोपी) को जानता हूं और न ही मुझे उसके बारे में कोई जानकारी है। मुझे नहीं पता कि उसका मकसद क्या था।"
शादी में कोई पुलिस मौजूद नहीं थी- फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला ने कहा- "NSG और मेरे साथ मौजूद लोकल पुलिसकर्मियों ने मुझे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। उन्होंने जो किया है उसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। अल्लाह की वजह से, मेरी सुरक्षा मेरे साथ मौजूद थी और मेरी जान बच गई। मुझे नहीं पता कि उसका (आरोपी कमाल) इरादा क्या था। यह कहना कि यह एक सुरक्षा चूक थी, एक बड़ा बयान होगा। इस शादी में कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं, लेकिन कोई पुलिस मौजूद नहीं थी।"
अमित शाह ने फारूक अब्दुल्ला से की बात
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने बताया- "मुझे केंद्रीय गृह मंत्री का अमित शाह का फोन आया, जिन्होंने मेरा हालचाल पूछा और मुझे आश्वस्त किया है कि वे मामले की जांच करेंगे। इस घटना की जांच होनी चाहिए। अब जब नफरत का माहौल है तो ऐसी बातें होती रहती हैं। कोई भी धर्म नफरत नहीं, सिर्फ प्यार करना सिखाता है। चाहे आप कितनी भी सुरक्षा बढ़ा लें, हत्यारे को हमेशा फायदा होता है। समस्या ये है कि हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां आतंकवाद चरम पर है और हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते।"
राज्य का दर्जा देने का वादा किया गया था- फारूक अब्दुल्ला
अपनी हत्या के प्रयास पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा- "केंद्र सरकार और केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या प्रदेश की स्थिति में असल में सुधार हुआ है। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमें एक साथ काम करना होगा क्योंकि हम एक लोकतंत्र हैं और अपनी राय व्यक्त करनी होगी। एक निर्वाचित सरकार के पास शक्तियां नहीं हैं- यह इस तरह से कैसे जारी रह सकती है? हमसे वादा किया गया था कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।"