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लद्दाख के शराब व्यापारियों ने सोनम वांगचुक के खिलाफ खोला मोर्चा, दोहरे मापदंडों का लगाया आरोप

 Written By: Amar Deep
 Published : Nov 01, 2026 03:03 pm IST,  Updated : Nov 01, 2026 03:03 pm IST

'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सोनम वांगचुक पर शराब को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। उन्होंने वांगचुक को चेतावनी दी है कि वे कानूनी रूप से काम करने वाले और टैक्स चुकाने वाले कारोबारियों की आजीविका को खतरे में डालना बंद करें।

'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।- India TV Hindi
'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। Image Source : REPORTER INPUT

'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' ने कल 31 अक्टूबर को लेह में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने खुद को पर्यावरणविद बताने वाले सोनम वांगचुक पर लद्दाख में शराब की बिक्री को लेकर "पाखंड" और "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाया। सोनम वांगचुक 28 अक्टूबर को उन महिलाओं के साथ बैठे थे, जो लद्दाख को 'शराब-मुक्त' (ड्राई लद्दाख) बनाने की मांग कर रही थीं। उसी दौरान, उन्होंने टैक्स-फ्री स्थानीय शराब बनाने की इकाइयों (breweries) का समर्थन किया। सोनम वांगचुक के इस विरोधाभास को लेकर 'ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन' (लद्दाख शराब व्यापारी संघ) ने उन पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने खुद को पर्यावरण कार्यकर्ता बताने वाले सोनम वांगचुक पर शराब के मामले में 'दोहरे मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया है।

दरअसल, लेह के एनडीएस मेमोरियल पार्क में धार्मिक संगठनों से जुड़ी कुछ महिलाएं 3-4 दिनों से धरने पर बैठी थीं। सोनम वांगचुक भी इस धरने में बैठे थे। इस दौरान वांगचुक ने लद्दाख की पारंपरिक शराब को वहां की विरासत का हिस्सा बताया। उन्होंने इसे एक "बेहतर और स्वस्थ" विकल्प बताते हुए इसके प्रचार-प्रसार की वकालत की। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि स्थानीय युवाओं को गेहूं से शराब बनाने वाली आधुनिक छोटी इकाइयां (microbreweries) लगाने में मदद दी जाए और उन्हें टैक्स में छूट दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दुकानों पर बिकने वाली शराब की कीमत इतनी ज्यादा होनी चाहिए कि लोग उसे खरीदने से बचें।

हालांकि, व्यापारी उनके इस तर्क से सहमत नहीं हैं। शनिवार, 31 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि एक तरफ तो वांगचुक 'शराब-मुक्त लद्दाख' का समर्थन करते हैं, और दूसरी तरफ वे स्थानीय शराब 'चांग' की तारीफ करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ शराब को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है, जबकि ड्रग्स, सिगरेट और मांस भी हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने वांगचुक पर 'चुनिंदा सक्रियता' दिखाने का आरोप लगाया और उनसे कहा कि वे उनकी आजीविका के मामलों में दखल देना बंद करें।

"किसी एक समुदाय का व्यापार नहीं"

एसोसिएशन ने कहा कि शराब का व्यापार एक कानूनी रूप से लाइसेंस प्राप्त कारोबार है, जिसे मुसलमान, बौद्ध, ईसाई और हिंदू - सभी समुदाय के लोग चलाते हैं। उन्होंने कहा कि इसे किसी एक समुदाय के व्यापार के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मांस, सिगरेट और नशीले पदार्थों पर भी यही नियम लागू किए जाएं, तो उन्हें पूर्ण प्रतिबंध मंजूर होगा। कई नए लाइसेंस धारकों ने लाइसेंस, स्टॉक और जगह (परिसर) पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, और कुछ ने तो एक महीने से भी कम समय तक अपना कारोबार चलाया है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या वांगचुक के परिवार द्वारा घर पर बनाई गई सेब की वाइन - जिसे उनके गृह नगर स्थित उनके पारिवारिक रिसॉर्ट में "उले टोपो" (Ule Topo) के नाम से बेचा जाता है - के पास कोई लाइसेंस है, और प्रशासन ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है?

स्थानीय शराब व्यापारियों ने एक तीखी टिप्पणी में 'उले टोपो' (Uleytokpo) का जिक्र किया - जो सिंधु नदी के किनारे बसा एक छोटा सा गांव है और सोनम वांगचुक का जन्मस्थान तथा पैतृक घर है। यह गांव अपने 'उले एथनिक रिसॉर्ट' (जिसे वांगचुक का परिवार चलाता है) के लिए जाना जाता है। साथ ही, यहां 'उले' नाम से ही स्थानीय स्तर पर बनी फलों और सेब की वाइन भी तैयार की जाती है, जिस पर कोई सरकारी निगरानी नहीं होती। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे 'उले टोपो' वाइन का नाम लेकर, शराब व्यापारियों ने एक तरह से वांगचुक के अपने ही घर की ओर इशारा किया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब इस एक्टिविस्ट के गांव में उनके परिवार द्वारा बनाई और बेची जाने वाली स्थानीय शराब बिना किसी प्रशासनिक कार्रवाई या कमर्शियल लाइसेंस के बेरोकटोक बिक रही है, तो फिर उनके अपने वैध लाइसेंस वाले कारोबारों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है और 'नैतिक प्रतिबंध' (moral prohibition) के नाम पर उन्हें क्यों घेरा जा रहा है?

कैसे बढ़ा विवाद

सोनम वांगचुक प्रशासन की शराब नीति के सबसे मुखर आलोचकों में से एक रहे हैं। 22 अक्टूबर को दिल्ली के लद्दाख भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने आरोप लगाया कि घरों और स्कूलों के पास बार खोलकर शराब को जबरन बढ़ावा दिया जा रहा है। एक्स पर उन्होंने उपराज्यपाल (LG) वी.के. सक्सेना पर आरोप लगाया कि वे नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से लड़ने के नाम पर "शराब की बौछार" कर रहे हैं। प्रशासन ने उनके दावों को "बेबुनियाद" और "जानबूझकर फैलाई गई गलत जानकारी" करार दिया। प्रशासन का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश (UT) में शराब की केवल एक दुकान है, और लोगों की उपराज्यपाल सक्सेना से मुलाकात के बाद 26 अगस्त को ही 2026-27 की आबकारी नीति वापस ले ली गई थी। 

28 अक्टूबर को सोनम वांगचुक उन महिलाओं के साथ धरने पर बैठे, जो लद्दाख को 'शराब-मुक्त' (ड्राई लद्दाख) बनाने की मांग कर रही थीं। इसी दौरान, उन्होंने स्थानीय स्तर पर बनने वाली शराब (ब्रूअरीज) को टैक्स से छूट देने का सुझाव भी दिया। हालांकि, 'ऑल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन' ने सवाल उठाया है कि वांगचुक के परिवार द्वारा बनाई जाने वाली और उनके गृहनगर स्थित उनके ही रिसॉर्ट में "उले टोपो" (Ule Topo) के नाम से बेची जाने वाली घर की बनी सेब की शराब के पास कोई लाइसेंस क्यों नहीं है, और प्रशासन ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है।

दोहरे मापदंडों के मुख्य आरोप-

  • परिवार का अवैध शराब व्यवसाय: एसोसिएशन ने सबूत पेश करते हुए दावा किया कि वांगचुक के भाई अपने रिसॉर्ट में "उले तोकपो एप्पल होममेड वाइन" (Ule Tokpo Apple Homemade Wine) के नाम से बिना लाइसेंस वाली शराब बनाते और बेचते हैं। वे उन सख्त लाइसेंसिंग नियमों और शुल्कों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हैं, जिनका पालन आम शराब विक्रेताओं को करना पड़ता है।
  • शराब के सेवन पर पाखंड: एक तरफ वांगचुक शराब के लिए सख्त नीतियों और वैध विक्रेताओं पर अधिक कर (टैक्स) लगाने की वकालत करते हैं, तो दूसरी तरफ वे "चांग" (Chang) जैसी पारंपरिक स्थानीय शराब का बचाव करते हैं और इसे वैध तथा स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताते हैं।
  • अनुचित आर्थिक निशाना: वैध होटल और बार मालिकों का कहना है कि वे सरकार को 112-115 करोड़ रुपये का टैक्स देते हैं। उनका आरोप है कि सोनम वांगचुक लोगों का ध्यान खींचने और राजनीतिक लाभ पाने के लिए उनके रोजगार को गलत तरीके से निशाना बना रहे हैं।
  • चुनिंदा सक्रियता: वक्ताओं ने वांगचुक की पर्यावरणवादी छवि में मौजूद विरोधाभासों को उजागर किया। उन्होंने बताया कि जहां वे लाइसेंस प्राप्त शराब के कारोबार पर कड़ा रुख अपनाते हैं, वहीं स्थानीय मांस उद्योग के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों पर पूरी तरह चुप रहते हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन के सभी 60 सदस्य मौजूद थे। एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया है कि UT प्रशासन बिना लाइसेंस वाले "उले" (Uley) ब्रांड के खिलाफ कार्रवाई करने में क्यों नाकाम रहा है। साथ ही, उन्होंने वांगचुक को चेतावनी दी है कि वे कानूनी रूप से काम करने वाले और टैक्स चुकाने वाले कारोबारियों की आजीविका को खतरे में डालना बंद करें।

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