पहले लद्दाख में शराब की दुकानों पर सिर्फ बीयर की बिक्री होती थी, जिस वजह से टूरिस्ट दूसरे राज्यों से शराब लेकर जाते थे। वहीं अब रेवन्यू की दृष्टि और तस्करी पर लगाम लगाने की सोच से नई शराब नीति बनाई गई है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने नई आबकारी नीति (Excise Policy) को मंजूरी दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों और ड्रग्स पर बढ़ती निर्भरता को रोकना तथा लोगों और पर्यटकों को नियंत्रित एवं कानूनी तरीके से कम एल्कोहल वाले पेयों के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना है।
नई नीति के तहत शराब व्यापार के लिए पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित नियामक व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि लद्दाख में अधिकृत दुकानों पर हार्ड शराब उपलब्ध न होने के कारण कई लोग अवैध शराब और नशीले पदार्थों की ओर रुख कर रहे थे।
नई नीति क्यों लाई गई?
पिछले कुछ महीनों में सामाजिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs), धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के साथ कई बैठकों के दौरान यह चिंता सामने आई थी कि हार्ड शराब की अनुपलब्धता के कारण नशीले पदार्थों और साइकोट्रॉपिक ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी सुझाव दिया था कि अधिकृत दुकानों पर शराब के विकल्प बढ़ाए जाएं ताकि ड्रग्स के बढ़ते दुरुपयोग पर अंकुश लगाया जा सके। इसके बाद अधिकारियों की एक समिति गठित कर नई आबकारी नीति तैयार की गई।
नई आबकारी नीति की प्रमुख बातें
- अब रिटेल दुकानों पर विदेशी शराब (Foreign Liquor) और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) की बिक्री की अनुमति होगी। पहले केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय बेचने की अनुमति थी।
- शराब, बीयर और वाइन पर आबकारी शुल्क (Excise Duty) की दरों को तर्कसंगत बनाया गया है।
- पहली बार गेस्ट हाउस और होमस्टे को लाइसेंस शुल्क देकर शराब बेचने की अनुमति मिलेगी।
- पहली बार माइक्रो-ब्रुअरी वाले बीयर बार खोलने की अनुमति दी गई है।
- लद्दाख में शराब की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 20 नई शराब दुकानें ई-नीलामी (e-auction) के जरिए खोली जाएंगी।
- पहले पूरे लद्दाख में केवल 2 शराब दुकानें संचालित थीं।
- अब नुब्रा, चांगथांग, शाम और जांस्कर क्षेत्रों में भी शराब उपलब्ध होगी। पहले शराब केवल लेह शहर में मिलती थी।
- अब होटल परिसरों और कमरों में भी शराब सेवन की अनुमति होगी। पहले शराब का सेवन केवल होटल बार तक सीमित था।
लाइसेंस प्रक्रिया हुई आसान
आबकारी लाइसेंस के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 16 से घटाकर 6 कर दी गई है। अब केवल PAN, आधार, इन्कॉरपोरेशन सर्टिफिकेट, परिसर का नक्शा, GST/FSSAI/पर्यटन पंजीकरण और नियम-18 के अनुपालन की आवश्यकता होगी। लाइसेंस देने के लिए जिला प्रशासन की अनिवार्य "राय" (Opinion) की शर्त समाप्त कर दी गई है। पहले इस प्रक्रिया में कई महीने लग जाते थे।
विशेष आयोजनों में भी मिलेगी अनुमति
नई आबकारी नीति के तहत व्यवस्था की गई है कि निजी आयोजनों में निर्धारित शुल्क देकर शराब परोसने की अनुमति होगी। बैंक्वेट हॉल और पार्टी हॉल में भी विशेष अवसरों पर शराब परोसने को मंजूरी दी गई है। पहले यह अनुमति नहीं थी।
राजस्व बढ़ाने के उपाय
थोक (Wholesale) लाइसेंस की वार्षिक फीस 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। लेह नगर क्षेत्र में शराब दुकानों की न्यूनतम बोली (Base Price) 60 लाख रुपये तय की गई है। अन्य क्षेत्रों में यह 30 लाख रुपये होगी। वहीं रिटेल विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 12% से घटाकर 10% किया गया है। सभी IMFL ब्रांडों पर 500 रुपये प्रति LPL की समान आबकारी ड्यूटी लागू की गई है।
सख्त निगरानी और उपभोक्ता सुरक्षा
MRP से अधिक कीमत पर शराब बेचने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा। सुरक्षा जमा राशि (EMD) भी जब्त की जा सकती है। शराब की बोतलों पर आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत सुरक्षा होलोग्राम लगाना अनिवार्य होगा। आबकारी कर चोरी रोकने और ट्रैकिंग मजबूत करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
पर्यावरण और रोजगार पर भी फोकस
प्लास्टिक की बोतलों में शराब बिक्री पर रोक लगाई गई है। अब केवल स्वीकृत कांच की बोतलों, PET बोतलों और टिन कैन में ही शराब बेची जा सकेगी। लाइसेंसधारी 21 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को रोजगार दे सकेंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
धार्मिक और संवेदनशील स्थानों से दूरी जरूरी
नई नीति के अनुसार शराब की दुकानें केवल तभी खोली जा सकेंगी जब वे धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक पार्कों से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर हों। यह प्रावधान भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रखा गया है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि संशोधित आबकारी नीति का उद्देश्य जनहित, पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और राजस्व वृद्धि के बीच संतुलन बनाना है। साथ ही अवैध शराब और नशीले पदार्थों पर निर्भरता को कम करना भी है।
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