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पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ युद्ध स्तर पर काम कर रही पुलिस, नशे के कारोबारियों पर कड़ा एक्शन

 Reported By: Manzoor Mir Edited By: Shakti Singh
 Published : May 15, 2026 09:37 pm IST,  Updated : May 15, 2026 09:37 pm IST

जम्मू कश्मीर पुलिस नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले लोगों के खिलाफ लगातार एक्शन ले रही है। नशे के जरिए होने वाली कमाई से ही आतंकियों को सुविधाएं दी जाती हैं। इसी वजह से नशे के कारोबार को पुलिस खत्म करने में लगी हुई है।

Jammu Kashmir Police- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : PTI

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के समर्थन से चलाए जा रहे नार्को-आतंक नेटवर्क के खिलाफ पूरी तरह से युद्ध छेड़ दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों का भी दृढ़ विश्वास है कि नशीले पदार्थों के जरिए जुटाए गए पैसे को जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों में लगाया जाता है, ताकि भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा जा सके और आतंकी गतिविधियां चलाई जा सकें। एजेंसियों का यह भी पक्का मानना ​​है कि आईएसआई समर्थित इन नार्को-व्यापारियों का मुख्य मकसद जम्मू-कश्मीर में उन आतंकी संगठनों को फिर से खड़ा करना है, जिन्हें इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों ने पहले ही काफी हद तक खत्म कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख ने सीधे तौर पर और साफ शब्दों में आईएसआई से जुड़े आतंकी शहजाद भट्टी को चेतावनी दी। उन्होंने भट्टी पर सीमा पार से चलाए जा रहे नार्को-आतंक अभियानों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया, जिनका मकसद जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद को फिर से जिंदा करना है।

भट्टी पर तस्करी नेटवर्क चलाने का आरोप

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, भट्टी इस केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय नार्को-आतंक गतिविधियों के पीछे के प्रमुख सरगनाओं में से एक के रूप में सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी सहित भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भट्टी पर एक अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी और हथियारों की तस्करी का नेटवर्क चलाने का आरोप लगाया है। माना जाता है कि इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े हैं और इसका संचालन पाकिस्तान और दुबई तक फैला हुआ है।

नशे के आदी युवाओं को बना रहे कट्टरपंथी

जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि यह नेटवर्क सीमा पार से पंजाब और जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी में शामिल रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि नशीले पदार्थों की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकी अभियानों को वित्तपोषित करने, हथियार और गोला-बारूद खरीदने, और इस क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्कों को बनाए रखने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों का यह भी आरोप है कि हैंडलर्स ने एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म, यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल उन कमजोर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकी मॉड्यूल में भर्ती करने के लिए किया है, जो नशे के आदी हो चुके हैं।

नशे की तस्करी टेरर फंडिंग का बड़ा सहारा

सुरक्षा विशेषज्ञ नार्को-टेरर फाइनेंसिंग को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने वाले मुख्य कारणों में से एक मानते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ सालों में भारतीय एजेंसियों ने पारंपरिक हवाला फंडिंग चैनलों को काफी हद तक बाधित कर दिया है। अवैध वित्तीय नेटवर्क पर कड़ी निगरानी के चलते ऐसा माना जा रहा है कि आतंकी गुटों ने फंडिंग के मुख्य स्रोत के तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

सरकार की कार्रवाई तेज

अधिकारियों का कहना है कि सरकार का तेज किया गया नशा-विरोधी अभियान अब न केवल जम्मू-कश्मीर के भीतर सक्रिय लोगों को निशाना बना रहा है, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में बैठे हैंडलर्स और मददगारों को भी निशाना बना रहा है। यह सख्त कार्रवाई आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती और सीमा पार तस्करी के पूरे तंत्र को खत्म करने के उद्देश्य से की जा रही है, जो इस क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

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